लॉरेंस बिश्नोई कस्टडी इंटरव्यू मामले में सच दबाने की कोशिश पंजाब में कानून के राज और न्यायिक जवाबदेही पर सीधा हमला: सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां
लुधियाना, 26 मार्च 2026: राष्ट्रीय भारतीय जनता पार्टी के नेता एडवोकेट सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां ने पुलिस हिरासत में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू से जुड़े अत्यंत विवादास्पद मामले में पंजाब सरकार द्वारा सत्य और जवाबदेही को दबाने के कथित सुनियोजित प्रयास की कड़ी और स्पष्ट शब्दों में निंदा करते हुए एक तीखा बयान जारी किया।
ग्रेवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि माननीय न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल के सेवानिवृत्त होते ही याचिका को अचानक बंद करने की कोशिश से जुड़े घटनाक्रम पंजाब राज्य में पारदर्शिता, कानून के शासन और संवैधानिक जवाबदेही पर सीधा और शर्मनाक हमला प्रतीत होते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार ने अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे को दबाने का बेशर्म प्रयास किया है। इस कदम का संदिग्ध समय स्पष्ट रूप से अवसरवाद की बदबू देता है और यह अत्यंत गंभीर तथा चिंताजनक कानूनी प्रश्न खड़े करता है कि आखिर सरकार पंजाब के लोगों से क्या छिपाने का प्रयास कर रही है। ऐसा आचरण प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है और न्यायिक जांच को बाधित करने तथा न्याय की प्रक्रिया को पटरी से उतारने का जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।
ग्रेवाल ने कहा कि माननीय न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने दुर्लभ साहस, ईमानदारी और न्यायिक स्वतंत्रता का परिचय देते हुए उन अत्यंत संदिग्ध और प्रश्नचिह्न खड़े करने वाली परिस्थितियों को उजागर किया जिनके तहत कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को पंजाब पुलिस की हिरासत में रहते हुए मीडिया इंटरव्यू देने की अनुमति दी गई। इस चौंकाने वाले और हिरासत अनुशासन तथा कानूनी प्रक्रिया के गंभीर उल्लंघन की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायालय की निगरानी में जांच कराने के बजाय पंजाब सरकार अब ऐसा प्रतीत होता है कि सच्चाई को दबाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए एक भद्दे और हताश प्रयास में लगी हुई है।
ग्रेवाल ने आगे कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई कार्यपालिका की शक्तियों का खुला दुरुपयोग है और संस्थागत जवाबदेही को कमजोर करने का एक निर्लज्ज प्रयास है। किसी भी सभ्य लोकतंत्र में इसे सुशासन नहीं कहा जा सकता। यह दरअसल एक स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला पर्दा डालने का प्रयास है जो अत्यंत जल्दबाजी में और जनता के विश्वास तथा संवैधानिक नैतिकता की पूर्ण अवहेलना के साथ किया जा रहा है।
ग्रेवाल ने माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश, चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के पर्यवेक्षक तथा प्रतिष्ठित कानूनी संस्थानों जैसे लाइव लॉ, बार एंड बेंच और पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे न्याय, पारदर्शिता और कानून के शासन में जनता के विश्वास की रक्षा के हित में इस अत्यंत गंभीर मामले का तत्काल स्वतः संज्ञान लें।
उन्होंने कहा कि देश को यह अवश्य पता चलना चाहिए कि किसके अधिकार से एक कुख्यात गैंगस्टर को पुलिस हिरासत से व्यापक रूप से प्रसारित होने वाला इंटरव्यू देने की अनुमति दी गई और प्रशासनिक तथा पुलिस तंत्र के भीतर किन लोगों ने इस तरह के गंभीर हिरासत प्रोटोकॉल उल्लंघन को संभव बनाया या इसकी अनुमति दी।
ग्रेवाल ने आगे माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल से भी इस मामले का संज्ञान लेकर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि एक निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच शुरू की जाए ताकि सच्चाई राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक हेरफेर के नीचे दफन न हो सके।
पंजाब पुलिस के महानिदेशक को संबोधित करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि पंजाब के लोग वास्तविक कानून व्यवस्था चाहते हैं, न कि राजनीतिक हेरफेर, संस्थागत समझौता और तथ्यों को दबाने की प्रवृत्ति। यदि वर्तमान सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है तो इस मामले को बंद करने की इतनी जल्दबाजी और संदिग्ध कोशिश का कोई औचित्य नहीं हो सकता।
ग्रेवाल ने कहा कि पंजाब के लोग जागरूक और राजनीतिक रूप से सजग हैं। वे इन घटनाक्रमों को बहुत ध्यान से देख रहे हैं और जवाबदेही को दबाने, न्याय को बाधित करने तथा इस चौंकाने वाले और अभूतपूर्व प्रकरण के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने के ऐसे भद्दे और हताश प्रयासों से धोखा नहीं खाएंगे।