Himachal High Court: तबादले के खिलाफ याचिका दायर करने से रोकना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप या बाधा डालने के समान : हाईकोर्ट
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 20 मई 2026 : प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तबादले के खिलाफ याचिका दायर करने से रोकना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप या बाधा डालने के समान है। इसीलिए ऐसा करना आपराधिक अवमानना की परिभाषा में सम्मिलित है।
कोर्ट में याचिका दायर करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत न केवल भारत के नागरिकों, बल्कि अन्य लोगों को भी प्रदत्त संवैधानिक अधिकार है। हाईकोर्ट द्वारा की गई कानून की इस स्पष्टता के दृष्टिगत अब अनुशासनात्मक कार्यवाही के नाम पर कर्मचारियों को तबादलों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने से रोकना अनुशासनात्मक प्राधिकारी को मुश्किल में डाल सकता है।
2 दिन पहले प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई कर्मचारी तबादले के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट का रुख करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 तथा अन्य लागू नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। कार्मिक विभाग ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन कर सीधे न्यायालय जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत फरवरी 2025 में पैरा 22 अ जोड़ा गया है। (SBP)
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