हिमाचल हाईकोर्ट पर्यावरण पर क्यों हुआ सख्त; संवेदनशील इलाकों में नई सड़कों पर लगाई रोक
चंद्रताल, शिकारी देवी और चूड़धार जैसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण को लेकर स्वतः संज्ञान, अधिकारियों से जवाब तलब
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला: 20 अगस्त 2026 : हिमाचल प्रदेश के नाजुक हिमालयी पर्यावरण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चंद्रताल, शिकारी देवी और चूड़धार जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वन स्वीकृतियों और मोटर योग्य सड़कों के निर्माण को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है। मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने राज्य के वन एवं पर्यावरण तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताते हुए प्रधान सचिव (वन), प्रधान मुख्य अरण्यपाल (PCCF) और हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मामले में प्रतिवादी बनाया है।
संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क पहुंच से पर्यावरण पर खतरा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लाहौल-स्पीति की चंद्रताल झील, मंडी के शिकारी देवी मंदिर और सिरमौर के चूड़धार मंदिर जैसे ऊंचाई वाले और पर्यावरणीय रूप से नाजुक क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया। अदालत ने चिंता जताई कि इन क्षेत्रों तक मोटर योग्य सड़क पहुंचने से वहां के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारी वाहनों की आवाजाही, बढ़ता पर्यटन, प्रदूषण और निर्माण गतिविधियां इन संवेदनशील इलाकों के लिए चुनौती बन सकती हैं। अदालत ने संकेत दिया कि समय रहते इन गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके गंभीर पर्यावरणीय परिणाम सामने आ सकते हैं।
चंद्रताल में कैंपिंग और कचरा प्रबंधन पर सवाल
हाईकोर्ट ने चंद्रताल झील के आसपास पर्यटकों के रात्रि प्रवास और कैंपिंग की अनुमति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने अधिकारियों से जानना चाहा कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में पर्यटकों से उत्पन्न मानव अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरे के निपटान की क्या व्यवस्था है।
खंडपीठ ने यह भी पूछा कि क्या वहां पर्यटकों के लिए पर्याप्त मोबाइल शौचालय और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था उपलब्ध है। अदालत की चिंता का केंद्र यह है कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ इन क्षेत्रों की प्राकृतिक संवेदनशीलता और पर्यावरणीय क्षमता को नजरअंदाज न किया जाए।
नई सड़क और टारिंग के प्रस्ताव फिलहाल रोकने के निर्देश
पर्यावरणीय नुकसान की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित संवेदनशील क्षेत्रों तक नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा कच्चे मार्गों को पक्का करने यानी टारिंग से जुड़े मामलों में भी अंतरिम निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा है कि यदि इन क्षेत्रों के लिए वन स्वीकृति से संबंधित कोई प्रस्ताव लंबित है, तो अगली सुनवाई तक उसे आगे न बढ़ाया जाए। अदालत की अनुमति के बिना ऐसे किसी नए कार्य को शुरू नहीं किया जाएगा।
28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट के इस रुख से हिमाचल के ऊंचाई वाले और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क निर्माण, पर्यटन गतिविधियों और कचरा प्रबंधन को लेकर सरकार और संबंधित विभागों की जवाबदेही बढ़ सकती है। (SBP)
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