देश भर में मनाया जा रहा मकर सक्रांति का त्यौहार, जानिए महत्व और मान्यता
शिक्षा कनौजिया
लुधियाना, 14 जनवरी,2026ः सूर्य जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति पर स्नान, दान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान कई जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाता है. इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है और इसी के साथ उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है। आइए जानते हैं इस पर्व जुड़ी कहाना, इसका महत्व और पुजा का सही तरीका
महत्व और मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद पर अत्याचार किए, तो भगवान विष्णु क्रोधित हुए। उनके शरीर से निकला पसीना जब धरती पर गिरा, तभी तिल उत्पन्न हुआ। इसी कारण तिल को गंगाजल जितना पवित्र माना जाता है।मान्यता है कि जैसे गंगाजल आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है, वैसे ही तिल पूर्वजों और भटकी आत्माओं को शांति प्रदान करता है। इसलिए पितृकर्म और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में तिल का इस्तेमाल अनिवार्य माना गया है।
23 साल बाद संक्रांति और एकादशी एक ही दिन
इस साल मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा लेकिन मकर संक्रांति के सभी धार्मिक कार्य 15 जनवरी को किए जाएंगे. करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब संक्रांति और एकादशी तिथि एक ही दिन पड़ रही हो. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, संक्रांति और एकादशी तिथि का एक साथ होना अक्षय पुण्यदायक माना जाता है.
मकर संक्रांति पर स्नान का शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति पुण्य काल - दोपहर 03:13 से सायं 05:45 तक
मकर संक्रांति महा पुण्य काल - दोपहर 03:13 से सायं 04:58 तक
पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन गंगा-यमुना समेत पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान का सबसे शुभ समय: सूर्योदय से दोपहर तक इसी अवधि को पुण्य काल माना जाता है. अगर संभव हो तो सूर्य निकलते ही स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है. गंगा, यमुना, संगम या किसी पवित्र नदी में स्नान का विशेष फल मिलता है, लेकिन जो लोग वहां नहीं जा सकते, वे घर पर भी विधि-विधान से स्नान कर पुण्य पा सकते हैं.
घर पर मकर संक्रांति का स्नान कैसे करें?
अगर आप नदी या तीर्थ स्थल नहीं जा पा रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं. शास्त्रों में घर पर स्नान की भी पूरी विधि बताई गई है. सुबह उठकर ईश्वर का ध्यान करते हुए मन ही मन स्नान का संकल्प लें. नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें, तिल, अगर चाहें तो थोड़ा कुश या तुलसी जल मिला सकते हैं. स्नान करने के बाद बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें. मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल या वस्त्र का दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है.
मकर संक्रांति पूजा मंत्र
ओम ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
मकर संक्रांति पूजा विधि
मकर संक्रांति को ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय पवित्र नदी में स्नान करें. नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर पर ही स्नान करें. उसके बाद साफ कपड़े पहनें. फिर एक तांबे के लोटे में गंगाजल या साफ जल भर लें. उसमें लाल चंदन, लाल रंग के फूल, गुड़ आदि डाल लें. फिर सूर्यदेव के मंत्र का उच्चारण करते हुए उससे अर्घ्य दें.
उसके बाद गायत्री मंत्र पढ़ें. फिर आसन पर बैठकर सूर्य चालीसा का पाठ करें. संभव हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. फिर सूर्यदेव की आरती करें. पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना करें और सूर्यदेव से मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लें. सूर्यदेव की कृपा से आपके जीवन में धन और धान्य की कोई कमी नहीं होगी. आप निरोग रहेंगे. करियर में उन्नति होगी.
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