Himachal Pradesh: PWD मिनिस्टर विक्रमादित्य सिंह के बयान पर IAS–IPS अफसरों का विरोध, सरकार से की मंत्री के साथ ड्यूटी न लगाने की मांग
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 14 जनवरी 2026: नए साल की शुरुआत के साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के मंत्री एक के बाद एक विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं।
इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के एक बयान ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हिमाचली और गैर-हिमाचली आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद अब सिविल सेवा के अधिकारी खुलकर सामने आ गए हैं।
आईपीएस अफसर एसोसिएशन ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से यहां तक मांग कर दी है कि किसी भी आईपीएस अधिकारी की ड्यूटी मंत्री के साथ न लगाई जाए। वहीं, आईएएस एसोसिएशन ने भी मंत्री के बयान की तीखी आलोचना की है। एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां सिविल सेवा अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं और इससे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है।
गौरतलब है कि हाल ही में विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार से आए आईएएस व आईपीएस अधिकारियों के कार्यशैली पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि इन राज्यों के अधिकारी शासक बनने की मानसिकता न अपनाएं और हिमाचल प्रदेश की सेवा भावना के साथ काम करें। मंत्री के इन्हीं बयानों के जवाब में अब आईएएस और आईपीएस दोनों संगठनों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया है।
इस बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दिल्ली दौरे पर हैं, जबकि शिमला में सरकार के भीतर ही इस मुद्दे पर असहजता दिखने लगी है। कैबिनेट मंत्री जगत नेगी ने पहले विक्रमादित्य सिंह के बयान से असहमति जताई, वहीं अनिरुद्ध सिंह ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि अधिकारियों से काम लेना भी आना चाहिए। इन प्रतिक्रियाओं से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस विवाद में विक्रमादित्य सिंह सरकार के भीतर भी अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं।
यह लिखा है अफसरों की एसोसिएशन ने
देर शाम आईपीएस व आईएएस अफसरों की एसोसिएशन के मीटिंग के प्रस्ताव सामने आए. आईपीएस अफसरों ने अपने पत्र में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह में कहा कि न तो मंत्री के साथ किसी आईपीएस की ड्यूटी लगाई जाए और न ही वे आने वाले समय में ऐसे बयान दें, इसे सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा सिविल सेवाओं की गरिमा को बनाए रखने का आग्रह किया गया. अफसरों ने कहा है कि वे चुनी हुई सरकार के साथ काम करते हैं और संविधान व कानून के प्रति निष्ठावान होते हैं। अन्य राज्यों के अफसरों के बारे में ऐसी बात करने से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। (SBP)
देखें एसोसिएशन का प्रस्ताव :
https://drive.google.com/file/d/1iReV8pCynj65R0EfEpTpUEuhPE4ZHXuL/view?usp=drivesdk
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