भारत-चीन सीमा पर बढ़ेगा टूरिज्म,पर्यटकों के लिए सालभर खुली रहेगी यह फेमस घाटी
देहरादूनः उत्तराखंड की फेमस नेलांग घाटी का अब पर्यटक पूरे साल लुत्फ उठा सकेंगे। सरकार के इस फैसले से सीमांत इलाके में जहां पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ, बदलते मौसम और लद्दाख जैसा अनुभव लेने का मौका मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों को पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन ने इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम और नियम तय किए हैं। पर्यटकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही घाटी में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। चीन सीमा से सटे इस संवेदनशील जगह को देखते हुए निगरानी और गाइडलाइन का पालन भी पर्यटकों के लिए अनिवार्य होगा। इस पहल से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
सुबह मिलेगा घाटी में प्रवेश
नेलांग घाटी जाने के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं। प्रतिदिन सीमित संख्या में ही पर्यटकों को अनुमति दी जाएगी, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और सुरक्षा बनी रहे। घाटी में प्रवेश केवल सुबह निर्धारित समय पर ही दिया जाएगा और सभी पर्यटकों को शाम तक वापस लौटना अनिवार्य होगा। इससे संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी आसान बनी रहती है।यात्रा के दौरान गाइड और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में फोटोग्राफी पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
शीतकालीन पर्यटन को ध्यान में रखते हुए SOP में अतिरिक्त नियम भी जोड़े गए हैं। बर्फबारी के दौरान केवल 4x4 या अधिकृत वाहनों को ही घाटी में जाने की अनुमति दी जाएगी। खराब मौसम की स्थिति में परमिट को अस्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है।
यह फैसला पूरी तरह पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। पर्यटकों को गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और सुरक्षा उपकरण साथ रखना अनिवार्य होगा। ऊंचाई और ठंड को देखते हुए यह तैयारी बेहद जरूरी मानी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से रेस्क्यू टीम भी तैनात रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
परमिट व्यवस्था से पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी
यह इलाका भारत-चीन सीमा के पास स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है, जहां सुरक्षा के लिहाज से सख्त निगरानी जरूरी होती है। साथ ही घाटी की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। सीमित संख्या में पर्यटकों को अनुमति देने से पर्यावरण पर दबाव कम रहता है और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।
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