MP सतनाम सिंह संधू ने संसद में उठाया पंजाब में बाढ़ की समस्या का मुद्दा; केंद्र से की पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए संयुक्त बाढ़ प्रबंधन तंत्र स्थापित करने की मांग
सांसद सतनाम सिंह संधू ने उठाया संसद में पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़ का मुद्दा , रियल-टाइम जलाशय निगरानी, समयबद्ध डिसिल्टिंग और आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली की मांग की
'शाहपुरकंडी बांध प्रोजेक्ट की सफलता ने दर्शाया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से दशकों पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों को भी हल किया जा सकता है',- सांसद सतनाम संधू; केंद्र से किया एकीकृत बाढ़ प्रबंधन तंत्र स्थापित करने का आग्रह
राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद में उठाया पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़ का मुद्दा ; केंद्र से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए कानूनी रूप से समर्थित संयुक्त बाढ़ प्रबंधन तंत्र स्थापित करने का किया आग्रह
राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से क्षेत्र के लिए एक एकीकृत बाढ़ प्रबंधन तंत्र विकसित करने की मांग की। बाढ़ से निपटने के लिए लंबे समय तक चलने वाले और वैज्ञानिक तरीके की मांग करते हुए, सांसद सतनाम संधू ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए कानूनी रूप से समर्थित एक संयुक्त बाढ़ प्रबंधन सिस्टम बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसमें रियल-टाइम जलाशय मॉनिटरिंग, बाढ़ की पूर्वानुमान भविष्यवाणी और बड़े जलाशयों से समय-समय पर गाद (डी-सिल्टिंग) हटाने की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।
सदन का ध्यान प्रमुख जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्ट) की समस्या की ओर आकर्षित करते हुए सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा, "भाखड़ा बांध का निर्माण मूल रूप से 9.27 बिलियन घन मीटर जल भंडारण क्षमता के साथ किया गया था, लेकिन भारी सिल्ट जमने के कारण इसकी स्टोरेज क्षमता में 2.13 बिलियन क्यूबिक मीटर की कमी आई है। गोबिंद सागर जलाशय के कई स्थानों पर सिल्ट की परतें लगभग 100 से 200 फीट की गहराई तक जमा हो गई है, जिससे जलाशय की जल संग्रहण क्षमता घट रही है और भारी वर्षा के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।"
वर्ष 2023 की भीषण मानसूनी बाढ़ का उल्लेख करते हुए सांसद संधू ने कहा, "पंजाब के 23 में से 21 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। 1,400 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे और 2 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब गई थी। इस भीषण आपदा में 4 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए तथा 50 लोगों की जान चली गई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और वायुसेना के संयुक्त बचाव अभियान में 20,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया था।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नेतृत्व में लगभग तीन दशक पुराने शाहपुरकंडी डैम प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने और पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ़ करते हुए सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा, "शाहपुरकंडी बांध परियोजना का सफल पूरा होना दर्शाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से दशकों पुरानी चुनौतियों से भी निपटा जा सकता है। लगभग तीन दशकों तक अटकी इस परियोजना को 2014 के बाद फिर से शुरू किया। दिसंबर 2018 में, केंद्र सरकार ने इसे लागू करने की मंज़ूरी दी और नाबार्ड के ज़रिए ₹485.38 करोड़ रुपये जारी किए। इससे यह साबित होता है कि सरकार के आपसी तालमेल और ठोस नीतिगत फैसलों से लंबे समय से अटकी बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।"
भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए ज़रूरी नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए सांसद संधू ने कहा, "भाखड़ा और पोंग बांधों के जलस्तर तथा जल निकासी की प्रति घंटे निगरानी संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। जलाशयों की समयबद्ध डिसिल्टिंग सुनिश्चित की जाए तथा जलग्रहण क्षेत्रों में व्यापक उपचार कार्यक्रम लागू किए जाएं, ताकि जल भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सके और क्षेत्र की बाढ़ से निपटने की क्षमता मजबूत हो।"
राज्यों के बीच बेहतर तालमेल की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, सांसद ने आगे कहा, "पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को शामिल करते हुए एक कानूनी रूप से मान्य संयुक्त बाढ़ प्रबंधन तंत्र की तत्काल आवश्यकता है। इस तंत्र में बाढ़ की भविष्यवाणी करने वाली साझा प्रणालियां, हाइड्रोलॉजिकल डेटा का रियल-टाइम आदान-प्रदान और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए समन्वित प्रोटोकॉल शामिल होने चाहिए, ताकि बाढ़ की स्थिति में लोगों की जान, आजीविका और बुनियादी ढांचे की समय रहते सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।"
सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि हाल के वर्षों में बार-बार आने वाली बाढ़ पंजाब के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गई है, जिससे लगभग हर वर्ष कृषि, सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण आजीविका को भारी नुकसान होता है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, "आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन अब वैज्ञानिक जलाशय प्रबंधन, आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान तकनीकों, जल भंडारण क्षमता की बहाली और समन्वित नीतिगत उपायों के माध्यम से रोकथाम पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।"
सांसद संधू ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने से न केवल आपदा तैयारी में सुधार होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रति क्षेत्र क्षमता, जल सुरक्षा और टिकाऊ विकास को भी मजबूती मिलेगी। शाहपुरकंडी बांध परियोजना की सफलता से प्रेरणा लेते हुए सांसद ने केंद्र सरकार से पंजाब को भविष्य की बाढ़ आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए बाढ़ प्रबंधन अवसंरचना के आधुनिकीकरण और संस्थागत तालमेल को भी इसी प्रकार समयबद्ध और मिशन मोड में आगे बढ़ाने की अपील की।
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