दिल्ली में हिमाचल ने उठाया बिजली के हक का मुद्दा, सीएम सुक्खू ने मनोहर लाल के सामने रखे 7 बड़े प्रस्ताव
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 8 सितंबर 2026 : हिमाचल प्रदेश ने केंद्र के समक्ष अपने विद्युत अधिकारों और लंबित ऊर्जा मामलों को लेकर जोरदार पैरवी की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात कर मुफ्त बिजली हिस्से, जलविद्युत परियोजनाओं के हस्तांतरण और बीबीएमबी की अनुपयोगी भूमि समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। मुख्यमंत्री ने इन मामलों के शीघ्र समाधान का आग्रह किया।
मुफ्त बिजली के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र की मांग
मुख्यमंत्री ने हिमाचल को जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाले निःशुल्क विद्युत हिस्से के एवज में नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र (REC) उपलब्ध करवाने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य को उसके मुफ्त बिजली हिस्से का उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए और इस संबंध में केंद्र से आवश्यक स्पष्टीकरण व समाधान किया जाना चाहिए।
शानन से बैरा स्यूल तक, परियोजनाओं पर हिमाचल का दावा
बैठक में शानन जलविद्युत परियोजना को हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
इसके अलावा 180 मेगावाट की बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल को सौंपने की मांग भी रखी गई। मुख्यमंत्री ने इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया जल्द शुरू करने का आग्रह किया।
पुरानी परियोजनाओं पर 1% अतिरिक्त मुफ्त बिजली की मांग
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति लागू होने से पहले शुरू हुई केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए परियोजना शुरू होने के बाद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में एक प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्त बिजली देने की मांग दोहराई।
सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हिमाचल को करीब 29.34 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
BBMB की खाली जमीन हिमाचल को देने की मांग
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के कब्जे में ऐसी जमीन, जिसका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, हिमाचल सरकार को उपलब्ध करवाने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस भूमि का इस्तेमाल सरकारी कार्यालयों के निर्माण के साथ-साथ परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने के लिए किया जा सकता है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) के निदेशक मंडल में हिमाचल की ओर से दो स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भी आग्रह किया।
‘हिमाचल की अर्थव्यवस्था का आधार है जलविद्युत’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जलविद्युत हिमाचल की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास का प्रमुख आधार है। ऐसे में प्रदेश के विद्युत हितों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान विकास की दृष्टि से बेहद जरूरी है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे। (SBP)
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