चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में चौथे इंटरनेशनल समर स्कूल 2026 का आयोजन; एकेडमिक एक्सचेंज में शामिल हुए 50 इंटरनेशनल फैकल्टी और स्टूडेंट्स; आर्किटेक्चर के भविष्य पर की चर्चा
स्लोवाकिया, फिलीपींस, नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के 50 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स हुए 10 दिवसीय एकेडमिक प्रोग्राम में शामिल; नेबरहुड प्लानिंग, शहरी विरासत और मज़बूत पब्लिक स्पेस पर दिया ज़ोर
‘हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ और भूकंपरोधी निर्माण के लिए पारंपरिक आर्किटेक्चरल ज्ञान को आधुनिक प्लानिंग से जोड़ना जरूरी’: प्रियंका सागर, जीआईएस एक्सपर्ट
चंडीगढ़ को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की दिशा में अध्ययन जारी, सेक्टर-22 पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान: सेंथिलकुमार पी, आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर
'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महज़ एक मददगार टूल, यह इंसानी समझ और अनुभव की नकल नहीं कर सकता': प्रो. जून जॉर्डन, दक्षिण अफ्रीका
मोहाली:
शहरी नियोजन (अर्बन प्लानिंग) और आर्किटेक्चर पर विभिन्न वैश्विक विचारों के नज़रिए को एक मंच पर लाते हुए, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा "रीइमैजिनिंग चंडीगढ़ नेबरहुड" विषय पर आधारित 10 दिवसीय चौथे इंटरनेशनल समर स्कूल 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें स्लोवाकिया, फिलीपींस, नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका से आए 50 छात्र और फैकल्टी सदस्य भाग ले रहे हैं। यह इंटरनेशनल इवेंट प्रतिभागियों को चंडीगढ़ के खास शहरी स्वरूप, विरासत और सार्वजनिक स्थानों से सीखकर मोहल्लों (पड़ोस) को कैसे ज़्यादा समावेशी, मज़बूत, टिकाऊ और समुदायों की ज़रूरतों के हिसाब से बनाया बनाने पर केंद्रित होगा।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्चर ने 'ऑफ़िस ऑफ़ इंटरनेशनल अफेयर्स' और 'इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स' इंडिया के सहयोग से आयोजित यह समर स्कूल 16 सितंबर तक चलेगा। प्रतिभागियों को शहर को घूमकर देखने, आर्किटेक्चर एनालिसिस, समुदाय से बातचीत, मिलकर रिसर्च करने तथा फील्ड-आधारित और व्यवहारिक तौर पर सीखने का अवसर मिलेगा।
उद्घाटन समारोह में बेनिन गणराज्य के राजदूत (एम्बेसडर) महामहिम एरिक जीन मैरी ज़िंसो ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अन्य विशिष्ट अतिथियों में केप पेनिनसुला यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के आर्किटेक्चर प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. जून जॉर्डन; इलोइलो साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, फिलीपींस के प्रोग्राम हेड (आर्किटेक्चर विभाग) प्रो. मा रेजिना पी. फाल्कोनाइट; जीआईएस स्पेशलिस्ट और आर्कोटैक डिज़ाइन स्टूडियो की फ़ाउंडरप्रियंका सागर, आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी सेंथिलकुमार पी; चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. आशिता चड्ढा; डिपार्टमेंट ऑफ़ इंटरनेशनल अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. राजन शर्मा तथा कई अन्य विशिष्ट अधिकारी एवं छात्र उपस्थित रहे।
इस मौके पर जीआईएस स्पेशलिस्ट और आर्कोटेक डिज़ाइन स्टूडियो की फाउंडर प्रियंका सागर ने कहा, "हिमालय जैसे आपदा-संभावित क्षेत्रों में ऐसी प्लानिंग की ज़रूरत है, जो क्षेत्र और स्थान की परिस्थितियों के अनुरूप हो, न कि ऐसी प्लानिंग भूमि की प्राकृतिक विशेषताओं को नजरअंदाज किया जाए। जीआईएस हमें जोखिम वाले इलाकों की पहचान करने में मदद कर सकता है, लेकिन प्लानिंग में प्राकृतिक जल निकासी रास्तों, नदियों और पहाड़ों का भी ध्यान रखना चाहिए तथा प्राकृतिक बहाव में रुकावट नहीं डालनी चाहिए। विकास ज़रूरी है, लेकिन सही प्लानिंग से पारंपरिक आर्किटेक्चर और सही टेक्नोलॉजी का सहारा लेना चाहिए। कश्मीर में 'धज्जी देवरी' दीवार प्रणाली तकनीकें दिखाती हैं कि पारंपरिक निर्माण भूकंप के खतरों का सामना कैसे करते थे, जबकि केदारनाथ मंदिर जैसी संरचनाओं में स्थानीय मटीरियल और पारंपरिक पत्थर के निर्माण का इस्तेमाल मज़बूती और आपदा की रोकथाम के बारे में सीख देता है। इसलिए, सुरक्षित और ज़्यादा मज़बूत संरचनाएं बनाने का सही तरीका पारंपरिक आर्किटेक्चरल और आधुनिक प्लानिंग व निर्माण टेक्नोलॉजी का सही तालमेल है।"
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर सेंथिलकुमार पी. ने कहा, "बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव के बीच चंडीगढ़ की मूल प्लानिंग को बनाए रखना जरूरी है। सेक्टर-22 को केस स्टडी बनाकर हमारी स्टडी में सेक्टरों व सड़कों की भीड़ कम करने के साथ एक्सेसिबिलिटी, पैदल यात्री सुविधाओं और पब्लिक स्पेस को बेहतर बनाने पर फोकस किया जा रहा है। चंडीगढ़ की ताकत उसके अच्छी तरह से मिले-जुले और आत्मनिर्भर इलाकों में है। अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि एक ज़्यादा सस्टेनेबल और रहने लायक शहर के लिए इन मुख्य सिद्धांतों को बचाते हुए नई चुनौतियों का सामना किया जाए। आज ज़रूरत इन उभरते मुद्दों को हल करने की है, साथ ही उन मुख्य प्लानिंग सिद्धांतों को भी बनाए रखने की है जिन्होंने चंडीगढ़ को आर्किटेक्चर और अर्बन-प्लानिंग का एक बेहतरीन नमूना बनाया है।"
इस अवसर पर बेनिन गणराज्य के एम्बेसडर एरिक जीन मैरी ज़िंसौ ने कहा, "पढ़ाई का समय बहुत कम होता है, लेकिन का असर जीवन भर रहता है। हम ऐसे दौर में हैं जहाँ कुशल और प्रतिभाशाली आर्किटेक्ट्स की भारी मांग है। भले ही ग्लोबल मार्केट में मुकाबला कड़ा हो, लेकिन असली काबिलियत अपनी एक अलग छाप छोड़ती है। अगर आप हज़ारों लोगों के बीच सबसे बेहतर बनने की कोशिश करते हैं, तो दुनिया आपके ज्ञान की तलाश करेगी। उन्होंने छात्रों को कहा कि वे अपने माता-पिता के त्याग का सम्मान करें क्योंकि वे चाहते हैं कि आप उनसे बेहतर बनें और आगे बढ़ें। इस ग्लोबल मंच को गंभीरता से लें और समय का पूरा लाभ उठाकर ऐसी स्किल्स विकसित करें जो हमारे शहरी इलाकों के भविष्य को आकार दें।"
'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महज़ एक मददगार टूल, यह इंसानी समझ और अनुभव की नकल नहीं कर सकता': प्रो. जून जॉर्डन, दक्षिण अफ्रीका
केप पेनिनसुला यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी, साउथ अफ्रीका की प्रोफ़ेसर (डॉ.) जून जॉर्डन ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से आर्किटेक्चरक्षेत्र को बदल देंगी। हमें उनसे बचने की बजाय उन्हें अपनाना चाहिए। हमें यह याद रखना चाहिए कि हम इंसान हैं जिनकी चेतना, भावनाओं, अंतर्ज्ञान और जीवन के अनुभवों की नकल टेक्नोलॉजी अभी तक नहीं कर सकी। एआई को एक ऐसे टूल के रूप में देखा जाना चाहिए जो हमारे काम में मदद कर उसे बेहतर बनाए, लेकिन इंसानी रचनात्मकता, इनोवेशन और मानवीय संवेदनाएं आर्किटेक्चर के केंद्र में रहनी चाहिए। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित हो रही हैं, हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम सोच-समझकर इनका इस्तेमाल करें और मानवीय अनुभव को भी बचाए जो आर्किटेक्चर को वास्तविक अर्थ देता है।" जॉर्डन ने आगे कहा, "दिल्ली का आर्किटेक्चर वाकई अद्भुत है। यहाँ का हरा-भरा माहौल, इंसानी ज़रूरतों के हिसाब से विकास और जीवंत सार्वजनिक जीवन इसे एक ऐसा शहर बनाते हैं जो सक्रिय, जुड़ा हुआ और सुरक्षित है।"
‘आर्किटेक्चर को शहरों की सांस्कृतिक विरासत को खोए बिना आधुनिकीकरण करने में मदद करनी चाहिए ’: प्रो. मा रेजिना, फिलीपींस
फ़िलीपींस की इलोइलो साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट की प्रोफ़ेसर मा रेजिना पी फ़ाल्कोनाइट ने कहा, "विरासत को बचाना सिर्फ़ अतीत की रक्षा नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का 'इंटरनेशनल समर स्कूल' जैसे प्लेटफ़ॉर्म समृद्ध विरासत संरक्षण परंपराओं वाले देशों से सीखने और इन महत्वपूर्ण अनुभवों को फिलीपींस स्थित अपने समुदायों तक ले जाने का अवसर प्रदान करते हैं। पंजाब की शानदार आर्किटेक्चरल और सांस्कृतिक विरासत पारंपरिक बस्तियों और किलों से लेकर सिखों के पवित्र स्थलों और बदलते शहरी इलाकों तक समझने का एक अनोखा अवसर देती है कि कैसे भारत आधुनिकीकरण और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है। यह प्रोग्राम हमें अलग-अलग संस्कृतियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान करने और ऐसे शहर बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का मौका देता है जो समावेशी, टिकाऊ और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करने वाले हों।"
यह 10 दिवसीय प्रोग्राम क्लासरूम शिक्षा से आगे, प्रतिभागियों को सीधे चंडीगढ़ के शहरी माहौल से जुड़ने का अवसर है। इसमें फील्ड मैपिंग, चलने-फिरने की सुविधा का विश्लेषण, घनत्व और ज़मीन के इस्तेमाल का अध्ययन, स्पेस सिंटैक्स एनालिसिस, हेरिटेज और सार्वजनिक जगहों का डॉक्यूमेंटेशन, समुदाय के साथ जुड़ाव और बातचीत, और शहरी जगहों में थर्मल कम्फर्ट रणनीतियाँ शामिल हैं। यह प्रोग्राम अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को चंडीगढ़ को आधुनिक शहरी प्लानिंग की एक 'जीवंत प्रयोगशाला' के तौर पर समझने तथा शहर की पड़ोस-स्तरीय चुनौतियों पर वैश्विक दृष्टिकोण साझा करने का अवसर भी देगा।
समर स्कूल का परिणाम में फाइनल प्रेजेंटेशन और एक मिलकर तैयार की गई रिसर्च पब्लिकेशन होगी, जिससे प्रतिभागी अपनी फील्ड की जानकारी और अलग-अलग विषयों की चर्चाओं को ज्ञान के रूप में बदल सकेंगे। इस पहल से भाग लेने वाले संस्थानों और विद्वानों के बीच लंबे समय तक चलने वाला एकेडमिक सहयोग, अलग-अलग संस्कृतियों से सीखना और रिसर्च पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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