पंजाब में रेगुलर DGP की नियुक्ति का मामला हाई कोर्ट पहुंचा; सरकार से जवाब मांगा गया
चंडीगढ़, 9 सितंबर, 2026- पंजाब में पुलिस डिपार्टमेंट की सबसे बड़ी और अहम पोस्ट यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) की नॉन-परमानेंट यानी रेगुलर नियुक्ति का मामला अब गंभीर कानूनी रूप ले चुका है। इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से हलफनामा तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को रेगुलर DGP की नियुक्ति में हो रही देरी के बारे में कोर्ट के सामने अपना रुख साफ करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट में फाइल की गई एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) में आरोप लगाया गया है कि पंजाब पुलिस चीफ का पद लंबे समय से एडिशनल चार्ज (टेम्पररी/एग्जीक्यूटिव) बेसिस पर रखा जा रहा है। पिटीशनर के मुताबिक, किसी भी राज्य में सिक्योरिटी और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए पुलिस चीफ का रेगुलर पोस्ट पर होना बहुत जरूरी है। एडिशनल चार्ज पर तैनात ऑफिसर के पास अक्सर वह परमानेंट अधिकार, पॉलिसी डिसीजन लेने की आजादी और एडमिनिस्ट्रेटिव ताकत नहीं होती जो एक रेगुलर DGP के पास होती है। इसका सीधा असर पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन की एफिशिएंसी और निष्पक्षता पर पड़ता है।
पिटीशन में खास तौर पर 2006 के मशहूर 'प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार' केस में सुप्रीम कोर्ट की दी गई गाइडलाइंस और 13 मार्च, 2019 के ऑर्डर का ज़िक्र है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, पुलिस फोर्स को पॉलिटिकल प्रेशर से फ्री रखने के लिए राज्य सरकारों के लिए एक रेगुलर DGP अपॉइंट करना ज़रूरी है, जिसका टेन्योर कम से कम दो साल का होना चाहिए। इसके अलावा, टेम्पररी या एक्टिंग DGP अपॉइंट करने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह रोक लगा दी है।
पिटीशनर ने कोर्ट के ध्यान में लाया कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने पंजाब के रेगुलर DGP के सिलेक्शन के लिए रेगुलर नियमों के मुताबिक प्रोसेस पूरा करके एलिजिबल सीनियर IPS ऑफिसर्स का एक पैनल तैयार किया था। यह पैनल पंजाब सरकार को भी मिल गया है। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने पैनल से किसी भी ऑफिसर को रेगुलर DGP अपॉइंट करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। पिटीशनर के मुताबिक, 24 अगस्त को संबंधित हायर अथॉरिटीज़ को एक लीगल नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन कोई ठोस एक्शन न होने पर हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। इस मामले की सुनवाई पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने की। बेंच ने पंजाब सरकार को इस मामले पर अपना स्टैंड साफ करते हुए कोर्ट में एक डिटेल्ड एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से यह साफ करने को कहा है कि रेगुलर DGP की नियुक्ति में अब तक क्या रुकावटें आ रही हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
हाई कोर्ट के इस स्टैंड के बाद अब पंजाब सरकार पर परमानेंट DGP की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने या कोर्ट में कोई ठोस जवाब देने का बहुत दबाव है। माननीय कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर, 2026 तय की है। इस मामले को लेकर पंजाब के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि राज्य के पुलिस प्रशासन के भविष्य के ढांचे का फैसला सरकार के जवाब पर निर्भर करता है।
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