बेअदबी कानून पर जत्थेदार अकाल तख्त की आपत्तियों से पंजाब सरकार को अवगत कराया: राज्यपाल
बाबूशाही ब्यूरो चंडीगढ़, 30 मई, 2026: पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आज एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी विरोधी कानून को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज द्वारा जताई गई आपत्तियों से उन्होंने पंजाब सरकार को अवगत करा दिया है।
आज एक निजी चैनल के साथ विशेष बातचीत करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि जत्थेदार साहब द्वारा उठाए गए बिंदुओं के बारे में सरकार को सूचित करने के बाद, अब वह अगले कदम के रूप में मुख्यमंत्री भगवंत मान को बुलाकर इस विषय पर बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि इस संवेदनशील मुद्दे के समाधान के लिए दोनों पक्षों (सरकार और श्री अकाल तख्त साहिब/शिरोमणि कमेटी) की आमने-सामने बैठक करवाई जाए। राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी धर्म के मामले में बेअदबी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
सीमावर्ती सुरक्षा और ड्रोन तस्करी पर चिंता
बातचीत के दौरान राज्यपाल ने सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही नशा तस्करी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने ड्रोन तस्करी को रोकने के लिए 10 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। पहले ड्रोन सिर्फ सीमा के कुछ सीमित दायरे तक ही नशा गिराते थे, लेकिन अब ये काफी अंदर तक आकर खेप गिरा रहे हैं। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए पंजाब सरकार और बीएसएफ (BSF) आपसी समन्वय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
मामले की राजनीतिक पृष्ठभूमि
याद रहे कि पिछले हफ्ते ही श्री Aकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने लुधियाना में राज्यपाल से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने बेअदबी विरोधी एक्ट की उन खास धाराओं के बारे में राज्यपाल को जानकारी दी थी, जिन पर पूरे सिख जगत को सख्त आपत्ति है और जो सिख मर्यादा के खिलाफ हैं। तब भी राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया था कि वह इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाएंगे।
दूसरी ओर, यह भी उल्लेखनीय है कि जत्थेदार अकाल तख्त साहिब द्वारा एक्ट की धाराओं में संशोधन करने की मांग को मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही सिरे से खारिज कर चुके हैं। मुख्यमंत्री दो-तीन बार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इस एक्ट में किसी भी प्रकार का कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में राज्यपाल द्वारा दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाने की यह कोशिश पंजाब की राजनीति में काफी अहम मानी जा रही है।
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