...क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनका परिवार कांग्रेस में वापसी की तैयारी कर रहा है?
Baljit Balli/ बाबूशाही न्यूज़ नेटवर्क ब्यूरो
चंडीगढ़, 30 मई 2026: पंजाब के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी सूत्रों के अनुसार, केवल कैप्टन ही नहीं बल्कि उनका पूरा राजनीतिक खेमा भी कांग्रेस में वापसी के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है।
सूत्रों का दावा है कि पंजाब की राजनीति में किसी भी समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। हालांकि पिछले काफी समय से कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके समर्थक नेता भारतीय जनता पार्टी के भीतर असहजता महसूस कर रहे थे और समय-समय पर अनौपचारिक बातचीत में इसका जिक्र भी करते रहे थे। लेकिन अब केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने और हाल ही में हुए नगर निगम एवं नगर परिषद चुनावों के परिणामों के बाद कैप्टन को यह महसूस होने लगा है कि न तो भाजपा में उनकी कोई विशेष पूछ-परख रह गई है और न ही भाजपा में रहकर वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में कोई उल्लेखनीय राजनीतिक उपलब्धि हासिल कर सकते हैं।
कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह सार्वजनिक रूप से यह नाराजगी जता चुके हैं कि केवल ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बारे में उनसे कोई राय नहीं ली गई, जबकि राजनीतिक हलकों में यह धारणा बन गई थी कि यह नियुक्ति उनकी सलाह पर हुई होगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके सहयोगी यह भी मानते हैं कि शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन के बिना भाजपा पंजाब में सत्ता तक नहीं पहुंच सकती। उनका मानना है कि भाजपा के कुछ केंद्रीय और प्रदेश नेता भले ही अकेले चुनाव लड़कर सत्ता में आने के दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है।
कैप्टन खेमे को यह भी अच्छी तरह अहसास है कि केवल भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर उनका परिवार पटियाला की एकमात्र शहरी विधानसभा सीट भी नहीं जीत सकता। यह संभावना तभी बन सकती है जब भाजपा और अकाली दल का गठबंधन हो। दूसरी ओर, कांग्रेस में रहते हुए उनका परिवार इस सीट पर जीत हासिल करता रहा है और माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस के टिकट पर जीत की संभावना अधिक हो सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह बात भी सामने आ रही है कि कैप्टन परिवार इस सीट से अपनी बेटी जय इंदर कौर को चुनाव मैदान में उतारना चाहता है।
केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जिस प्रकार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और भाजपा नेतृत्व की आलोचना की है, उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि वे जल्द ही भाजपा से अलग होने का फैसला कर सकते हैं। हालांकि यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस पार्टी और उसका शीर्ष नेतृत्व उन्हें वापसी का अवसर देता है या नहीं। कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ नेता उनकी वापसी के सख्त विरोधी हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी के हित में मानते हैं।
यह भी सर्वविदित है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनका खेमा चाहते थे कि उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल या कोई अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक पद दिया जाए। लेकिन तीन-चार वर्षों तक प्रयासों के बावजूद भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि केवल उनके परिवार के खिलाफ चल रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया गया।
यहां यह उल्लेखनीय है कि अकाली दल छोड़कर भाजपा के करीब आए दिवंगत नेता सरदार सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ भी कुछ हद तक ऐसा ही व्यवहार हुआ था। उनकी इच्छा के बावजूद उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल नहीं बनाया गया और न ही किसी अन्य महत्वपूर्ण पद पर समायोजित किया गया। अपने करीबी मित्रों से अनौपचारिक बातचीत में वे अक्सर इस बात का जिक्र करते थे। उनका यह भी शिकवा था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मिलने का समय देने में महीनों लगा देते थे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार यह कहते रहे हैं कि पंजाब में भाजपा को अकाली दल के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहिए, जबकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अकाली दल को नजरअंदाज कर अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर जोर देता रहा है। इस मुद्दे पर भी उनके और भाजपा नेतृत्व के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बार-बार भाजपा की संगठनात्मक व्यवस्था को अत्यधिक "केंद्रीकृत" बताते हुए उसकी आलोचना करना और उसकी तुलना कांग्रेस पार्टी के अपेक्षाकृत खुले राजनीतिक माहौल से करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे भाजपा के भीतर घुटन महसूस कर रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस पार्टी कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए अपने दरवाजे खोलती है या वे भाजपा में ही बने रहते हैं। साथ ही यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या ईडी मामले की छाया अभी भी राजनीतिक फैसलों को प्रभावित कर रही है।
फिलहाल कैप्टन अमरिंदर सिंह का परिवार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भी जब कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की अटकलें लगी थीं, तब महारानी परनीत कौर ने इन खबरों का खंडन किया था।
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