ब्यास से निकलेगा मलबा, हिमाचल के खजाने में आएगा पैसा; बाढ़ का खतरा घटाने की भी तैयारी
विधानसभा में उठा ब्यास और सहायक खड्डों की ड्रेजिंग का मुद्दा, अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 03 सितंबर 2026: हिमाचल की नदियों में जमा सिल्ट, पत्थर और अन्य मलबा अब सिर्फ बाढ़ के खतरे का कारण नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की आय का जरिया भी बन सकता है। विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन कुल्लू की ब्यास नदी और बंजार क्षेत्र की सहायक खड्डों में ड्रेजिंग एवं माइनिंग को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने इस दिशा में अपनी योजना स्पष्ट की।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नदियों से ड्रेजिंग के माध्यम से सामग्री निकालने से एक ओर नदी की जलधारण क्षमता बढ़ाकर बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर निकाली गई सामग्री की नीलामी से सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा। सरकार प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल कर प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।
74 हजार मीट्रिक टन पत्थर पहले ही निकाला
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सदन में बताया कि अब तक करीब 74 हजार मीट्रिक टन पत्थर उठाया जा चुका है और इसकी रॉयल्टी सरकारी खजाने में जमा करवाई गई है।
सरकार के अनुसार ड्रेजिंग के बाद निकाली गई सामग्री को अलग स्थान पर रखकर उसकी नीलामी की जा सकती है। हालांकि, नदी से निकलने वाली पूरी सामग्री उपयोग के योग्य नहीं होती। इसकी गुणवत्ता के आधार पर ही इसका इस्तेमाल या नीलामी की जाएगी।
हाइड्रो पावर कंपनियां उठाएंगी ड्रेजिंग का खर्च
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग का खर्च संबंधित हाइड्रो पावर कंपनी को वहन करना होगा। इसके बाद नदी से निकली सामग्री की नीलामी सरकार द्वारा की जा सकती है। यानी ड्रेजिंग पर सरकारी खजाने से बड़ा खर्च किए बिना प्राकृतिक संसाधन से राजस्व जुटाने की संभावना तलाश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्रेजिंग के लिए उद्योग विभाग और माइनिंग विभाग से अनुमति की प्रक्रिया पूरी की गई है, जबकि अब भारत सरकार की स्वीकृति आवश्यक है।
अलग विभाग बनाने पर भी विचार
नदियों से निकलने वाली सामग्री के प्रबंधन और ड्रेजिंग की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए सरकार अलग विभाग बनाने पर भी विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि हिमाचल में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित दोहन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बाढ़ से सुरक्षा और कमाई, दोहरा फायदा
ब्यास समेत हिमाचल की कई नदियों और खड्डों में बरसात के दौरान बड़ी मात्रा में सिल्ट, पत्थर और मलबा जमा होता है। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित होने के साथ बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में ड्रेजिंग को केवल खनन गतिविधि के बजाय बाढ़ प्रबंधन और राजस्व जुटाने की दोहरी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
यह मुद्दा भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने विधानसभा में उठाया था। उनके सवाल के जवाब में सरकार ने ब्यास नदी और बंजार विधानसभा क्षेत्र की सहायक खड्डों में ड्रेजिंग एवं माइनिंग को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी सदन में दी। (SBP)
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