हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब सरकार की आपत्ति की बार एसोसिएशन ने की कड़ी निंदा
चंडीगढ़, 6 सितंबर 2026: पंजाब सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का कथित तौर पर विरोध किए जाने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़े और स्पष्ट शब्दों में इसकी निंदा की है। एसोसिएशन ने पंजाब सरकार के इस कथित कदम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी संस्थागत गरिमा से जुड़े मामलों में कार्यपालिका का हस्तक्षेप करार दिया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक हुई। बैठक के बाद जारी बयान में एसोसिएशन ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की। एसोसिएशन ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान में निर्धारित प्रावधानों तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांतों के अनुसार होती है।
एसोसिएशन ने कहा कि जब किसी न्यायाधीश की नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जाती है, तो राजनीतिक असहमति को न्यायपालिका के अधिकार, गरिमा या संस्थागत स्वतंत्रता को प्रभावित करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। बार ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
बार एसोसिएशन ने पंजाब सरकार द्वारा मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर विचार-विमर्श के लिए विशेष कैबिनेट बैठक बुलाए जाने की रिपोर्टों पर भी आपत्ति जताई। एसोसिएशन ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि न्यायपालिका पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक अथवा कार्यपालिका के दबाव की धारणा भी न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता के लिए उचित नहीं है।
एसोसिएशन ने पंजाब सरकार से संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करने, शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को कायम रखने तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखने की अपील की।
इसके साथ ही बार ने कानूनी बिरादरी से न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सतर्क और एकजुट रहने का आह्वान किया। एसोसिएशन ने कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण गारंटी है।
बार एसोसिएशन ने न्यायपालिका को अपना समर्थन दोहराते हुए न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को सुचारू, प्रभावी और निर्भीक तरीके से संचालित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। यह बयान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, चंडीगढ़ के मानद सचिव परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) की ओर से जारी किया गया।
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