हिमाचल विधानसभा में पहले दिन ही सियासी टकराव, वंदे मातरम् पर भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष, सदन शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला : 21 अगस्त 2026 : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत शुक्रवार को हंगामे के साथ हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद विपक्षी भाजपा विधायकों ने सदन में वंदे मातरम् नहीं गाए जाने पर आपत्ति जताई। विपक्ष के विरोध पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् से संबंधित प्रावधान विधानसभा की कार्यवाही पर लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि हिमाचल विधानसभा की परंपरा के अनुसार सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है और समापन के समय वंदे मातरम् गाया जाता है।
अध्यक्ष के इस स्पष्टीकरण के बाद भी विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए। सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित करने की चेतावनी दी, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं हुई। आखिरकार कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस विधायक भी सदन से बाहर निकले
विपक्ष के हंगामे के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल भी नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर आया। सत्तापक्ष ने विपक्ष पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। इस तरह विधानसभा सत्र का पहला दिन ही राजनीतिक टकराव में बदल गया।
सत्र शुरू होने से पहले भाजपा का प्रदर्शन
इससे पहले विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने कांग्रेस सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए पांच लाख रोजगार के चुनावी वादे का मुद्दा उठाया। भाजपा ने सत्र के दौरान बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित मामलों, किसानों की समस्याओं, आपदा राहत और चुनावी गारंटियों समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
सरकार ने भी विपक्ष को जवाब देने की तैयारी की
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मंत्रियों और विधायकों को विपक्ष के सवालों का जवाब आंकड़ों और तथ्यों के साथ देने के निर्देश दिए थे। सरकार की ओर से विपक्ष के हमलों का मजबूती से जवाब देने की रणनीति तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विरोध और वॉकआउट विपक्ष का अधिकार है, लेकिन सरकार को भी सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
कई अहम मुद्दे सदन में उठेंगे
मानसून सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, निर्माणाधीन चिकित्सा संस्थानों, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, रिक्त पदों तथा जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा शिमला की सड़कों और पैदल यात्रियों से संबंधित संशोधन कानून तथा पंचायती राज संशोधन अध्यादेश भी सदन के एजेंडे में हैं।
बहरहाल, पहले दिन के घटनाक्रम से साफ है कि इस बार मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी रह सकती है। शुरुआत ही वंदे मातरम् के मुद्दे पर हंगामे से होने के बाद अब नजरें शनिवार की कार्यवाही पर रहेंगी। (SBP)
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