मनाली की बेटी साक्षी ठाकुर ने 6081 मीटर ऊंची शिंकुन ईस्ट फतह कर लहराया तिरंगा, खराब मौसम के बीच हासिल की बड़ी कामयाबी
शशिभूषण पुरोहित
मनाली : 21 अगस्त 2026 : हिमाचल प्रदेश की पर्वतारोहण प्रतिभा ने एक बार फिर ऊंची उड़ान भरी है। मनाली के सोलंग गांव की पर्वतारोही साक्षी ठाकुर ने लाहौल क्षेत्र में स्थित समुद्रतल से करीब 6081 मीटर ऊंची शिंकुन ईस्ट पीक (Shinkun East Peak) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर तिरंगा फहराया है। साक्षी ने यह उपलब्धि 17 अगस्त को हासिल की।
करीब छह हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इस चोटी तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को दुर्गम भूभाग, ऊंचाई के कारण कम ऑक्सीजन, बर्फीले हिस्सों और मौसम में अचानक बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साक्षी ने इन चुनौतियों के बीच अपने दृढ़ संकल्प और पर्वतारोहण कौशल का परिचय देते हुए शिखर तक पहुंच बनाई।
साक्षी की इस उपलब्धि से मनाली और सोलंग गांव में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हिमाचल की बेटियां अब शिक्षा और खेल के साथ-साथ साहसिक खेलों के क्षेत्र में भी प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। शिंकुन ईस्ट जैसी ऊंची और चुनौतीपूर्ण चोटी पर तिरंगा फहराना साक्षी के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ हिमाचल के पर्वतारोहण क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है।
6081 मीटर की चोटी, शिंकुन ला के पास स्थित है पर्वत
शिंकुन ईस्ट चोटी लाहौल क्षेत्र में प्रसिद्ध शिंकुन ला/शिंगो ला के आसपास स्थित है और लाहौल को जांस्कर क्षेत्र से जोड़ने वाले पर्वतीय इलाके में आती है। भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन के अभिलेखों में शिंकुन ईस्ट की ऊंचाई 6081 मीटर दर्ज है।
इस पर्वत क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलता है और ऊंचाई बढ़ने के साथ चढ़ाई तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती जाती है। पर्वतारोहण अभियानों में क्रैम्पोन, आइस एक्स, रस्सियों और अन्य तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता पड़ सकती है।
पहली बार कब फतह हुई थी शिंकुन ईस्ट?
साक्षी की उपलब्धि को समझने के लिए शिंकुन ईस्ट के पर्वतारोहण इतिहास पर भी नजर डालना जरूरी है। उपलब्ध पर्वतारोहण अभिलेखों के अनुसार शिंकुन ईस्ट का पहला दर्ज सफल आरोहण सितंबर 2008 में हिमालयन क्लब की सात सदस्यीय भारतीय टीम ने किया था। टीम का नेतृत्व सुब्रत चक्रवर्ती ने किया था। टीम ने करीब 4650 मीटर की ऊंचाई पर बेस कैंप बनाया और 5190 मीटर पर उच्च शिविर स्थापित किया। इसके बाद टीम ने कठिन चट्टानी और बर्फीले हिस्सों को पार करते हुए शिखर तक पहुंच बनाई।
भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन के रिकॉर्ड में भी शिंकुन ईस्ट और शिंकुन वेस्ट को क्रमशः 6081 मीटर और 6127 मीटर ऊंचाई की चोटियों के रूप में दर्ज किया गया है।
साक्षी से पहले भी कई पर्वतारोहियों ने फतह की है चोटी
उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि साक्षी से पहले भी अलग-अलग अभियानों के पर्वतारोही शिंकुन ईस्ट तक पहुंच चुके हैं। 2024 में मध्य प्रदेश के मैहर की पर्वतारोही अंजना सिंह के शिंकुन ईस्ट फतह करने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। उन्होंने इससे पहले मनाली की फ्रेंडशिप पीक पर भी चढ़ाई की थी।
इसके बाद 2025 में केरल के मुन्नार के पर्वतारोही प्रिंस जैकब और अब्राहम सेल्विन ने भी 6081 मीटर ऊंची शिंकुन ईस्ट पर सफल आरोहण किया। उनके अभियान में करीब 60 सदस्य शामिल थे, जिनमें से 18 लोग शिखर तक पहुंचने में सफल रहे थे।
इसी तरह 2025 में मनाली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान के एक उन्नत पर्वतारोहण पाठ्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं के दल ने भी शिंकुन ईस्ट पर तिरंगा फहराया था। अभियान में 59 प्रशिक्षु और 15 प्रशिक्षण कर्मचारी शामिल थे। इसी अभियान में एक प्रशिक्षक द्वारा चोटी से पैराग्लाइडिंग किए जाने को भी विशेष उपलब्धि के रूप में रिपोर्ट किया गया था।
अब साक्षी की उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण?
शिंकुन ईस्ट का इतिहास बताता है कि यह ऐसी चोटी नहीं है जिस पर पहली बार कोई पर्वतारोही पहुंचा हो। लेकिन साक्षी ठाकुर का 17 अगस्त को इस 6081 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचना हिमाचल की बेटी के रूप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जरूर है।
खासकर मनाली और लाहौल-स्पीति जैसे पर्वतीय क्षेत्रों से निकलने वाली युवा प्रतिभाओं के लिए साक्षी की सफलता प्रेरणा का काम कर सकती है। पर्वतारोहण में स्थानीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी हिमाचल में साहसिक पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स की संभावनाओं को भी मजबूत करती है। (SBP)
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