चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के Gharuan Campus में AI और IPR पर तीन दिवसीय इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न
AI इंसानों को तेज़ और कुशल बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे कभी इंसानी समझ की जगह लेने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट जज जस्टिस आलोक जैन
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी ने जीती चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित भारत की सबसे बड़ी इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 'ज्यूरिस नेक्सस 2026'
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की 'ज्यूरिस नेक्सस 2026' इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स ने जीता 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड', महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने 'बेस्ट मूटर अवॉर्ड' और सविता स्कूल ऑफ़ लॉ ने जीता 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड'
बाबूशाही ब्यूरो
मोहाली, 26 सितंबर, 2026ः क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की एक टीम ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा 24 से 26 सितंबर तक आयोजित तीन दिवसीय ‘जुरिस नेक्सस’, प्रतियोगिता जीत ली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बौद्धिक संपदा अधिकार पर केंद्रित भारत की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में 20 राज्यों और छह देशों की 112 टीमों ने हिस्सा लिया था।
प्रतियोगिता के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज जस्टिस आलोक जैन; हरियाणा के एडवोकेट जनरल एडवोकेट पवन कुमार मुटनेजा, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट और नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के पूर्व डायरेक्टर व चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के डायरेक्टर (एकेडमिक्स) डॉ. बलराम के. गुप्ता, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) एसएस सहगल और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम (जिसमें अदिति शशिकुमार, वैष्णवी अल्वा और शरधि एस राव शामिल थीं) ने पहला स्थान हासिल किया और ‘ज्यूरिस नेक्सस 2026’ का 1 लाख रुपये का इनाम जीता। पंजाब यूनिवर्सिटी, लुधियाना के रीजनल सेंटर की टीम (जिसमें गुनीतइंदर कौर, हरवीन कौर और नेहा शामिल थीं) रनर-अप रही और उसने 50 हज़ार रुपये का इनाम जीता। वहीं, भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स ने 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड' जीता, महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पुणे के स्टूडेंट्स ने 'बेस्ट मूटर अवॉर्ड' जीता और सविता स्कूल ऑफ़ लॉ ने 'बेस्ट मेमोरियल अवॉर्ड' जीता।
जस्टिस आलोक जैन ने कहा, "टेक्नोलॉजी कानूनी पेशे को बदल रही है और आपको उपलब्ध हर टूल का इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। एआई को अपनी सोच में मदद करने दें, आपको तेज़ और ज़्यादा कुशल बनाने दें, लेकिन इसे कभी भी अपनी सोच की जगह न लेने दें। असली सीख ऐसी सोच विकसित करने में है। ऐसी सोच विकसित करने में है जो यह जानती हो कि क्या पूछना, क्यों और जवाब का क्या महत्व होगा। बटन दबाने से पहले, खुद से सवाल करें। एआई आपको कानून ता सकता लेकिन कानून क्यों और कैसे विकसित हुआ यह समझ आपको विकसित करनी होगी। डिजिटलाइज़ेशन साइबर अपराध और टेक्नोलॉजी से जुड़े अपराध नई कानूनी चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। कानून आपको कई बातें सिखाता है, लेकिन कुछ सबक किताबों या क्लासरूम में नहीं सिखाई जा सकती। वे प्रैक्टिस, अनुभव और गलतियों से सीखते हैं। याद रखें कि आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ केस जीतना नहीं है; बल्कि सही फ़ैसले तक पहुँचने में कोर्ट की मदद करना अहम है। नैतिकता का मतलब है यह जानना कि जब हमारे पास कुछ और करने का विकल्प हो, तो हमें क्या करना चाहिए। अगर कोई फ़ैसला आपके केस के खिलाफ़ जाता है या उसे पलट दिया जाता है, तो यह आपकी ड्यूटी है कि आप इसे कोर्ट के संज्ञान में लाएँ और फिर समझाएँ कि यह आपके तथ्यों पर क्यों लागू नहीं हो सकता। भले ही आप केस हार जाएँ, लेकिन आप कोर्ट का भरोसा जीत लेंगे। प्रतिष्ठा उन सैकड़ों छोटीचीज़ों से बनती है जो हम हर दिन करते हैं।
इस अवसर पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एस. एस. सहगल ने कहा, "एआई दुनिया भर में इंडस्ट्री, इकॉनमी और समाज को बदल इनोवेशन की रफ़्तार को बढ़ाया है। 2025 तक दुनिया भर में एआई से जुड़े 3.40 लाख से अधिक पेटेंट हो चुके और 2018 के बाद से यूएस में एआई पेटेंट में 33% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन एआई ने ओनरशिप, इनोवेशन, जवाबदेही, क्रिएटिविटी और आईपीआर को लेकर कई नए कानूनी सवाल खड़े हुए हैं। 2020 और 2025 के बीच दुनियाभर में एआई से जुड़े 1,000 से ज़्यादा मुकदमे दर्ज किए गए। एआई और आईपीआर का संगम 21वीं सदी के सबसे अहम कानूनी मुद्दों में से एक है। क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने, क्रिएटर्स और इनोवेटर्स के अधिकारों की रक्षा तथा टेक्नोलॉजी के नैतिक इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए आईपीआर फ्रेमवर्क में सुधार की ज़रूरत है। जब कानून बनाने वाले और अदालतें एआई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ को तय करेंगी, तो क्रिएटिव एआई विकास की दिशा तय होगी।”
अपने संबोधन में एडवोकेट पवन कुमार मुतनेजा ने कहा,“जीवन में आने वाली हर चुनौती, विशेषकर जटिल और कठिन चुनौतियाँ, हमें सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। छात्रों को अपने माता-पिता, शिक्षकों, दोस्तों और शिक्षा से मिले मूल्यों को हमेशा कायम रहें। समस्या को समझें, अपने मूल्यों के आधार पर निर्णय लें और आगे बढ़ें। निर्णय को चुनौती मिल सकती है, लेकिन यदि वह सही मूल्यों और अपनी पूरी क्षमता के आधार पर लिया गया है, तो वह जीवन में मजबूती और आत्मविश्वास प्रदान करेगा।”
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक ने कहा,“पहले की तुलना में आज के छात्रों के पास बेहतर सुविधाएँ हैं। टेक्नोलॉजी और एआई ने आज के छात्रों को सीखने के बेहतर अवसर दिए हैं, लेकिन कानून के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव का कोई विकल्प नहीं है। कानून का पेशा हर दिन नया सीखने, पुरानी बातें छोड़ने और फिर नए सिरे से सीखने की प्रेरणा देता है। छात्रों को तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए निरंतर सीखते रहना चाहिए, क्योंकि एक सफल कानूनी प्रोफेशनल बनने की यात्रा लगातार सीखने की यात्रा है।”
मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फाइनल राउंड का फैसला सात सदस्यीय प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञों के पैनल ने किया। पैनल में सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट दविंदर पाल सिंह, भारत के सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) एडवोकेट विवेक नारायण शर्मा, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, मोहाली की प्रिंसिपल डॉ. रश्मि नागपाल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डीपीआईआईटी में सीनियर कंसल्टेंट (आईपीआर) डॉ. राघवेन्द्र जी.आर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एडिशनल एडवोकेट जनरल एडवोकेट चंचल सिंगला, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीनियर एडवोकेट रोहित सूद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एडवोकेट सुवीर सिद्धू शामिल थे।
'ज्यूरिस नेक्सस 2026' की मुख्य समस्या जनरेटिव एआई में कॉपीराइट कामों के इस्तेमाल को लेकर एक काल्पनिक अंतरराष्ट्रीय विवाद पर आधारित थी। मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फ़ाइनल में, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम ने 'रिपब्लिक ऑफ़ आर्यावर्त', 'न्यूरोजेन ग्लोबल इंक.' और 'क्रिएटिवएज इंटरनेशनल लिमिटेड' (रेस्पॉन्डेंट) की ओर से 'ग्लोबल क्रिएटर्स एलायंस' और 'फेडरेशन ऑफ़ नोवारिस' (अपीलकर्ता) के खिलाफ़ तर्क दिया कि एआई से बने कंटेंट पर कॉपीराइट कानून लागू नहीं होते हैं, क्योंकि एआई कॉपीराइट वाले कामों का इस्तेमाल सिर्फ़ डेटा के तौर पर करता है और एआई रीप्रोड्यूस करने के लिए पैटर्न का इस्तेमाल करता है, जिस पर कोई साफ़ कानून रोक नहीं लगाता है। विजेता टीम ने तर्क दिया कि एआई के कामों की प्रकृति कॉपीराइट वाले कामों से अलग है और इस मामले में कॉपीराइट होल्डर्स को हुए कथित नुकसान बेबुनियाद हैं। एआई एक नया बाज़ार बना रहा है जो वास्तविक आर्ट वर्क के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है और न ही ऐसे कामों की जगह लेता है। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम ने तर्क दिया कि 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ डिजिटल इनोवेशन एंड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' का इस मामले में कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं है, क्योंकि इस मामले का निपटारा सिर्फ़ 'वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन' का 'डिस्प्यूट सेटलमेंट बोर्ड' ही कर सकता है, जो दो देशों के बीच ऐसे मामलों पर फ़ैसला लेने के लिए सक्षम अथॉरिटी है।
1.8 लाख रुपये से अधिक पुरस्कार राशि वाली 'ज्यूरिस नेक्सस 2026' प्रतियोगिता में 13 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, 27 स्टेट यूनिवर्सिटी और 67 प्राइवेट हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन की 112 टीमों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबले के बाद के बाद, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, पंजाब रीजनल यूनिवर्सिटी लुधियाना, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और मंगलायतन यूनिवर्सिटी की चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं थी।
AI इंसानों को तेज़ और कुशल बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे कभी इंसानी समझ की जगह लेने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट जज जस्टिस आलोक जैन
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी ने जीती चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित भारत की सबसे बड़ी इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 'ज्यूरिस नेक्सस 2026'
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की 'ज्यूरिस नेक्सस 2026' इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स ने जीता 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड', महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने 'बेस्ट मूटर अवॉर्ड' और सविता स्कूल ऑफ़ लॉ ने जीता 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड'
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की एक टीम ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा 24 से 26 सितंबर तक आयोजित तीन दिवसीय ‘जुरिस नेक्सस’, प्रतियोगिता जीत ली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बौद्धिक संपदा अधिकार पर केंद्रित भारत की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में 20 राज्यों और छह देशों की 112 टीमों ने हिस्सा लिया था।
प्रतियोगिता के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज जस्टिस आलोक जैन; हरियाणा के एडवोकेट जनरल एडवोकेट पवन कुमार मुटनेजा, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट और नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के पूर्व डायरेक्टर व चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमी के डायरेक्टर (एकेडमिक्स) डॉ. बलराम के. गुप्ता, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) एसएस सहगल और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम (जिसमें अदिति शशिकुमार, वैष्णवी अल्वा और शरधि एस राव शामिल थीं) ने पहला स्थान हासिल किया और ‘ज्यूरिस नेक्सस 2026’ का 1 लाख रुपये का इनाम जीता। पंजाब यूनिवर्सिटी, लुधियाना के रीजनल सेंटर की टीम (जिसमें गुनीतइंदर कौर, हरवीन कौर और नेहा शामिल थीं) रनर-अप रही और उसने 50 हज़ार रुपये का इनाम जीता। वहीं, भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स ने 'बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड' जीता, महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पुणे के स्टूडेंट्स ने 'बेस्ट मूटर अवॉर्ड' जीता और सविता स्कूल ऑफ़ लॉ ने 'बेस्ट मेमोरियल अवॉर्ड' जीता।
जस्टिस आलोक जैन ने कहा, "टेक्नोलॉजी कानूनी पेशे को बदल रही है और आपको उपलब्ध हर टूल का इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। एआई को अपनी सोच में मदद करने दें, आपको तेज़ और ज़्यादा कुशल बनाने दें, लेकिन इसे कभी भी अपनी सोच की जगह न लेने दें। असली सीख ऐसी सोच विकसित करने में है। ऐसी सोच विकसित करने में है जो यह जानती हो कि क्या पूछना, क्यों और जवाब का क्या महत्व होगा। बटन दबाने से पहले, खुद से सवाल करें। एआई आपको कानून ता सकता लेकिन कानून क्यों और कैसे विकसित हुआ यह समझ आपको विकसित करनी होगी। डिजिटलाइज़ेशन साइबर अपराध और टेक्नोलॉजी से जुड़े अपराध नई कानूनी चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। कानून आपको कई बातें सिखाता है, लेकिन कुछ सबक किताबों या क्लासरूम में नहीं सिखाई जा सकती। वे प्रैक्टिस, अनुभव और गलतियों से सीखते हैं। याद रखें कि आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ केस जीतना नहीं है; बल्कि सही फ़ैसले तक पहुँचने में कोर्ट की मदद करना अहम है। नैतिकता का मतलब है यह जानना कि जब हमारे पास कुछ और करने का विकल्प हो, तो हमें क्या करना चाहिए। अगर कोई फ़ैसला आपके केस के खिलाफ़ जाता है या उसे पलट दिया जाता है, तो यह आपकी ड्यूटी है कि आप इसे कोर्ट के संज्ञान में लाएँ और फिर समझाएँ कि यह आपके तथ्यों पर क्यों लागू नहीं हो सकता। भले ही आप केस हार जाएँ, लेकिन आप कोर्ट का भरोसा जीत लेंगे। प्रतिष्ठा उन सैकड़ों छोटीचीज़ों से बनती है जो हम हर दिन करते हैं।
इस अवसर पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एस. एस. सहगल ने कहा, "एआई दुनिया भर में इंडस्ट्री, इकॉनमी और समाज को बदल इनोवेशन की रफ़्तार को बढ़ाया है। 2025 तक दुनिया भर में एआई से जुड़े 3.40 लाख से अधिक पेटेंट हो चुके और 2018 के बाद से यूएस में एआई पेटेंट में 33% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन एआई ने ओनरशिप, इनोवेशन, जवाबदेही, क्रिएटिविटी और आईपीआर को लेकर कई नए कानूनी सवाल खड़े हुए हैं। 2020 और 2025 के बीच दुनियाभर में एआई से जुड़े 1,000 से ज़्यादा मुकदमे दर्ज किए गए। एआई और आईपीआर का संगम 21वीं सदी के सबसे अहम कानूनी मुद्दों में से एक है। क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने, क्रिएटर्स और इनोवेटर्स के अधिकारों की रक्षा तथा टेक्नोलॉजी के नैतिक इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए आईपीआर फ्रेमवर्क में सुधार की ज़रूरत है। जब कानून बनाने वाले और अदालतें एआई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ को तय करेंगी, तो क्रिएटिव एआई विकास की दिशा तय होगी।”
अपने संबोधन में एडवोकेट पवन कुमार मुतनेजा ने कहा,“जीवन में आने वाली हर चुनौती, विशेषकर जटिल और कठिन चुनौतियाँ, हमें सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। छात्रों को अपने माता-पिता, शिक्षकों, दोस्तों और शिक्षा से मिले मूल्यों को हमेशा कायम रहें। समस्या को समझें, अपने मूल्यों के आधार पर निर्णय लें और आगे बढ़ें। निर्णय को चुनौती मिल सकती है, लेकिन यदि वह सही मूल्यों और अपनी पूरी क्षमता के आधार पर लिया गया है, तो वह जीवन में मजबूती और आत्मविश्वास प्रदान करेगा।”
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक ने कहा,“पहले की तुलना में आज के छात्रों के पास बेहतर सुविधाएँ हैं। टेक्नोलॉजी और एआई ने आज के छात्रों को सीखने के बेहतर अवसर दिए हैं, लेकिन कानून के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव का कोई विकल्प नहीं है। कानून का पेशा हर दिन नया सीखने, पुरानी बातें छोड़ने और फिर नए सिरे से सीखने की प्रेरणा देता है। छात्रों को तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए निरंतर सीखते रहना चाहिए, क्योंकि एक सफल कानूनी प्रोफेशनल बनने की यात्रा लगातार सीखने की यात्रा है।”
मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फाइनल राउंड का फैसला सात सदस्यीय प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञों के पैनल ने किया। पैनल में सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट दविंदर पाल सिंह, भारत के सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) एडवोकेट विवेक नारायण शर्मा, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, मोहाली की प्रिंसिपल डॉ. रश्मि नागपाल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डीपीआईआईटी में सीनियर कंसल्टेंट (आईपीआर) डॉ. राघवेन्द्र जी.आर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एडिशनल एडवोकेट जनरल एडवोकेट चंचल सिंगला, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीनियर एडवोकेट रोहित सूद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एडवोकेट सुवीर सिद्धू शामिल थे।
'ज्यूरिस नेक्सस 2026' की मुख्य समस्या जनरेटिव एआई में कॉपीराइट कामों के इस्तेमाल को लेकर एक काल्पनिक अंतरराष्ट्रीय विवाद पर आधारित थी। मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फ़ाइनल में, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम ने 'रिपब्लिक ऑफ़ आर्यावर्त', 'न्यूरोजेन ग्लोबल इंक.' और 'क्रिएटिवएज इंटरनेशनल लिमिटेड' (रेस्पॉन्डेंट) की ओर से 'ग्लोबल क्रिएटर्स एलायंस' और 'फेडरेशन ऑफ़ नोवारिस' (अपीलकर्ता) के खिलाफ़ तर्क दिया कि एआई से बने कंटेंट पर कॉपीराइट कानून लागू नहीं होते हैं, क्योंकि एआई कॉपीराइट वाले कामों का इस्तेमाल सिर्फ़ डेटा के तौर पर करता है और एआई रीप्रोड्यूस करने के लिए पैटर्न का इस्तेमाल करता है, जिस पर कोई साफ़ कानून रोक नहीं लगाता है। विजेता टीम ने तर्क दिया कि एआई के कामों की प्रकृति कॉपीराइट वाले कामों से अलग है और इस मामले में कॉपीराइट होल्डर्स को हुए कथित नुकसान बेबुनियाद हैं। एआई एक नया बाज़ार बना रहा है जो वास्तविक आर्ट वर्क के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है और न ही ऐसे कामों की जगह लेता है। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की टीम ने तर्क दिया कि 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ डिजिटल इनोवेशन एंड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' का इस मामले में कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं है, क्योंकि इस मामले का निपटारा सिर्फ़ 'वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन' का 'डिस्प्यूट सेटलमेंट बोर्ड' ही कर सकता है, जो दो देशों के बीच ऐसे मामलों पर फ़ैसला लेने के लिए सक्षम अथॉरिटी है।
1.8 लाख रुपये से अधिक पुरस्कार राशि वाली 'ज्यूरिस नेक्सस 2026' प्रतियोगिता में 13 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, 27 स्टेट यूनिवर्सिटी और 67 प्राइवेट हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन की 112 टीमों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबले के बाद के बाद, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, पंजाब रीजनल यूनिवर्सिटी लुधियाना, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और मंगलायतन यूनिवर्सिटी की चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं थी।
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