Himachal Breaking : पूर्व एसएसपी संजीव गांधी पर FIR, सरकारी फंड में 2.35 लाख की कथित हेराफेरी का आरोप
कांस्टेबल के 1.87 लाख रुपये के बिल स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान नहीं होने का आरोप; फंड से निकाली गई राशि के खर्च का रिकॉर्ड नहीं मिलने का दावा
Babushahi Bureau
शिमला : अक्टूबर 2026: शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में पुलिस थाना सदर में मामला दर्ज किया गया है। एक पुलिस कांस्टेबल की शिकायत और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में आरोप है कि सरकारी कार्यों के लिए कांस्टेबल की ओर से अपनी जेब से खर्च किए गए 1,87,890 रुपये के स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं किया गया, जबकि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी। पुलिस थाना सदर, शिमला में अभियोग संख्या 138/2026, दिनांक 22 अक्तूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रकरण की जांच जारी है।
सरकारी इंतजामों के लिए अपनी जेब से खर्च किए 1.87 लाख
पुलिस लाइन कैथू, शिमला में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उन्हें विभिन्न सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शिकायत में कहा गया है कि इन कार्यों के लिए आवश्यक सामान और अन्य इंतजाम करने को कहा गया तथा खर्च की गई राशि बाद में वापस देने का आश्वासन दिया गया। कांस्टेबल का आरोप है कि उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए अपनी जेब से कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए। इसके बाद खर्च से संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए गए। शिकायत के मुताबिक, कार्यालय में जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए स्वीकृति भी मिल गई थी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि स्वीकृत राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, आरोप है कि औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद उन्हें उनकी रकम नहीं मिली।
भुगतान के वाउचर पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप
शिकायत में 6 फरवरी 2026 की एक घटना का भी उल्लेख किया गया है। कांस्टेबल के अनुसार, तत्कालीन एसएसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने उन्हें अपने पास बुलाया और भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर आवश्यक हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी। लेकिन हस्ताक्षर करवाने के बाद भी उनके खाते में भुगतान नहीं पहुंचा। कांस्टेबल ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें वास्तविक स्थिति से अनजान रखा गया और भुगतान के संबंध में उन्हें जो जानकारी दी गई, उसके अनुरूप रकम नहीं मिली।
अकाउंट ब्रांच से पता चला, फंड से निकल चुकी थी रकम
शिकायत के अनुसार, जुलाई 2026 में मामला उठाने के बाद कांस्टेबल ने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से भुगतान के संबंध में जानकारी हासिल की। वहां से उन्हें कथित तौर पर पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में जमा नहीं हुई। इस घटनाक्रम के चलते शिकायतकर्ता को अपनी स्वीकृत रकम से वंचित रहना पड़ा। उनका कहना है कि सरकारी कार्यों के लिए पहले ही निजी धन खर्च कर चुके होने के कारण उन्हें अपनी देनदारियां चुकाने के लिए दूसरे निजी संसाधनों से पैसों की व्यवस्था करनी पड़ी। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया कि शिकायतकर्ता की ओर से खर्च की गई राशि के बिल न केवल कार्यालय में जमा थे, बल्कि शिकायत के अनुसार उन्हें भुगतान के लिए मंजूरी भी मिल चुकी थी।
दो वर्षों में फंड से 2.35 लाख की कथित अवैध निकासी
शिकायत मिलने के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिला पुलिस के एक फंड से लगभग दो वर्षों के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की कथित अवैध निकासी की गई थी। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने किन उद्देश्यों के लिए किया, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। फंड से निकाली गई धनराशि के खर्च से संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि इस निकासी के कारण संबंधित फंड में धन की कमी उत्पन्न हो गई थी। हालांकि, फंड से राशि निकालने, उसके वास्तविक उपयोग और जिम्मेदारी से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के दौरान होना बाकी है।
बिलों की राशि स्थानांतरित करने का आरोप
रिकॉर्ड के अनुसार, जब संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण हुआ, उस दौरान फंड में हुई कथित कमी को पूरा करने के लिए एक अन्य वित्तीय प्रक्रिया अपनाए जाने का आरोप है। शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि निकाली गई, लेकिन उसे शिकायतकर्ता को भुगतान करने के बजाय संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि यह प्रक्रिया शिकायतकर्ता को वास्तविक स्थिति से अनजान रखकर पूरी की गई। इससे कांस्टेबल को उनकी स्वीकृत राशि नहीं मिली, जबकि संबंधित फंड में धनराशि स्थानांतरित कर दी गई। इस घटनाक्रम के कारण सरकारी भुगतान प्रक्रिया और फंड के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। खास तौर पर यह जांच का विषय है कि स्वीकृत बिलों की राशि का भुगतान किस आधार पर रोका गया और उसे दूसरे खाते में स्थानांतरित करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।
धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच
प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, बेईमानी से धन के इस्तेमाल तथा दस्तावेजों से संबंधित संभावित अनियमितताओं के तथ्य सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तत्कालीन एसपी शिमला संजीव कुमार गांधी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत अभियोग दर्ज किया है।मामले में अब यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि फंड से निकाली गई 2.35 लाख रुपये की राशि किन परिस्थितियों में निकाली गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ, संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड में क्या विसंगतियां हैं और कांस्टेबल के स्वीकृत बिलों की रकम दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के पीछे क्या कारण थे। फिलहाल मामला दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
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