हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) चेयरमैन पद पर नियुक्ति के लिए लॉबिंग तेज, 22 अक्टूबर को आलोक वर्मा का कार्यकाल हो रहा पूरा
आयोग में गत 6 महीने से सदस्य का भी एक पद रिक्त
अगर रिटायर्ड आई.ए.एस. अथवा आई.पी.एस. अधिकारी की हुई नियुक्ति, तो अधिकतम दो वर्ष ही मिलेगा कार्यकाल -- एडवोकेट हेमंत
चंडीगढ़---हरियाणा की महत्वपूर्ण संवैधानिक भर्ती संस्था हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के चेयरमैन के पद पर नियुक्ति के लिए लॉबिंग तेज हो गई है चूँकि आयोग के मौजूदा चेयरमैन आलोक वर्मा का कार्यकाल 22 अक्टूबर को पूरा हो रहा है.
चेयरमैन के साथ साथ आयोग में सदस्य का एक पद भी पिछले छ: महीने से रिक्त है। आयोग के सदस्य रहे राजेंद्र कुमार का कार्यकाल इसी वर्ष 16 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था हालंकि उनके स्थान पर किसी नए सदस्य की नियुक्ति नहीं की गई है ।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी-प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 316(2) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से छ: वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, तक होता है।
हेमंत ने बताया कि भारतीय वन सेवा (आई.एफ.एस.) के 1989 बैच के रिटायर्ड अधिकारी आलोक वर्मा की जन्म-तिथि 24 अक्टूबर 1964 है एवं आज से छ: वर्ष 23 अक्टूबर 2020 को 56 वर्ष की आयु में वर्मा ने एच.पी.एस.सी. चेयरमैन का पदभार ग्रहण किया था, इसलिए उनका कार्यकाल नियुक्त के छ: वर्ष तक अर्थात 22 अक्टूबर 2026 तक ही बनता है.
वहीं आयोग के पूर्व सदस्य राजेंद्र कुमार को 23 सितंबर 2022 को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। हालांकि उनका छह वर्षीय कार्यकाल सितंबर. 2028 तक चलता, लेकिन 62 वर्ष की आयु पूरी होने के कारण उनका कार्यकाल 16 अप्रैल 2026 को ही समाप्त हो गया था.
HPSC में वर्तमान स्थिति
हरियाणा लोक सेवा आयोग में वर्तमान में चेयरमैन के अलावा पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं।
मौजूदा संरचना में—
आलोक वर्मा आयोग के चेयरमैन के अतिरिक्त आनंद कुमार शर्मा जुलाई 2021 से सदस्य हैं और जुलाई 2027 तक पद पर रहेंगे।
ज्योति बैंदा सितंबर 2022 से सदस्य हैं, जिनका कार्यकाल सितंबर 2028 तक है।
ममता यादव अप्रैल 2023 से सदस्य हैं और अप्रैल 2029 तक पद पर रहेंगी।
डॉ. सोनिया त्रिखा दिसंबर 2023 से सदस्य हैं, जिनका कार्यकाल दिसंबर 2029 तक है। सोनिया हरियाणा के मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर की धर्मपत्नी हैं.
राजेंद्र कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सदस्य का एक पद रिक्त है.
नया सदस्य राजनीतिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से हो सकता है
हेमंत ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 316(1) के अनुसार आयोग में कम से कम आधे सदस्य ऐसे होने चाहिए जिन्होंने नियुक्ति से पहले केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में कम-से-कम दस वर्ष कार्य किया हो।
वर्तमान में चेयरमैन आलोक वर्मा सहित आयोग में सरकारी सेवा पृष्ठभूमि से पर्याप्त सदस्य मौजूद हैं। ऐसे में सरकार चाहे तो नए चेयरमैन या सदस्य के रूप में किसी राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक या अन्य गैर-सरकारी क्षेत्र से व्यक्ति की नियुक्ति कर सकती है। हालांकि अगर प्रदेश सरकार तत्काल तौर पर किसी को चेयरमैन पद पर नियुक्त नहीं करना चाहती, तो आयोग के चार सदस्यों में से किसी को भी कार्यवाहक चेयरमैन पर का कार्यभार प्रदान किया जा सकता है.
सरकार चाहे तो घटा सकती है सदस्यों की संख्या
हेमंत ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो एच.पी.एस.सी. में सदस्यों की संख्या को मौजूदा पांच से घटाकर चार भी कर सकती है। इसके लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) विनियमन, 2018 के विनियम संख्या तीन (3) में संशोधन करना पड़ेगा जो हरियाणा कैबिनेट की मंजूरी के बाद मात्र एक एग्जीक्यूटिव नोटिफिकेशन मार्फ़त किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पूर्व तत्कालीन मनोहर लाल सरकार ने आयोग में सदस्यों की संख्या आठ से घटाकर पांच कर दी थी।
इसी बीच प्रशासनिक गलियारों में ऐसी चर्चा चल रही है कि आयोग के चेयरमैन पद पर किसी रिटायर्ड आई.ए.एस. या आई.पी.एस. अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है. इस विषय पर हेमंत ने बताया कि यदि नायब सैनी सरकार ऐसा करना चाहती है, तो इसमें कोई अड़चन नहीं हैं. हालांकि ऐसी परिस्थिति में आयोग में उस सेवानिवृत अधिकारी का कार्यकाल, अगर वह 60 वर्ष के आयु में सेवा से रिटायर हुआ है, अधिकतम दो वर्ष ही हो सकता है अर्थात जब वो 62 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा. अगर पूरा छ: वर्ष का कार्यकाल चाहिए, तो उस अधिकारी को 56 वर्ष या उससे कम आयु में आई.ए.एस. या आई.पी.एस. से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनी होगी.
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