Himachal Breaking : कुल्लू के अनार पहुंचे दुबई, 600 किसानों को मिलेगा वैश्विक बाजार का रास्ता
सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार का UAE निर्यात, हिमाचल के बागवानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की पहल
Babushahi Bureau
शिमला, 22 अक्तूबर। हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के दरवाजे खुलने लगे हैं। कुल्लू में पैदा होने वाले सिंदूरी किस्म के अनार अब दुबई के बाजार तक पहुंच गए हैं। जिले से 1.3 मीट्रिक टन अनार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई शहर को निर्यात किए गए हैं। इस पहल से कुल्लू के बागवानों को अपनी उपज देश के बाहर बेचने का अवसर मिला है। साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से छोटे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को इस निर्यात की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए उनकी उपज को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ कृषि एवं बागवानी उत्पादों के विपणन के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है।
600 किसानों से जुड़े संगठन के माध्यम से जुटाए अनार
दुबई भेजे गए अनार कुल्लू जिले के किसानों और भुंतर स्थित किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से एकत्र किए गए। इस संगठन से लगभग 600 किसान जुड़े हुए हैं। अनार की आपूर्ति करने वाले किसानों में रीना देवी, संजय कुमार, नितिश कुमार और वीर सिंह गुलेरिया शामिल हैं। इस खेप के निर्यात में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने सहयोग प्रदान किया। इस तरह स्थानीय स्तर पर उत्पादित फल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए किसानों, किसान उत्पादक संगठन और निर्यात से जुड़ी संस्थाओं के बीच समन्वय देखने को मिला।
बागवानों के लिए क्यों अहम है यह निर्यात?
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका है। सेब के अलावा अनार, चेरी, प्लम और अन्य फलों की खेती भी किसानों की आय का एक जरिया है। ऐसे में स्थानीय उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना बागवानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से फलों को एकत्र करने और निर्यात की प्रक्रिया से जोड़ने का लाभ यह हो सकता है कि अलग-अलग किसानों की उपज को एक साथ बाजार तक पहुंचाया जा सके। इससे छोटे उत्पादकों के लिए भी निर्यात की प्रक्रिया में भागीदारी के अवसर बनते हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थायी जगह बनाने के लिए फलों की गुणवत्ता, उचित ग्रेडिंग, पैकेजिंग, परिवहन और बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति भी महत्वपूर्ण होगी। कुल्लू के अनार का दुबई पहुंचना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
जून में ओमान भेजी गई थी चेरी और प्लम की खेप
हिमाचल प्रदेश से फलों के निर्यात की दिशा में यह पहला प्रयास नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी वर्ष जून में शिमला जिले के जड़ोल-टिक्कर और बागी क्षेत्रों के छह प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम की पहली खेप ओमान को निर्यात की गई थी। अब कुल्लू के अनार का दुबई पहुंचना प्रदेश के फल उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपज पहुंचाने की संभावनाओं को आगे बढ़ाता है।
गुणवत्ता पर जोर, वैश्विक बाजार में पहचान बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किसानों और बागवानों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली फसलों और फलों की किस्मों की खेती करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि एवं बागवानी उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का जोर किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध करवाने पर है, ताकि उन्हें अपनी उपज के विपणन के अधिक अवसर मिल सकें। कुल्लू के सिंदूरी अनार की दुबई तक पहुंच इस बात का संकेत है कि हिमाचल के बागवानों के लिए स्थानीय मंडियों से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने की संभावनाएं मौजूद हैं। अब इस पहल की सफलता इस पर भी निर्भर करेगी कि किसानों को नियमित निर्यात, गुणवत्ता बनाए रखने और बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने के कितने अवसर मिलते हैं।
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