चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर, 25 जनवरी से शुरू होगी जनसंख्या जनगणना
बाबूशाही नेटवर्क
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर, 2026: केंद्र सरकार ने पूरे देश में जनगणना 2027 के तहत जनसंख्या गणना के चरण का शेड्यूल जारी कर दिया है। चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी वाले इलाकों को छोड़कर, यह प्रक्रिया 25 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च तक एक "संशोधन दौर" (revisional round) होगा।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) और जनगणना आयुक्त, मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के लिए संदर्भ तिथि (reference date) 1 मार्च, 2027 को 00:00 बजे (आधी रात) तय की गई है। इसका मतलब यह है कि उस समय देश में जीवित हर व्यक्ति की गिनती की जाएगी, जबकि इस संदर्भ तिथि के बाद पैदा होने वाले बच्चे को जनगणना 2027 के अंतिम आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया है, "जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार यह घोषित करती है कि भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में (मणिपुर को छोड़कर - जब तक कि कोई नई घोषणा न हो), जनगणना का काम 25 जनवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक किया जाएगा। इसके बाद 1 मार्च, 2027 से 5 मार्च, 2027 तक एक 'संशोधन दौर' होगा।" यह प्रक्रिया गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में भी लागू होगी जहां बर्फबारी के कारण जनगणना का काम अलग समय पर होता है।
अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के इतिहास में पहली बार, नागरिकों को 10 जनवरी से 24 जनवरी, 2027 तक 'स्व-गणना' (self-enumeration) करने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए यह सुविधा "घर-घर जाकर जनसंख्या की गिनती शुरू होने से ठीक पहले" उपलब्ध हो जाएगी। पिछली दशकीय जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 का चरण कोविड-19 महामारी के कारण टल गया था।
दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जा रही है: पहले घरों की सूची बनाना और आवास जनगणना, और उसके बाद जनसंख्या की गिनती।
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