हिमाचलवासियों को बड़ी राहत: निजी भूमि पर खैर के सूखे और बेकार पेड़ों की कटाई पर रोक नहीं, SC ने किया स्पष्ट
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 14 फरवरी 2026 : हिमाचल प्रदेश के लोगों को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य में निजी भूमि पर सूखे, गिरे हुए, फफूंद से प्रभावित और सड़े हुए खैर के पेड़ों को काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
खैर के पेड़ पान में इस्तेमाल होने वाले 'कत्था' और उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी के उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं और ये हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर तथा उत्तराखंड में कुछ हिस्सों के पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
खैर उत्पादकों को बड़ी राहत
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि पर्वतीय राज्य में पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाने वाले शीर्ष अदालत के 1996 के आदेश में 16 फरवरी, 2018 और 10 मई, 2023 को पहले ही संशोधन किया जा चुका है, जिससे खैर के पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल गई है। इस मामले में अदालत मित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने बताया कि उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था कि मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
पीठ ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले खैर के सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति के लिए जिला वन अधिकारी से संपर्क किया था और अनुमति न मिलने पर उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया था। (SBP)
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