पंजाब सरकार द्वारा Chief Justice की नियुक्ति को लेकर उठाया गया विवाद ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक’: सत्य पाल जैन
बाबूशाही ब्यूरो
चंडीगढ़, 6 सितंबर 2026- वरिष्ठ भाजपा नेता और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी शर्मा की नियुक्ति को लेकर उठाए गए विवाद को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अनावश्यक” बताया है।
एक प्रेस बयान में जैन ने कहा कि यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति, जो देश के सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी हैं, द्वारा संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए निर्धारित मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
जैन ने कहा कि 6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पहली सूची में नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के लिए दूसरी सूची में सिफारिशें की गईं।
उनके अनुसार, इन सभी प्रस्तावों पर संबंधित राज्य सरकारों के विचार मांगे गए थे। जैन ने कहा कि MoP के अनुसार पंजाब और हरियाणा दोनों सरकारों को भी प्रस्ताव के बारे में सूचित किया गया और 10 अगस्त 2026 को उनकी राय मांगी गई।
जैन ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, जबकि हरियाणा सरकार ने भी 12 और 13 अगस्त को प्रस्ताव के पक्ष में अपनी राय भेज दी थी।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार के पास अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन आज तक उसने कोई राय नहीं भेजी है।
जैन ने आगे कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य सरकारों की राय बाध्यकारी नहीं है, क्योंकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत केवल उनकी राय लेना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में राज्य सरकारों के पास कोई “वीटो” अधिकार नहीं है।
उन्होंने न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने की आलोचना करते हुए कहा कि किसी को भी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और एक गैर-राजनीतिक मुद्दे का राजनीतिकरण करने के उद्देश्य से प्रस्ताव पर अनिश्चितकाल तक बैठे रहने का अधिकार नहीं है।
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