Kullu NCC Gets First Microlight Aircraft : आखिर कुल्लू पहुंचा हिमाचल का पहला एनसीसी माइक्रोलाइट विमान
विंग कमांडर कुनाल शर्मा के ढाई साल के प्रयास लाए रंग, प्रदेश में एनसीसी कैडेट्स के लिए उड़ान प्रशिक्षण की राह हुई आसान
बाबूशाही ब्यूरो
कुल्लू, 14 अक्टूबर 2026: हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और विमानन प्रशिक्षण के क्षेत्र में बुधवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई। दशकों के इंतजार के बाद पहला एनसीसी माइक्रोलाइट विमान कुल्लू हवाई अड्डे पर उतरा। इसके साथ ही प्रदेश में एनसीसी कैडेट्स के लिए समर्पित उड़ान प्रशिक्षण सुविधा स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस विमान को 4 पंजाब एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, लुधियाना के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन बलजिंदर सिंह गिल और 1 हिमाचल प्रदेश एयर एनसीसी यूनिट, कुल्लू के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर कुनाल शर्मा ने उड़ाकर कुल्लू पहुंचाया। यह उपलब्धि करीब तीन दशक से चली आ रही उस कोशिश का परिणाम है, जिसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में एनसीसी के लिए विमानन प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करवाना था।
विंग कमांडर कुनाल शर्मा के ढाई साल के प्रयास सफल
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे विंग कमांडर कुनाल शर्मा के पिछले ढाई वर्षों के निरंतर प्रयास रहे हैं। प्रदेश में एनसीसी की समर्पित विमानन सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने विभिन्न विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजना को आगे बढ़ाया। इस दौरान वित्तीय संसाधन जुटाने, हैंगर निर्माण पूरा करवाने, सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने और विमान संचालन से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया गया। हैंगर के निर्माण और उसे तैयार करने के लिए राज्य शिक्षा विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और जिला प्रशासन के साथ लगातार समन्वय किया गया। इसके अतिरिक्त सीसीटीवी निगरानी सहित जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए गए।
कई एजेंसियों के बीच समन्वय से मिली सफलता
कुल्लू में उड़ान प्रशिक्षण सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया में नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस), नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और एनसीसी अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना महत्वपूर्ण रहा। विंग कमांडर शर्मा ने संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जरूरी अनुमतियों, निरीक्षणों, स्वीकृतियों और समझौता ज्ञापनों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। विमान संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी तैयार की गईं। इनमें घाटी में उड़ान, सर्किट फ्लाइंग और पटियाला से कुल्लू तक विमान लाने की प्रक्रिया शामिल रही। विमान के पहुंचने से करीब तीन महीने पहले इन प्रक्रियाओं पर काम किया गया था। इससे पहले विंग कमांडर कुनाल शर्मा और ग्रुप कैप्टन पंकज भारद्वाज द्वारा परीक्षण लैंडिंग भी की गई थी। इन परीक्षणों से घाटी में विमान संचालन की व्यवहार्यता का आकलन करने और आगे की तैयारियों में मदद मिली।
राज्य सरकार और प्रशासन का अहम योगदान
इस सुविधा को तैयार करने में राज्य शिक्षा विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और जिला प्रशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। राज्य शिक्षा विभाग ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई, जबकि एएआई और जिला प्रशासन के सहयोग से बुनियादी ढांचे को तैयार करने और परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिली। यह उपलब्धि दर्शाती है कि विभिन्न सरकारी विभागों, विमानन एजेंसियों और एनसीसी इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल और निरंतर प्रयासों से लंबे समय से लंबित योजनाओं को साकार किया जा सकता है।
अब प्रदेश में ही उड़ान का अनुभव ले सकेंगे एनसीसी कैडेट्स
अब तक हिमाचल प्रदेश के एनसीसी कैडेट्स को उड़ान संबंधी प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए पटियाला जाना पड़ता था। इससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त जरूरत होती थी। कुल्लू में फ्लाइंग नोड विकसित होने से कैडेट्स को अपने ही प्रदेश में विमानन गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। हिमालयी घाटी की विशिष्ट भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों में विमानन का अनुभव युवाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस सुविधा से एनसीसी के विमानन प्रशिक्षण को मजबूती मिलने, युवाओं में भारतीय वायुसेना और नागरिक विमानन के क्षेत्र में करियर बनाने की रुचि बढ़ने तथा तकनीकी ज्ञान, आत्मविश्वास और कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के युवाओं के लिए खुले नए अवसर
कुल्लू हवाई अड्डे पर पहले एनसीसी माइक्रोलाइट विमान का उतरना केवल विमानन क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसरों की शुरुआत भी है। करीब तीन दशक से देखे जा रहे सपने को साकार करने में विंग कमांडर कुनाल शर्मा के ढाई साल के सतत प्रयासों और विभिन्न संस्थानों के सामूहिक सहयोग की अहम भूमिका रही है। समर्पित बुनियादी ढांचे और विमान की उपलब्धता के साथ हिमाचल प्रदेश में एनसीसी कैडेट्स के लिए विमानन प्रशिक्षण को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हुआ है। यह उपलब्धि आने वाले समय में प्रदेश के युवाओं को विमानन क्षेत्र से जोड़ने और उनकी प्रतिभा को नए आयाम देने में सहायक साबित हो सकती है।
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