जगराओं में अतिक्रमण मुहिम पर बड़ा सवाल: दूसरों की दुकानें के आगे समान हटाने निकले हुक्मरानों के अपने कब्जे कौन हटाएगा?
कुर्सी की ताकत या कानून से ऊपर होने का भ्रम? रेहड़ी वालों पर कार्रवाई,
रसूखदारों के कथित कब्जों पर खामोशी! कौंसिल प्रधान की दुकान से लेकर डीएसपी सिटी दफ्तर के आगे लगे पोल तक उठे सवाल
जगराओं (दीपक जैन)
शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करवाने के नाम पर नगर कौंसिल और पुलिस ने मुहिम तो शुरू कर दी, लेकिन इस कार्रवाई ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब शहर के लोग मांग रहे हैं—जब कानून का डंडा आम दुकानदार और रेहड़ी वाला ही झेलेगा, तो सत्ता की कुर्सियों पर बैठे लोगों के लिए नियम कौन लागू करवाएगा? शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर पुरानी सब्जी मंडी रोड पर रेहड़ियां हटाने के लिए कौंसिल पार्षद पति और पुलिस जुटे रहे, वहीं दूसरी तरफ प्रभावशाली लोगों से जुड़े कथित कब्जों को लेकर कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में चर्चा है कि अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाने वालों की नजर आखिर उन जगहों तक क्यों नहीं पहुंचती, जहां कथित तौर पर रसूखदारों के कब्जे होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। क्या सड़क पर रखा सामान सिर्फ रेहड़ी वाले का ही अतिक्रमण है? क्या राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति की दुकान के बाहर सड़क घिरने से यातायात प्रभावित नहीं होता? और क्या सरकारी कार्यालय के सामने सड़क पर लगे पोल प्रशासन की नजर में नहीं आते? इन सवालों ने नगर कौंसिल और पुलिस की कार्रवाई को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
दूसरों को फरमान, अपने मामले में खामोशी क्यों?
नगर कौंसिल प्रधान कंवरपाल सिंह की रायकोट रोड पर चुंगी नंबर पांच के नजदीक स्थित दुकान के बाहर सड़क पर कथित कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच किए बिना किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि सड़क पर कब्जा है, तो कार्रवाई का पैमाना पद देखकर क्यों बदले? शहरवासियों का सवाल है कि जो व्यवस्था आम लोगों को सड़क खाली रखने का फरमान सुनाती है, क्या वही व्यवस्था अपने पदाधिकारियों से भी नियमों का पालन करवाने का साहस दिखाएगी लोगों के मुताबिक, पुरानी सब्जी मंडी रोड पर रेहड़ियां हटाने की कार्रवाई के दौरान नगर कौंसिल प्रधान की दुकान के बाहर कथित कब्जे और डीएसपी सिटी कार्यालय के आगे लगे पोल को लेकर भी सवाल उठे। यदि इनसे सड़क या यातायात प्रभावित होता है, तो इनकी जांच कर समान नियम लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान की असली परीक्षा कमजोर पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रभावशाली व्यक्ति के मामले में भी निष्पक्ष रहना है।
कुर्सी का रुतबा या जनता की जिम्मेदारी?
शहर में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि जनप्रतिनिधियों से जनता को सबसे पहले नियमों का पालन करने की उम्मीद होती है। पार्षदों और उनके परिवारों से जुड़े लोगों को दूसरों को नसीहत देने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अपने वार्डों और प्रतिष्ठानों के आसपास सड़क पर कोई अवैध कब्जा न हो। यदि किसी जनप्रतिनिधि से जुड़ा व्यक्ति नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए जैसी किसी आम नागरिक के खिलाफ होती है।सवाल यह भी है कि क्या नगर कौंसिल की कार्रवाई राजनीतिक सिफारिशों से प्रभावित होती है? आरोप लगते रहे हैं कि सड़क से उठाया गया सामान कुछ मामलों में पार्षदों की सिफारिश पर वापस दिलवा दिया जाता है। इन आरोपों की जांच जरूरी है। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि नियमों का पालन करने वाले दुकानदारों के साथ भी अन्याय है।
पुलिस का काम कानून-व्यवस्था संभालना, कौंसिल की जवाबदेही भी तय हो
अतिक्रमण हटाने की मुहिम में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस और नगर कौंसिल को अपने-अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के तहत समन्वय से काम करना चाहिए। कार्रवाई किस विभाग की जिम्मेदारी है और किस कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। अभियान का उद्देश्य केवल रेहड़ी वालों को हटाना नहीं, बल्कि सड़कों को स्थायी रूप से यातायात के लिए खुला रखना होना चाहिए।
ईओ का बयान: प्रधान हो या पार्षद, कानून सबके लिए बराबर
नगर कौंसिल प्रधान कंवरपाल सिंह की दुकान के बाहर कथित कब्जे के संबंध में जब ईओ मोहित शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे नगर कौंसिल प्रधान हो या पार्षद। उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच करवाएंगे और यदि कब्जा पाया गया, तो उसे हटवाने के साथ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।अब ईओ के इस बयान की असली परीक्षा कार्रवाई से होगी। क्या नगर कौंसिल अपने ही प्रधान की दुकान के बाहर कथित कब्जे की निष्पक्ष जांच करवाकर नियमों के अनुसार कदम उठाएगी? क्या डीएसपी सिटी कार्यालय के आगे लगे पोल की स्थिति भी जांच के दायरे में आएगी? और क्या राजनीतिक सिफारिशों के सहारे सामान वापस दिलाने के आरोपों पर भी जवाबदेही तय होगी?
जगराओं के लोग अब सिर्फ अतिक्रमण हटाने के दावे नहीं, बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई का परिणाम देखना चाहते हैं। क्योंकि कानून की ताकत तभी साबित होती है, जब वह आम आदमी और कुर्सी पर बैठे प्रभावशाली व्यक्ति दोनों के लिए एक समान हो। कथित तौर पर दुकान के आगे किए गए अवैध कब्जे के मामले में जब नगर कौंसिल प्रधान कंवरपाल सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए बार-बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
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