23 साल तक वाइल्डफ्लावर हॉल से क्यों नहीं हुई कमाई, अब हर साल मिलेंगे 37 करोड़ रुपये? क्या है CM सुक्खू का दावा?
संपत्ति विवाद में कानूनी जीत के बाद सरकार को 401 करोड़ रुपये मिलने का दावा, ई-नीलामी से सालाना आय का रास्ता खुला; मुख्यमंत्री बोले- जनता के पैसे का इस्तेमाल जनहित में होगा
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 01 नवंबर 2026 : हिमाचल प्रदेश की एक बेशकीमती संपत्ति से 23 साल तक सरकार को कोई राजस्व नहीं मिला। अब इसी संपत्ति से हर साल करीब 37 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। शिमला स्थित वाइल्डफ्लावर हॉल को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में प्रदेश सरकार की कानूनी जीत के बाद अब इस संपत्ति से नियमित आय का रास्ता खुलने का दावा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मुताबिक, इस मामले में राज्य सरकार को 401 करोड़ रुपये की धनराशि भी प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को शिमला में कहा कि वाइल्डफ्लावर हॉल का मामला वर्ष 2003 से लंबित था। प्रदेश सरकार ने प्रभावी कानूनी पैरवी कर इस मामले में जीत हासिल की। इसके बाद सरकार को 401 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि अब ई-नीलामी के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 37 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।
इस घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा किया है कि आखिर इतने वर्षों तक प्रदेश की इस संपत्ति से सरकार को राजस्व क्यों नहीं मिला और अब इससे होने वाली कमाई का प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर कितना असर पड़ेगा?
23 साल की निष्क्रियता के बाद अब आय का जरिया
वाइल्डफ्लावर हॉल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 23 वर्षों में इस संपत्ति से प्रदेश को कोई राजस्व प्राप्त नहीं हुआ था। अब सरकार को इससे सालाना करीब 37 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि इस संपत्ति से होने वाली आय का उपयोग जनहित के कार्यों पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह धनराशि जनता की है और इसे जनता के हित में ही खर्च किया जाएगा।
लंबे समय से लंबित इस मामले में कानूनी सफलता को मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली और स्पष्ट नीयत का प्रमाण बताया। हालांकि, सालाना राजस्व से प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों का कितना समाधान होगा, यह आने वाले समय में खर्च और आय के वास्तविक आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
37 करोड़ की कमाई, लेकिन वित्तीय संकट कितना बड़ा?
वाइल्डफ्लावर हॉल से सालाना करीब 37 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश सरकार वित्तीय संसाधनों की कमी का मुद्दा उठा रही है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
उनके मुताबिक, आरडीजी बंद होने से प्रदेश को हर साल करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भाजपा नेताओं के नेतृत्व में भी केंद्र सरकार के समक्ष आरडीजी की बहाली का मुद्दा उठाने के लिए तैयार थे, लेकिन भाजपा नेता इसके लिए भी सहमत नहीं हुए।
यदि मुख्यमंत्री के बताए आंकड़ों को आधार मानें, तो वाइल्डफ्लावर हॉल से मिलने वाला 37 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व, आरडीजी बंद होने से बताए जा रहे नुकसान की तुलना में सीमित है। इसके बावजूद यह सरकार के लिए नियमित आय का एक अतिरिक्त स्रोत बनेगा।
ओपीएस की बहाली पर भी केंद्र से टकराव
मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के सम्मान और उनके सामाजिक एवं आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह फैसला लिया।
उन्होंने दावा किया कि ओपीएस की बहाली के बाद केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली लगभग 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बंद कर दी।
राज्य सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा और प्रदेश की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाते हुए सरकार को अपने संसाधन बढ़ाने होंगे। ऐसे में सरकारी संपत्तियों से राजस्व जुटाने और आय के नए स्रोत तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।
चिट्टे के खिलाफ सख्ती का भी किया दावा
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नशे की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने चिट्टे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की है। बार-बार नशा तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम लागू किया गया है।
सरकार की ओर से हिमाचल को चिट्टामुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए वॉकाथॉन सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं भी इन कार्यक्रमों में भाग लेकर युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अब आय के इस्तेमाल पर रहेगी नजर
वाइल्डफ्लावर हॉल से जुड़ा मामला अब प्रदेश की आर्थिक बहस का अहम हिस्सा बन सकता है। एक तरफ सरकार इसे कानूनी सफलता और राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ असली कसौटी यह होगी कि इस संपत्ति से आय किस तरह और कितनी नियमितता से प्राप्त होती है।
सालाना 37 करोड़ रुपये के अनुमानित राजस्व के बीच यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ई-नीलामी की शर्तें क्या हैं, आय का वास्तविक आंकड़ा कितना रहता है और इससे मिलने वाली धनराशि किन जनहित योजनाओं पर खर्च की जाती है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रदेशवासियों के सामूहिक सहयोग और सरकार के प्रयासों से हिमाचल को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर तथा नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। (SBP)
- Download Babushahi Hindi App
-
-
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →