CGC लांडरां के सीबीएसए ने पांच दिवसीय एफडीपी का आयोजन किया
लांडरां
सीजीसी लांडरां के चंडीगढ़ बिजनेस स्कूल ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (सीबीएसए) ने 'फ्यूचर सेंट्रिक एजुकेटर्स एआई इंटीग्रेशन इन रिसर्च' टॉपिक पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मैनेजमेंट, कॉमर्स तथा संबद्ध विषयों के फैकल्टी मेंबर्स ने भाग लिया और सीखने, सहयोग तथा व्यावसायिक विकास का समृद्ध अनुभव प्राप्त किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रिसर्च और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डालना था। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को एआई इनेबल्ड रिसर्च टूल्स, एडवांस्ड एनालिटिकल टेक्नीएक्स, डिजिटल दक्षताओं तथा इन्नोवेटिव टीचिंग प्रैक्टिस की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, ताकि वे उच्च शिक्षा की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। डॉ. रमनदीप सैनी, डायरेक्टर-प्रिंसिपल, सीबीएसए, सीजीसी लांडरां और विभागाध्यक्षों ने विशिष्ट विशेषज्ञों तथा भाग लेने वाले संकाय सदस्यों का हार्दिक स्वागत किया।
एफडीपी के दौरान प्रतिष्ठित अकडेमिशिएंस और प्रोफेशनल्स द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज, फतेहगढ़ साहिब के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जतिंदर सिंह ने प्रतिभागियों को शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की परिवर्तनकारी क्षमता से परिचित कराया। उन्होंने एआई असिस्टेड रिसर्च प्लानिंग, लिटरेचर एक्सप्लोरेशन, अकादमिक लेखन तथा एआई के नैतिक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सतिंदर कुमार ने स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग (एसईएम) पर हैंड्स ऑन सेशंस आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने मॉडल के विकास, विश्लेषण, व्याख्या तथा शोध कार्यों में इसके प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
इस प्रोग्राम को और अधिक समृद्ध बनाते हुए पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर-11, चंडीगढ़ के प्रोफेशनल स्टडीज़ विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. करुणा बब्बर ने एआई-सहायित अकादमिक लेखन, शोध पत्रों के प्रकाशन की रणनीतियों, संदर्भ एवं उद्धरण प्रबंधन के डिजिटल उपकरणों, शोध नैतिकता तथा अकादमिक ईमानदारी पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। वहीं, डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितेश गोयल ने टैक्सेशन और अकाउंटिंग के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने फिनटेक 5.0 तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की भूमिका पर भी चर्चा की और बताया कि ये तकनीकें किस प्रकार जनेस एजुकेशन के भविष्य को आकार दे रही हैं।
प्रोग्राम के समापन सत्रों में साइकोवेव्स साइकोलॉजिकल सर्विसेज के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. तरलोचन सिंह ने शिक्षकों के बीच ग्रोथ माइंडसेट अपनाने और भविष्य के लिए तैयार रहने वाले दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। वहीं, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हर्ष वर्धन ने टेक्नोलॉजी-एनेबल्ड लर्निंग तथा नवीन शिक्षण रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने वाले तथा बेहतर शिक्षण परिणाम देने वाले कक्षाओं का निर्माण किया जा सकता है।
इस पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का समापन सफलतापूर्वक एक भव्य समापन समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित एक्सपर्ट्स को सम्मानित किया गया तथा सतत् सीखने और व्यावसायिक विकास के प्रति फैकल्टी मेंबर्स की सक्रिय भागीदारी एवं प्रतिबद्धता की सराहना की गई।
इस पहल ने रिसर्च और इन्नोवेशन को बढ़ावा देने तथा शिक्षकों को टेक्नोलॉजी ड्रिवेन अकादमिक इकोसिस्टम के अनुरूप ज़रूरी स्किल्स से सशक्त बनाने के प्रति संस्थान की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।