CCT, CGC लांडरां द्वारा वेयरहाउसिंग एवं सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया
लांडरां-
सीसीटी, सीजीसी लांडरां के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट ने चौधरी चरण सिंह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चर मार्केटिंग (सीसीएस एनआईएएम), जयपुर के सहयोग से, भारत सरकार की वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा स्पॉन्सर्ड वेयरहाउसिंग विकास एवं विनियमन विषय पर एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। मोहाली के 53 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और खास वेयरहाउसिंग, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर तथा वैल्यू एडिशन इन फार्मिंग जैसे विषयों पर चर्चा की। डॉ. गुरप्रीत गौर, एचओडी, बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, सीसीटी, सीजीसी लांडरां ने प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा एग्रीकल्चर इन्नोवेशन और रूरल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने में किसान-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के महत्व पर बल दिया। इस कार्यक्रम के गेस्ट ऑफ़ ऑनर डॉ. राहुल संखला, कंसलटेंट, सीसीएस एनआईएएम, जयपुर ने वेयरहाउसिंग विकास एवं विनियमन विषय पर मुख्य तकनीकी सत्र का संचालन किया। अपने सत्र में उन्होंने फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में साइंटिफिक वेयरहाउसिंग की भूमिका, डब्ल्यूडीआरए मान्यता, वेयरहाउस रिसीट फाइनेंसिंग तथा किसानों के लिए बेहतर स्टोरेज एवं मार्केटिंग अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला। कुदरत फार्म्स के श्री धर्मेंद्र ने आर्गेनिक फार्मिंग पर एक सत्र का संचालन किया, जिसमें उन्होंने आर्गेनिक कल्टीवेशन प्रैक्टिसेज, साइल फर्टिलिटी को बढ़ाने, प्राकृतिक खेती के इनपुट्स तथा टिकाऊ फसल उत्पादन विधियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी साझा की। सीजीसी की पूर्व छात्रा एवं माइक्रोमेज़िंग की फाउंडर, दीपांशी ने, एग्रीकल्चर वेस्ट मैनेजमेंट पर एक सत्र आयोजित किया, जिसमें उन्होंने एग्रीकल्चर अवशेषों को वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स में बदलने तथा एनवायरनमेंट के अनुकूल फार्म वेस्ट मैनेजमेंट के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया। इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. पालकी साहिब कौर, डायरेक्टर - प्रिंसिपल, सीसीटी, सीजीसी लांडरां ने कहा, “हमारा उद्देश्य किसानों को ज्ञान और इन्नोवेशन के माध्यम से सशक्त बनाना है। एक्सपर्ट्स, रिसर्चर्स और एंटरप्रेंयूर्स से उन्हें जोड़कर हम रूरल कम्युनिटीज को मजबूत करना और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर प्रक्टिसेज़ को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिलेगा।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयास सीजीसी लांडरां की इन्नोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, क्योंकि ये किसानों, इंडस्ट्री प्रैक्टिशनर्स, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवा नवप्रवर्तकों को एक ही मंच पर लाकर संवाद स्थापित करते हैं।
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