SGPC ने बड़ी कार्रवाई की: एडिशनल हेड ग्रंथी की सर्विस खत्म, चावला का इस्तीफा मंजूर; 4 मेंबर की कमेटी बनाई गई
हरजिंदर सिंह धामी का बड़ा बयान: "मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद, 15 दिन में कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सच सामने आएगा"
मामले की गंभीरता को देखते हुए SGPC ने जांच कमेटी बनाई; पुलिस से निष्पक्ष जांच करने की अपील की
श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के बाद SGPC ने तुरंत कार्रवाई की, धार्मिक मर्यादा और न्याय को प्राथमिकता देने का दावा किया
अमृतसर, 22 सितंबर, 2026- कथित रेप केस में फंसे SGPC मेंबर अमरजीत सिंह चावला के मामले में, SGPC प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस चल रहे गंभीर विवाद और आरोपों में बड़ी डिपार्टमेंटल कार्रवाई की है और कई अहम फैसले सुनाए हैं। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा की गई कार्रवाई और दिए गए आदेशों को ध्यान में रखते हुए, शिरोमणि कमेटी ने एडिशनल हेड ग्रंथी मलकीत सिंह को तुरंत प्रभाव से रिटायर (सेवाएं खत्म) कर दिया है। इसके साथ ही शिरोमणि कमेटी के सदस्य अमरजीत सिंह चावला का वीडियो मैसेज के ज़रिए भेजा गया इस्तीफ़ा भी मंज़ूर कर लिया गया है।
एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि इस मामले की शुरुआती जांच के लिए सबसे पहले सेक्रेटरी बलविंदर सिंह कलमा को ड्यूटी सौंपी गई थी। अब इस मामले को और गंभीरता से लेते हुए एक हाई-लेवल 4 सदस्यों वाली कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में शिरोमणि कमेटी के सदस्य सरदार बलदेव सिंह कायमपुरी, सरदार गुरमीत सिंह बूह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाल और सरदार गुरबख्श सिंह खालसा को शामिल किया गया है। सेक्रेटरी बलविंदर सिंह कलमा इस कमेटी के कोऑर्डिनेटर होंगे।
प्रेसिडेंट धामी ने साफ़ किया कि यह कमेटी अगले 15 दिनों में अपनी पूरी जांच रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने के बाद मीडिया और संगत के हर सवाल का डिटेल और सही जवाब देने के लिए एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। प्रेस से बात करते हुए SGPC प्रेसिडेंट ने शुरू से ही अपने ऊपर लगाए जा रहे इल्ज़ामों और सवालों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि महिला (बीबी) को कौन लाया, वह कहां से आई या किसके साथ आई, और न ही उनका इससे कोई लेना-देना है। उन्होंने कहा, "अगर कोई मेरे पास आकर ऐसी किसी भी बात या धमकाने की शिकायत करता, तो हरजिंदर सिंह धामी ऐसे इंसान नहीं हैं जो चुपचाप सह लें।" उन्होंने संगत को भरोसा दिलाया कि इस मामले पर किसी भी तरह का पर्दा नहीं डाला जाएगा।
मामले की सेंसिटिविटी बताते हुए एडवोकेट धामी ने कहा कि यह मामला सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर गुरमत, धार्मिक नैतिकता और समाज से जुड़ा है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि सच सामने आए ताकि किसी भी पार्टी के साथ कोई नाइंसाफी न हो। उन्होंने पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन से भी अपील की कि इस मामले में पुलिस जो जांच कर रही है, वह पूरी तरह से निष्पक्ष होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता या चालान पेश नहीं हो जाता, तब तक हर पार्टी अपना पक्ष रखेगी, लेकिन हमारी मुख्य कोशिश कानून और धार्मिक नियमों के मुताबिक पूरा इंसाफ दिलाना है।
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