Himachal in Union Budget : कुछ घंटों का इंतजार, फिर होंगे बड़े ऐलान-जनता की निगाह आम बजट पर, इस बार बजट से जानिए क्या है हिमाचल को आस
दिल्ली पर टिकी देश की निगाहें,
आज पेश होगा देश का आम बजट, महंगाई के बीच सरकार का इम्तिहान
किसानों से लेकर युवाओं को बजट से उम्मीद, क्या हिमाचल को मिलेगा हक या बढ़ेगा इंतजार
शशिभूषण पुरोहित
शिमला, 01 फरवरी 2026 :
हिमाचल प्रदेश समेत देश की निगाहें इस वक्त दिल्ली पर टिकी हैं, क्योंकि कुछ ही घंटों बाद पेश होने जा रहा है देश का आम बजट.. अगर वर्तमान हालात की बात करें तो महंगाई ने रसोई से लेकर सोने चांदी और यहां तक कि स्कूल की फीस तक आम इंसान की कमर तोड़ दी है। ऐसे में यह बजट सरकार के लिए सिर्फ़ आर्थिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का इम्तिहान है। आज खास खबर में बात करते हैं आखिर जनता को क्या उम्मीद बजट से है।
सबसे पहले बढ़ती मंहगाई पर अंकुश लगना जरूरी है, पेट्रोल-डीज़ल के दाम, रसोई गैस, दाल-सब्ज़ी—हर चीज़ आम आदमी की पहुँच से दूर होती जा रही है। जनता को उम्मीद है कि इस बजट में महंगाई से कुछ राहत दी जाएगी। इस वक्त आम जनता के लिए सबसे बड़ी टेंशन ये भी है कि शादी विवाह का सीजन शुरू होने जा रहा है और पिछले कुछ समय में देश भर में सोने के दामों में जबरदस्त उछाल आया है।
पिछले साल 2025 से अब तक सोना करीब 75% और चांदी 167% तक महंगी हो चुकी है। हालांकि बजट से एक दिन पहले सोने चांदी के दामों में हल्की गिरावट जरूर देखने कों मिली है, लेकिन यह आम लोगों की पहुंच से अभी भी बाहर है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार इन बढ़ते दामों से जनता को राहत देने के लिए कदम उठा सकती है। अभी सोने पर 6% इंपोर्ट ड्यूटी और 3% GST लगता है। यानी कुल टैक्स 9% तक होता है। खबर है कि इस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सोना और चांदी दोनों सस्ते हो सकते हैं। अनुमान है कि 10 ग्राम सोना करीब 3 हजार और 1 किलो चांदी करीब 6 हजार रुपए तक सस्ती हो सकती है।
बढ़ती मंहगाई के बीच कहां क्या सस्ता सरकार करती है, क्या महंगा होता है। इस पर अब निगाह टिकी हुई है। इसके अलावा अगर बात करें तो मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा इंतजार इनकम टैक्स से जुड़े फैसलों को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस बार सरकार टैक्स स्लैब में राहत देगी, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ेगा और नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार टैक्स में राहत के साथ-साथ खपत बढ़ाने वाले कदम उठाती है, तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं दूसरी ओर हेल्थकेयर सेक्टर में सरकारी खर्च बढ़ाने, डिफेंस में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार देने की उम्मीद की जा रही है…अन्नदाता यानी किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की राशि बढ़ाने और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी में बढ़ोतरी की चर्चा है.. देश का अन्नदाता अब भी मौसम, लागत और बाज़ार—तीनों से जूझ रहा है।
किसानों को उम्मीद है कि: MSP को और मजबूती मिले खाद, बीज और डीज़ल सस्ते हों`। सिंचाई और फसल बीमा को और मज़बूत किया जाए। दूसरी ओर आज का युवा सिर्फ़ सपना नहीं देखता, मेहनत भी करता है, लेकिन रोज़गार की राह अब भी कठिन है। बजट से अपेक्षा है कि: नए रोज़गार सृजन की ठोस योजना आए, स्टार्टअप और MSME को बढ़ावा मिले। स्किल डेवलपमेंट को ज़मीनी स्तर पर मजबूत किया जाए।
अब देखना यह है कि यह बजट आम आदमी की जेब हल्की करता है। उसकी उम्मीदों को भारी बनाता है। इसके अलावा अगर हम बात हिमाचल की करें तो हिमाचल के लोगों को भी बजट से काफी उम्मीद हैं। बीते दिनों हिमाचल के सीएम भी दिल्ली गए थे, जहां उन्होनें केंद्रीय वित्त मंत्री से भी मुलाकात की थी, इस दौरान उन्होंने हिमाचल की ओर से चार मुख्य मुद्दे उठाए थे, जो कि काफी अहम हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल के राजस्व घाटा अनुदान को कम से कम 10,000 करोड़ प्रति वर्ष तय किया जाए, ताकि राज्य की वित्तीय चुनौतियों से निपटा जा सके। राजस्व घाटा अनुदान वह राशि होती है, जो केंद्र राज्य के राजस्व खर्च और प्राप्ति के बीच के अंतर को पूरा करती है।
वहीं सीएम सुक्खू ग्रीन फंड की भी मांग की है जाहिर है हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों को पर्यावरण संरक्षण, जंगल, पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इसलिए पहाड़ी राज्यों के लिए वार्षिक 50,000 करोड़ का ग्रीन फंड बनाए जाने की मांग सीएम की और से की गई है ताकि पर्यावरण मित्र और हरित पहाड़ी विकास कामों को वित्तीय सहायता मिल सके। इसके अलावा जो अगला मुद्दा सीएम ने उठाया है वो भी काफी अहम हैं। डिज़ास्टर रिस्क इंडेक्स को हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए अलग बनाया जाना चाहिए और बजट में उसके लिए विशेष संसाधन दिए जाने चाहिए। वर्तमान में इसमें सुनामी, भूकंप में ज्यादा लाभ है, बाढ़ का कम। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सीएम ने अनुरोध किया है कि सकल घरेलू उत्पाद का अतिरिक्त दो फीसदी तक उधार लेने की अनुमति दी जाए, जिससे विकास परियोजनाएं और बुनियादी ढांचे के काम तेजी से हो सकें। यह लिमिट एफआरबीएम एक्ट के कारण तय हुई है, जिसका पालन राज्यों को करना होता है। आपदा में नुकसान से लोन कम पड़ रहा है। खैर देखना होगा कि हिमाचल को क्या मिलता है क्या नहीं और उसके साथ ही देश को भी कितनी राहत मिलती है इस पर भी निगाहें टिकी रहेंगी। (SBP)
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