Himachal Pradesh: हिमाचल में फल-सब्जियों के कारोबार पर लगेगी अब एक फीसदी मार्केट फीस, जानें पूरा मामला
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 20 फरवरी 2026 : आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी फल और सब्जियों के कारोबार पर एक प्रतिशत मार्केट फीस फिर से लागू कर दी है। राज्य सरकार ने 14 जनवरी, 2014 की अधिसूचना को रद्द करते हुए यह निर्णय लिया है।
दूसरे राज्यों से सब्जी-फल लाने वाले कारोबारियों को प्रवेश द्वार पर ही मार्केट फीस देनी होगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। इस व्यवस्था से प्रदेश में निजी मार्केट यार्ड वाले कारोबारियों के साथ मंडियों में काम करने वाले आढ़तियों को भी मार्केट फीस चुकानी होगी। सालाना एक करोड़ का कारोबार करने वाले आढ़तियों को एक लाख रुपये तक मार्केट फीस एपीएमसी को देनी होगी। मंडियों के भीतर होने वाले कारोबार के साथ-साथ सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी मंडियों से भी एक प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा।
इस फैसले से प्रदेश की कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को सालाना 40 से 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
वर्ष 2014 में सेब को छोड़ अन्य उत्पादों पर मार्केट फीस वसूली कर दी थी बंद
सरकार का कहना है कि इस राशि का उपयोग मंडियों के आधुनिकीकरण, ग्रामीण सड़कों के निर्माण व रखरखाव में किया जाएगा। नए फैसले से आढ़तियों और बाहरी राज्यों से आने वाले कारोबारियों पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से किसानों-बागवानों और ग्राहकों पर भी इसका भार पड़ेगा। बाहरी राज्यों से फल-सब्जियां लाने वालों को टोल बैरियर पर ही शुल्क जमा करना होगा।
कृषि विभाग के सचिव सी पालरासु ने बताया कि मार्केट फीस बहाल करने को लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं। वर्ष 2014 में तत्कालीन यूपीए-2 सरकार के समय महंगाई को देखते हुए कांग्रेस शासित राज्यों ने यह शुल्क हटा दिया था।
हिमाचल में भी 14 जनवरी 2014 को अधिसूचना जारी कर सेब को छोड़ अन्य सभी उत्पादों पर मार्केट फीस की वसूली बंद कर दी गई थी। अब प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर एंड हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2005 की धारा 64(2) के तहत पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। (SBP)
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