चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित छठे ग्लोबल एजुकेशन समिट में 30 देशों की 69 यूनिवर्सिटियों के एकेडमिक लीडर्स हुए शामिल
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी कर रही 6वें ग्लोबल एजुकेशन समिट की मेज़बानी; 30 देशों की 69 यूनिवर्सिटियों के एकेडमिक लीडर्स हुए शामिल
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के 6वें ग्लोबल एजुकेशन समिट में 30 देशों की 69 यूनिवर्सिटियों के एकेडमिक लीडर्स शामिल, सस्टेनेबल ग्लोबल विलेज के लिए एआई पर की चर्चा
‘AI सीमाओं को मिटाकर एक ऐसा ग्लोबल विलेज बना सकता है जहाँ साझा मौके सिर्फ़ कुछ लोगों तक नहीं, बल्कि अधिकाधिक लोगों को मिलें’: सेना लतीफ़, रोमानिया की राजदूत
'वैश्विक सहयोग ज़रूरी, कोई भी देश अकेले एआई के अवसरों और चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता': अल्बा स्मेरिग्लियो, यूके डिप्टी-हाई कमिश्नर
‘एआई क्रांति समानतापूर्ण, खुली और समावेशी हो, ताकि इसका लाभ ग्लोबल साउथ तक पहुंचे’: जुआन एंगुलो, चिली के राजदूत
चंडीगढ़: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा 6वें ग्लोबल एजुकेशन समिट (जीईएस) आयोजन किया गया जिसमें 30 देशों की 69 प्रतिष्ठित ग्लोबल यूनिवर्सिटियों के 90 से अधिक प्रमुख अकादमिक लीडर्स एक मंच से जुड़े। समिट का उद्देश्य विचारों, ज्ञान और टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान के लिए एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग तैयार करना, संयुक्त शोध को बढ़ावा देना तथा दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज और अकादमिक नेताओं के साथ अधिक जुड़ाव के माध्यम से विद्यार्थियों के ग्लोबल एक्सपोज़र और सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। 5 से 9 अक्टूबर तक आयोजित इस पांचदिवसीय समिट में विकसित और विकासशील देशों के राजदूत और राजनयिक प्रतिनिधि, चांसलर, रेक्टर, वाइस-चांसलर, प्रेसिडेंट, प्रो-वाइस चांसलर, प्रतिष्ठित शिक्षाविद, नीति-निर्माता, थिंक टैंक और ग्लोबल एजुकेशन एक्सपर्ट्स शामिल हुए।
'एक टिकाऊ ग्लोबल विलेज बनाने के लिए एआई -आधारित रिसर्च और इनोवेशन में सहयोग' थीम पर आयोजित जीईएस 2026 एआई -आधारित रिसर्च और इनोवेशन पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य संस्थानों के लिए संयुक्त रिसर्च, ज्ञान और टेक्नोलॉजी साझा करने और उभरती अकादमिक, तकनीकी, सामाजिक और ग्लोबल चुनौतियों का समाधान करने के अवसर पैदा करना है। समिट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि दुनिया भर की यूनिवर्सिटियाँ मिलकर सुनिश्चित कर सकती हैं कि तकनीकी प्रगति ज़िम्मेदार, समावेशी और टिसस्टेनेबल विकास के अनुरूप हो।
समिट के उद्घाटन समारोह में भारत में रोमानिया की राजदूत सेना लतीफ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। वहीं भारत में यूके दूतावास की डिप्टी हाई कमिश्नर अल्बा स्मेरिग्लियो और स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ सलामांका की वाइस चांसलर फॉर कल्चर, हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी प्रो. (डॉ.) मटिल्डे मारिया ओलार्टे मार्टिनेज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में निकारागुआ की राजदूत नादेस्का इमारा कथबर्ट, बोलीविया की की राजदूत एवं चार्जे डी'अफेयर्स अरलेट गैब्रिएला बुस्टामांटे गार्सिया, जमैका के राजदूत जेसन के.एम. हॉल, गुयाना के राजदूत धर्मकुमार सीराज, तिमोर-लेस्ते के राजदूत कार्लिटो नून्स, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के राजदूत चंद्रनाथ सिंह, पनामा के राजदूत अलोंसो कोर्रिया मिगुएल और चिली के राजदूत जुआन अंगुलो सहित कई वरिष्ठ राजनयिक भी वशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इनके अलावा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो-चांसलर दमनदीप कौर संधू और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर के सलाहकार प्रो. (डॉ.) आरएस बावा समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
भारत में रोमानिया की राजदूत सेना लतीफ ने कहा, “तकनीकी प्रगति ने दुनिया को एक ग्लोबल विलेज में बदल दिया है और एआई इस बदलाव को तेज कर रहा है। आज दुनिया भर के रिसर्चर एक ही तरह के टूल्स का इस्तेमाल कर लगभग रियल टाइम में विचार साझा कर काम कर सकते हैं। यह डेटा का विश्लेषण करने, अलग संदर्भों में मॉडल को टेस्ट करने और एक-दूसरे के नतीजों के आधार पर आगे बढ़ने में मदद करता है। इसकी क्षमता शिक्षा और रिसर्च से कहीं है जैसे जलवायु के पैटर्न को समझना, पानी और ऊर्जा संसाधनों का प्रबंधन, कृषि सुधार और दूर-दराज़ समुदायों तक हेल्थकेयर पहुँचाना हैं। ये चुनौतियां का समाधान वैश्विक होना चाहिए।"लतीफ़ ने आगे कहा, “वास्तविक ग्लोबल विलेज केवल जुड़ी हुई दुनिया नहीं, बल्कि ऐसी दुनिया है जहां साझा अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहकर अधिकाधिक लोगों तक पहुंचें। शिक्षा को इंडस्ट्री और जलवायु को खेती से अलग नहीं किया जा सकता। एआई ट्रेनिंग पर ध्यान देते हुए रोमानियाई छात्रों के लिए आईटीईसी स्कॉलरशिप स्कॉलरशिप दोगुनी करने भारत का फ़ैसला उसकी लीडरशिप और बढ़ती ग्लोबल भूमिका को दर्शाता है।”
भारत में यूके की डिप्टी हाई कमिश्नर अल्बा स्मेरिग्लियो ने कहा कि एआई यूनिवर्सिटियों में रिसर्च, छात्रों के सीखने और उद्योग के इनोवेशन के तरीके बदल रहा है। चुनौती केवल इसे तेजी से अपनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी, समावेशिता, सतत विकास और साझा समृद्धि के लिए हो। कोई भी देश अकेले इन अवसरों और चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता है, प्रगति सरकारों, यूनिवर्सिटियों ,रिसर्चरों और इंडस्ट्री साझेदारी ज़रूरी। वे न केवल भविष्य की टेक्नोलॉजी का विकास कर रहे हैं बल्कि उन भावी लीडर्स को भी तैयार कर रहे हैं जो तय करेंगे कि उन प्रौद्योगिकियों का उपयोग कैसे किया जाए। यूके-भारत साझेदारी भारत-यूके विजन 2035 के मुख्य स्तंभ के रूप में शिक्षा, अनुसंधान और कौशल के साथ इस सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। यूके और भारतीय यूनिवर्सिटियों के बीच बढ़ते अनुसंधान और इनोवेशन और विस्तारित साझेदारी एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, टिकाऊ क्षेत्र में अवसर पैदा कर रहे हैं। भविष्य केवल एआई द्वारा निर्धारित नहीं किया जाएगा, बल्कि सरकारों, व्यवसायों, विश्वविद्यालयों और समाजों द्वारा विकसित और लागू करने के तरीकों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। हमें शिक्षा जगत और उद्योग के बीच मजबूत संबंधों और तकनीकी कौशल का जिम्मेदारी से उपयोग करने के मूल्यों और निर्णय दोनों से लैस युवाओं की आवश्यकता है।''
भारत में चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौती को समानता, पहुंच, पारदर्शिता और नैतिकता के साथ साझा वैश्विक मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एआई टूल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा और कंप्यूटिंग क्षमता तक समान पहुंच हो तथा क्षमता निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए इसका लाभ कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित न रहे। एआई सिस्टम को सबको साथ लेकर चलने वाले, ट्रेस करने और मानवाधिकारों व सम्मान करने वाले तरीके से विकसित किया जाना चाहिए। शिक्षा में एआई -आधारित इनोवेशन सबको साथ लेकर चलने वाला, ज़िम्मेदार और दुनिया भर के समाजों के लिए लाभदायक हो यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग ज़रूरी है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी शिक्षा में इनोवेशन और सार्थक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं के लिए मार्गदर्शन में मदद कर रही है।”
स्पेन के सलामांका यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मटिल्डे मारिया ओलार्ट मार्टिनेज ने कहा, "एआई केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं है, बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक निर्णय लेने की एक सीमा है, जिसे नैतिकता और सामान्य भलाई द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। इनोवेशन को संस्कृतियों, विविधता और स्थानीय पहचान का सम्मान करना चाहिए, जबकि एआई सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने, असमानताओं को कम करने और स्थिरता को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। प्रौद्योगिकी अकेले परिवर्तन नहीं ला सकती है। वैश्विक न्याय सुनिश्चित करने वाली मानवीय गरिमा पर आधारित एक अधिक सस्टेनेबल, समावेशी और न्यायपूर्ण ग्लोबल विलेज बनाने में मदद कर सकती है।
समिट के तहत ईस्टर्न मेनोनाइट यूनिवर्सिटी (ईएमयू), यूएसए का 13 सदस्यीय समूह भी शामिल है, जिसमें 11 छात्र और दो फैकल्टी सदस्य 6 से 7 अक्टूबर तक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का दौरा कर रहे है।इस दौरे से दोनों यूनिवर्सिटियों के छात्रों और फैकल्टी को आपसी बातचीत, विचार साझा करने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का मौका मिलेगा।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर दीपइंदर सिंह संधू ने कहा,"ग्लोबल एजुकेशन समिट विकसित और विकासशील के प्रसिद्ध शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, थिंक टैंक और वैश्विक शिक्षा विशेषज्ञों को एक साथ लाकर विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में अकादमिक सहयोग, ज्ञान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, शैक्षणिक गतिशीलता और संयुक्त अनुसंधान की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। भारत अकादमिक सहयोग, ज्ञान विनिमय, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, शैक्षणिक गतिशीलता और संयुक्त रिसर्च के लिए अधिक अवसर पैदा करने के लिए दोनों के बीच एक अकादमिक कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है। छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटियों एवं प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ 540 से अधिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (सीयू) नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) दिशानिर्देशों के अनुरूप अंतर्राष्ट्रीय सहयोग हासिल करने वाली भारत की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है।
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