अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी द्वारा पंजाबी-अंग्रेज़ी डिक्शनरी एंड्रॉयड ऐप लॉन्च
पटियाला, 21 फरवरी 2026: पंजाबी भाषा के डिजिटल उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Punjabi University, Patiala ने आज आधिकारिक रूप से पंजाबी-अंग्रेज़ी डिक्शनरी एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च की। यह लॉन्च अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर किया गया, जो मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दर्शाता है।
यह ऐप विश्वविद्यालय के रिसर्च सेंटर फॉर टेक्निकल डेवलपमेंट ऑफ पंजाबी लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर द्वारा विकसित की गई है।
ऐप का उद्घाटन करते हुए वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना “समय की आवश्यकता” है। उन्होंने कहा, “यह ऐप पंजाबी को वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाने के हमारे मिशन की दिशा में एक अहम कदम है। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, लेखकों और विदेशों में बसे पंजाबी प्रवासियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।”
यह डिजिटल डिक्शनरी वर्ष 2002 में विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ लेक्सिकोग्राफी द्वारा प्रकाशित पंजाबी-अंग्रेज़ी डिक्शनरी के संस्करण पर आधारित है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में 35,679 मूल शब्दों और 1,29,834 शब्द-रूपों वाला विस्तृत डाटाबेस शामिल है।
इसके अतिरिक्त, यह ऐप द्वि-लिपि समर्थन की अनूठी सुविधा प्रदान करती है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता गुरुमुखी और शाहमुखी दोनों लिपियों में शब्द खोज सकते हैं। प्रत्येक प्रविष्टि के लिए ऑडियो उच्चारण की सुविधा भी उपलब्ध है। लचीली खोज व्यवस्था के अंतर्गत व्यंजन-आधारित (फज़ी) सर्च की सुविधा दी गई है, जिससे उपयोगकर्ता विशेष स्वर चिह्नों के बिना भी शब्द खोज सकते हैं। इसके अलावा, रिवर्स लुकअप सुविधा के माध्यम से अंग्रेज़ी अर्थ दर्ज कर पंजाबी शब्द भी खोजे जा सकते हैं।
इस परियोजना की संकल्पना डॉ. गुरप्रीत सिंह लहल, संस्थापक निदेशक द्वारा की गई थी, जिन्होंने सबसे पहले विश्वविद्यालय की डिक्शनरी को डिजिटल रूप प्रदान किया। वर्तमान निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के नेतृत्व में इस ऐप को सफलतापूर्वक पूर्णता तक पहुंचाया गया।
डेवलपमेंट टीम में डॉ. हरविंदर पाल कौर (प्रमुख, भाषा विज्ञान एवं पंजाबी लेक्सिकोग्राफी विभाग), डॉ. तेजिंदर सिंह सैनी, डॉ. अंकुर राणा, रामनदीप कौर चहल, राकेश दवारा, डॉ. जसपाल सिंह और तनवीर अख्तर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस ऐप का शुभारंभ पंजाबी भाषा के तकनीकी विकास में एक नया मील का पत्थर सिद्ध होगा और डिजिटल युग में इसकी प्रासंगिकता तथा पहुंच को और सुदृढ़ करेगा।
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