नेपाल में लगातार हो रही बारिश से तबाही; 72 घंटों में कम से कम 14 लोगों की मौत
चितवन/म्याग्दी [नेपाल], 27 सितंबर (ANI): गुरुवार से हो रही लगातार बारिश के कारण पूरे नेपाल में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है। देश भर में जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन की खबरें हैं, जिसके चलते अलर्ट और चेतावनी जारी की गई है।
रविवार सुबह, मध्य नेपाल में नारायणी नदी का जलस्तर 9 मीटर की चेतावनी सीमा को पार कर रिहायशी इलाकों में घुस गया, जिसके बाद अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की। देश भर में यात्रा के लिए अहम केंद्र माने जाने वाले चितवन जाने वाले हाईवे भी बंद हैं और कई जगहों पर भूस्खलन की खबरें हैं।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, गुरुवार से शनिवार शाम तक बारिश से जुड़ी आपदाओं में कम से कम 6 लोगों की मौत हुई, जबकि रविवार सुबह म्याग्दी जिले में भूस्खलन की घटना में चार और लोगों की मौत हो गई।
विलेज काउंसिल के चेयरमैन भरत कुमार पुन ने फोन पर ANI को पुष्टि की, "अन्नपूर्णा विलेज काउंसिल में भूस्खलन से चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।"
अधिकारी के अनुसार, कई जगहों पर भूस्खलन के कारण खोज और बचाव अभियान में बाधा आ रही है, जबकि लगातार बारिश से हालात और खराब हो रहे हैं।
इसी तरह, पड़ोसी बाग्लुंग जिले में भी भूस्खलन से चार और लोगों की मौत हो गई; एक स्थानीय अधिकारी ने ANI को इसकी पुष्टि की।
विलेज काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन प्रेम बहादुर घर्ती मगर ने फोन पर ANI को बताया, "बाग्लुंग जिले की निशीखोला विलेज काउंसिल में भूस्खलन में दबने से चार लोगों की मौत हो गई। यह घटना आज सुबह वार्ड नंबर 3, हरद्रा में हुई।"
जिले से होकर बहने वाली कालीगंडकी नदी ने घरों और पुलों को भी बहा दिया है, जिससे सड़क संपर्क टूट गया है।
जलभराव और बाढ़ के खतरे को देखते हुए सुरक्षा बल कई जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है। हिमालयी देश में यह ताज़ा आपदा भोटेकोशी बाढ़ की त्रासदी के एक महीने बाद आई है, जिसमें अब तक 1400 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 6000 से ज़्यादा लोग लापता हैं।
26 अगस्त (भाद्र 10, 2083) की सुबह रासुवा ज़िले में नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ आई, जिससे नुवाकोट और धाडिंग समेत आस-पास के इलाके तेज़ी से प्रभावित हुए।
बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान इस घटना की गंभीरता को दिखाता है। आठ चालू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (281 MW) और चार निर्माणाधीन प्रोजेक्ट (388 MW) क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे 431.1 MW की बिजली उत्पादन क्षमता बाधित हुई।
गल्छी-बेट्रावती-रासुवागढ़ी सड़क और पृथ्वी हाईवे के बड़े हिस्से नष्ट या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, साथ ही 48 सस्पेंशन ब्रिज और 31 मोटर-योग्य पुल भी क्षतिग्रस्त हुए। (ANI)
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