नेपाल: हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में हिमस्खलन से 10 लोग लापता
काठमांडू [नेपाल], 27 सितंबर, 2026 (ANI): तिब्बत की सीमा से लगे पश्चिमी नेपाल में हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में हिमस्खलन के बाद कम से कम 10 लोग लापता हो गए हैं। अभियान आयोजकों ने रविवार को इसकी पुष्टि की।
अभियान आयोजक मिंगमा ग्याल्जे शेरपा ने पुष्टि की कि हिमस्खलन के बाद लापता लोगों में उनके किचन स्टाफ के दो सदस्य भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हिमस्खलन रविवार सुबह हुआ।"
शेरपा के अनुसार, पिछले सप्ताह मौसम की चेतावनी जारी होने के बाद अभियान टीमों और रस्सी लगाने वाली टीमों ने पहाड़ की ढलानों को खाली कर दिया था, जबकि कुछ लोग अनिच्छा से वहीं रुक गए थे।
पहाड़ी इलाके में कई दिनों तक भारी बर्फबारी हुई, जिससे पर्वतारोहियों को शरद ऋतु में पहाड़ पर चढ़ने का प्रयास छोड़कर वापस लौटना पड़ा। रविवार के हिमस्खलन में लापता हुए लोग अलग-अलग अभियान कंपनियों से हैं।
मनांग जिले में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल के लिए हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए अतिरिक्त परमिट की आवश्यकता होती है, जिससे पहाड़ तक पहुंचने में और कठिनाई होती है।
7,126 मीटर ऊंची यह चोटी अधिक ऊंचाई पर अनुभव चाहने वाले पर्वतारोहियों के लिए एक लोकप्रिय लक्ष्य है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम तंत्र के कारण पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और नेपाल की पहाड़ियों व मैदानी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। बारिश और बर्फबारी ने देश के कई हिस्सों को प्रभावित किया है।
नेपाल में शुक्रवार से ही खराब मौसम की स्थिति बनी हुई है, जिससे सड़कें बाधित हुई हैं और स्थानीय अधिकारियों को कई हिस्सों में यातायात बंद करना पड़ा है।
पर्यटन अधिकारियों ने ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों से मौसम की स्थिति खराब होने के कारण अपनी गतिविधियां रोकने का आग्रह किया है। पर्यटन विभाग ने भी एक अलर्ट जारी कर पर्यटन गतिविधियों को रोकने की सलाह दी है।
मौसम में यह व्यवधान पिछले महीने रासुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आया है, जिसमें 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे और 5,000 से अधिक लोग लापता हो गए थे। इस आपदा ने त्रिशूली नदी के किनारे बसी बस्तियों को बहा दिया और नेपाल के पर्यटन उद्योग को एक और झटका दिया।
लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण कई ट्रेकिंग मार्ग बाधित हो गए हैं और मनासलू तथा धौलागिरी पर बड़े अभियानों को रद्द या स्थगित करना पड़ा है। इससे पहले अगस्त में, पाकिस्तान की ब्रॉड पीक पर एक ज़बरदस्त बर्फीले तूफ़ान (एवलांच) की चपेट में आने के बाद, नेपाल के तीन सबसे बेहतरीन हाई-एल्टीट्यूड गाइड और पर्वतारोहियों के शव उनके शोक-संतप्त परिवारों तक पहुँचाए गए।
इन पर्वतारोहियों की पहचान किली पेम्बा शेरपा (जिन्हें 'किलु' के नाम से भी जाना जाता है), ग्यालु शेरपा और निमा शेरपा के तौर पर हुई है। ये तीनों दोहा से कतर एयरवेज की उड़ान से त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुँचे थे।
ये तीनों गाइड उन 10 पर्वतारोहियों में शामिल थे जिनकी मौत 30 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे बर्फीले तूफ़ान की चपेट में आने से हो गई थी। यह घटना तब हुई जब उनका ग्रुप पाकिस्तान की काराकोरम रेंज में मौजूद दुनिया की 12वीं सबसे ऊँची चोटी (8,051 मीटर) पर कैंप 2 और कैंप 3 के बीच चढ़ाई कर रहा था।
इस हादसे में 10 लोगों की पूरी इंटरनेशनल टीम की मौत हो गई। मरने वालों में ब्रिटिश-नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (जिन्हें 'निम्सदाई' भी कहा जाता है), पुर बहादुर गुरुंग, नवांग थिंडु शेरपा, ओमान की पर्वतारोही नाधिरा अल हारथी, चीन के पर्वतारोही वांग झोंग, पाकिस्तान के गाइड सोहेल सखी और अमेरिका की पर्वतारोही मैलोरी गीस शामिल थे। (ANI)
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