अमित शाह के शब्दों ने भारत को जागृत किया, सनातन धर्म भविष्य है अतीत नहीं: सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भुखड़ी कलां
नई दिल्ली, 16 जनवरी 2026:
राष्ट्रीय भाजपा नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भुखड़ी कलां ने जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी महाराज पर माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के गहन, भावपूर्ण, ईमानदार और दूरदर्शी विचारों के लिए तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के प्रति हार्दिक सराहना और गहरा सम्मान व्यक्त किया।
ग्रेवाल ने फेसबुक लिंक्डइन पिंटरेस्ट यूट्यूब इंस्टाग्राम थ्रेड्स और विशेष रूप से एक्स सहित अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर कहा कि श्री अमित शाह जी के शब्द केवल एक भाषण नहीं थे बल्कि भारत की शाश्वत सभ्यतागत चेतना की आत्मिक अभिव्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि माननीय गृह मंत्री ने अत्यंत सुंदरता से राष्ट्र को स्मरण कराया कि आदि शंकराचार्य जी ने केवल भारत की यात्रा नहीं की बल्कि भारत को जागृत किया। अत्यंत अल्प आयु में उन्होंने राष्ट्र की आध्यात्मिक आत्मा को एकीकृत किया सनातन धर्म को सुदृढ़ किया और देश की चारों दिशाओं में उसकी पावन ध्वजा को ऊंचा रखा।
ग्रेवाल ने बताया कि आदि शंकराचार्य ग्रंथावली के गुजराती संस्करण के लोकार्पण के उपरांत अपने संबोधन में माननीय गृह मंत्री ने गहरा विश्वास व्यक्त किया कि सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित तथा श्री गौतम पटेल द्वारा संपादित पंद्रह खंडों में संकलित अद्वैत वेदांत के महान आचार्य की समग्र रचनाएं गुजरात और पूरे राष्ट्र के युवाओं को जीवन में दिशा उद्देश्य और आंतरिक शक्ति खोजने के लिए प्रेरित करेंगी।
ग्रेवाल ने कहा कि गृह मंत्री का यह कथन कि आज भी समाज जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है उनके तार्किक और आध्यात्मिक समाधान इन कालातीत ग्रंथों में निहित हैं अत्यंत स्पर्शकारी और बौद्धिक रूप से प्रेरक है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य जी वास्तव में एक चलती फिरती विश्वविद्यालय थे जिन्होंने पैदल ही भारत की लंबाई और चौड़ाई नापी और चारों दिशाओं में चार महान मठों की स्थापना की जो ज्ञान आस्था अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के शाश्वत केंद्र बने।
ग्रेवाल ने कहा कि श्री अमित शाह जी ने सही रूप में रेखांकित किया कि ये मठ केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहे बल्कि वेदों के विभाजन संरक्षण प्रचार और सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाते हुए भारत की स्थायी बौद्धिक और आध्यात्मिक नींव बने जो आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रही है।
ग्रेवाल ने आगे कहा कि बौद्ध जैन कापालिक और तांत्रिक परंपराओं के साथ तीव्र दार्शनिक विमर्श के युग में आदि शंकराचार्य जी ने तर्क विवेक करुणा और स्पष्टता के साथ प्रत्येक प्रश्न का निर्भीक उत्तर दिया। माननीय गृह मंत्री के शब्दों में उन्होंने केवल विचार नहीं दिए बल्कि समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल ज्ञान नहीं दिया बल्कि उसे संरचना दी। उन्होंने केवल मोक्ष की बात नहीं की बल्कि उसे प्राप्त करने का जीवंत मार्ग भी दिखाया।
ग्रेवाल ने कहा कि ऐसी प्रबुद्ध नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक स्पष्टता भारत सरकार की सभ्यतागत गौरव आध्यात्मिक निरंतरता और बौद्धिक पुनर्जागरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पुस्तक लोकार्पण नहीं बल्कि भारत के युवाओं को उसकी शाश्वत बुद्धि और आध्यात्मिक विरासत से पुनः जोड़ने का एक राष्ट्रीय आंदोलन है।
ग्रेवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और श्री अमित शाह जी के सांस्कृतिक मार्गदर्शन में भारत आत्मविश्वास गरिमा और स्पष्टता के साथ अपनी सभ्यतागत आत्मा के सशक्त पुनरुत्थान का साक्षी बन रहा है।
उन्होंने श्री अमित शाह जी के प्रति गहरी कृतज्ञता सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र और विश्व को यह स्मरण कराया है कि सनातन धर्म अतीत की आस्था नहीं बल्कि भविष्य का मार्गदर्शक प्रकाश है।
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