चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय 11वें इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल-2026 का हुआ शानदार आगाज
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 33 देशों के कलाकारों ने अपने सांस्कृतिक डांस व कला की दी प्रस्तुति
इंटरनेशनल फेस्टिवल देशों को एक दूसरे के साथ हैं जोड़ते, सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वभौमिक भाईचारे को देते बढ़ावा: विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा
कला और संस्कृति भारत को पूरी दुनिया से जुड़ने और बढ़िया रिश्ते बनाने में निभाते हैं अहम भूमिका : चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर व सांसद (राज्य सभा) सतनाम सिंह संधू
मोहाली/चंडीगढ़-
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय 11वें इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल-2026 की धूम-धाम के साथ शुरुआत हो गई है। यह इंडियन काउंसल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के सहयोग से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में करवाए जा रहे फेस्टिवल का थीम ’एक दुनिया अनेक सांस्कृतियां’ पर आधारित है। इसमें 33 देशों के 350 से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। जोकि अपने देशों के डांस, संगीत व कला की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। यह समागम वैश्विक एकता और सांस्कृतिक विविधता का संदेश दे रहा है।
समारोह के पहले दिन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर और सांसद (राज्य सभा) सतनाम सिंह संधू के अलावा हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और इंडियन काउंसल फॉर कल्चरल रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल के नंदिनी सिंगला ने मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की। इस अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदाान प्रदान कार्यक्रम में दुनिया भर से प्रतिभा और रचनात्मकता देखने को मिल रही है।
इस मौके हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ.अरविंद शर्मा ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक समारोह हमारे लिए बहुत ही ज्यादा जरुरी हैं। क्योंकि इसके साथ हम दूसरे देशों के साथ अपनी संस्कृति का आदान प्रदान कर सकते हैं। यह स्टूडेंट्स के बौद्धिक विकास में भी अपनी अहम भूमिका अदा करतें है। ऐसे प्रोग्राम के साथ स्टूडेंट्स अपनी सांस्कृति के साथ जुड़ते हैं और उनके रीति रिवाज के बारे में जानते हैं। इसके साथ ही, भारत पूरी दुनिया में सांप्रदायिक सद्भावना और सार्वभौमिक एकता भावना पैदा होती है। यह ही हमें ग्लोबल नागरिक बनाती है। 11वां इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फैस्टिलव प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी के ’वसुधैव कुटुंबकम्’ के नारे में बिलकुल स्टीक बैठता है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।
इस मौके चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर व सांसद (राज्य सभा) सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पीएम मोदी के सराहनीय प्रयास के कारण आज भारत विदेशी सैलानियों के लिए ग्लोबल हब बन कर उभरा है। वर्ष 2014 के बाद हमारे देश में सैलानियों की आमद में भारी इजाफा हुआ है। यह ही नहीं अब विदेशी स्टूडेंट्स भारत को शिक्षा के हब के रुप में देखते हैं। इसकी सबसे बड़ी उदाहरण मौजूदा समय चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 65 देशों से पढ़ रहे 3000 विदेशी स्टूडेंट्स से मिलती है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी हमेशा इस बात पर यकीन रखती है कि भारत विश्व शक्ति बने और हमारे देश की तरक्की विकास में संस्कृति और कला से ज्यादा कुछ भी नहीं हो सकता है। कला ऐसी क्रिया है, जिसे सभी लोग समझते हैं। कला और संस्कृति भारत को पूरी दुनिया से जुड़ने और बढ़िया रिश्ते बनाने में अहम भूमिका अदा करते हैं। इसके कारण हमारे देश के अलग-अलग देशों के साथ अच्छे रिश्ते बन रहे है।
आईसीसीआर की डायरेक्टर नंदिनी सिंगला ने कहा कि आईसीसीआर दुनिया भर के स्टूडेंट्स को एक मंच प्रदान करता है। इसके कारण विदेशों के स्टूडेंट्स हमारे देश मे आकर कला और सास्कृतिक प्रस्तुति दे सकते हैं। इसके साथ ही, हमारे देश के स्टूडेंट्स दूसरे देशों में जाकर अपनी कला और संस्कृति की प्रस्तुति दे सकते हैं। मौजूदा समय हम देख सकते हैं कि भारतीय लोग संगीत और नृत्य की अलग-अलग प्रकार की किसमें दुनिया भर में मशहुर हैं, जिसमें कल्चरलच एंड यूथ अफेयर्स मंत्रालय का अहम योगदान है। आज अलग-अलग देशों से स्टूडेंट्स हमारे देश में हायर एजुकेशन प्राप्त करने के लिए आ रहे हैं। क्योंकि इसके पीछे भारत का महान इतिहास है। भारत में सदियों से कला और संस्कृति को बहुुत महत्व दिया जाता है और पूरी दुनिया को भारत की ओर यही सब आकर्षित कर रहा है।
फेस्टिवल के पहले दिन की पहली परफॉर्मेंस में, डॉ. एल. सुब्रमण्यम और कविता कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम द्वारा पेश किए गए 80 सदस्यों वाले लक्ष्मीनारायण ग्लोबल म्यूजिक फेस्टिवल ग्रुप ने स्टेज पर अस्ताना फिलहारमोनिक सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा, अक्टोबे रीजनल फिलहारमोनिक के चैंबर क्वायर और कजाकिस्तान के डांस ग्रुप श्गक्कूश् के साथ परफॉर्मेंस दी। गक्कू ग्रुप, जो अपनी तेज-तर्रार परफॉर्मेंस और पारंपरिक बैले स्टाइल के लिए जाना जाता है, ने अपने डांस के जरिए कजाकिस्तान का इतिहास, उसके घुड़सवारों की बहादुरी और विशाल खुले नजारों को दिखाया। दूसरी प्रस्तुति में ओश रीजनल फिलहारमोनिक के तहत किर्गिसतान के लोक-कथा दल आलम और नृत्य समूह अदेमी ने अपनी ऊर्जावान और पारंपरिक नृत्य शैलियों से किर्गिज संस्कृति की खूबसूरती को दर्शाया। तीसरी प्रस्तुति में मलेशिया की सूत्र फाउंडेशन के 17 मैंबरी टीम, राधे-राधे द स्वीट सरेंडर पर प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति भारतीय भक्ति परंपराओं से प्रेरित थी, जिसमें भगवान कृष्ण और राधा से जुड़े शाश्वत प्रेम और भक्ति का जश्न मनाया। इसके अलावा, पंजाब के पारंपरिक और लोक नृत्य लूडी से हुई, जिसमे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने प्रस्तुति दी। इसके अलावा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, सूडान, तंजानिया, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, लेसोथो, म्यांमार, यमन, श्रीलंका, अंगोला, मलावी, कैमरून, सीरिया, जिम्बाब्वे, दक्षिण सूडान, कांगो, थाईलैंड, युगांडा, माली, नामीबिया, केन्या, सोमालिया, घाना और मेडागास्कर के कलाकारों ने भी अपने शानदार परफॉर्मेंस से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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