NGT ने पंजाब में माइनिंग पर बैन लगाया!
बाबूशाही नेटवर्क
नई दिल्ली, 10 जून, 2026- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पंजाब में रेत माइनिंग को लेकर राज्य सरकार को एक और बड़ा झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब में 79 जगहों पर रेत माइनिंग पर तुरंत बैन लगा दिया है। NGT ने अपने आदेशों में यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि राज्य में डिसैलिनेशन (नदियों की सफाई) के नाम पर चल रही गैर-कानूनी कमर्शियल माइनिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ट्रिब्यूनल के मुताबिक, पंजाब सरकार एनवायरनमेंट क्लीयरेंस (EC), एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA), डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट और कम्पनसेशन स्टडी जैसी बहुत जरूरी और कानूनी शर्तों को पूरा किए बिना बड़े पैमाने पर कमर्शियल माइनिंग कर रही थी। NGT के मुताबिक, ये सभी गतिविधियां 'EIA नोटिफिकेशन 2006' और सेंट्रल सैंड माइनिंग गाइडलाइंस का सीधा और खुला उल्लंघन हैं।
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर 2025 के बीच जब पंजाब सरकार 'जिसका खेत उसकी रेत' स्कीम लाई थी, तब भी 2 अप्रैल 2026 को NGT ने 85 साइट्स से माइनिंग पर बैन लगा दिया था। उस समय कोर्ट ने इसे डिज़ास्टर मैनेजमेंट के नाम पर की जा रही कमर्शियल माइनिंग बताया था। अब सरकार ने पुराने ऑर्डर को बाइपास करने के लिए 'नो-कॉस्ट' मॉडल के तहत 79 नई साइट्स के लिए टेंडर जारी किए थे, जिसे ट्रिब्यूनल ने गैर-कानूनी मानते हुए फिर से बैन कर दिया है।
माइनिंग से हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना नियमों के हो रही इस खुदाई से पर्यावरण को ऐसा नुकसान हो रहा है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। इसके साथ ही नदियों के नेचुरल फ्लो से छेड़छाड़ की वजह से राज्य में बाढ़ का खतरा भी बढ़ रहा है।
आपको बता दें कि यह बड़ी पिटीशन पंजाब के एक वकील कुलजिंदर सिंह ने फाइल की थी, जिसका कोर्ट में नई दिल्ली की मशहूर वकील नताशा गर्ग ने जोरदार बचाव किया। इससे पहले, एडवोकेट नताशा गर्ग ने ग्राम पंचायत गलहरी (पंजाब) की ओर से ऐसी कई पिटीशन के ज़रिए पर्यावरण का सफलतापूर्वक बचाव किया था।
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