2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य “शांति” से होगा हासिल: अनुराग सिंह ठाकुर
भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा ज़रूरत पूर्ति में शांति विधेयक की भूमिका महत्वपूर्ण: अनुराग सिंह ठाकुर
5 जनवरी 2025, हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि साल 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने की क्षमता के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए संसद के दोनों सदनों में पास हुए “शांति विधेयक 2025” की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण रहने वाली है।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ वर्ष 2025 भारत के ऊर्जा इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज किया जाएगा, जहां देश ने न केवल अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत किया। भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। हम वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने की क्षमता करने के एक बड़े लक्ष्य “शांति” से हासिल होगा। साल 1962 के परमाणु ऊर्जा कानून को आज की तकनीक और जरूरतों के हिसाब से बनाने के लिए मोदी सरकार शांति विधेयक लेकर आई क्योंकि मौजूदा सिस्टम में सुरक्षा नियम पूरे चक्र में समान नहीं थे व नियामक संस्थाओं की शक्तियां सीमित थीं। शांति बिल 2025 निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोलता है और इससे भारत और विदेशी कंपनियां मिलकर नए परमाणु संयंत्र लगाएंगी और 2047 तक 100 गीगावॉट का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। यह भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती परमाणु ऊर्जा के नए युग में ले जाएगा। यह पहल केवल कानून नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने, युवाओं के लिए नए अवसर खोलने और विकसित भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है”
श्री अनुराग सिंह ठाकुर “ भारत की परमाणु ऊर्जा से संबंधित कानूनों में व्यापक सुधार करने और स्वतंत्रता के बाद पहली बार परमाणु विद्युत संयंत्रों के निर्माण व संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाने में “शांति” का अहम रोल रहने वाला है। भारत के बदलाव हेतु परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) विधेयक, 2025, भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा के अगले चरण को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण और संस्थागत निगरानी को मजबूत करके, यह अधिक कुशल, नवोन्मेषी और सुरक्षित परमाणु ऊर्जा इको-सिस्टम की नींव रखेगा। यह विधेयक स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के विस्तार के भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण का समर्थन करता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि रणनीतिक हित पूरी तरह से सुरक्षित रहें। जैसे-जैसे देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नति की ओर आगे बढ़ रहा है, यह कानून भारत की परमाणु ऊर्जा और व्यापक ऊर्जा परिदृश्य के विकास को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा”
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