श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होंगे सीएम मान, महाराजा रणजीत सिंह से लेकर राष्ट्रपति तक भुगत चुके हैं सज़ा
चंडीगढ़, 06 जनवरी,2026ः श्री अकाल तख्त ने पंजाब के CM भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने को कहा गया है। CM मान ने भी कहा कि वह एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश होंगे। आपको बता दें कि अगर वह खुद पर लगे आरोपों को साबित नहीं कर पाए तो उन्हे धार्मिक सज़ा भुगतनी होगी। और वह ऐसा करने वाले तीसरे सीएम होंगे। उनसे पहले दिवंगत सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल को भी सीएम रहते धार्मिक सज़ा भुगतनी पड़ी थी। बता दें कि आप सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सौंध सोमवार को ही नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश हुए।
महाराजा रणजीत सिंह को भी मिली थी सज़ा
यहीं नहीं इतिहास की बात करें तो महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त पर धार्मिक सजा भुगत चुके हैं। अकाल तख्त साहिब से उनको कोड़े मारने की सजा मिली थी। जिसे उन्होने कबूल किया था लेकिन उन्हे कोड़े मारे नहीं गए थे। हालांकि उनको जिस इमली के पेड़ के साथ बांधने की सजा मिली थी वो आज भी अकाल तख्त साहिब के पास है।
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने माफी मांगी
1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें पंथ विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना गया। बाद में उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर माफी मांगी और सेवा की
पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह काे पंथ से निकाला
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद हरमंदिर साहिब के फिर से निर्माण में सरकारी तौर पर भूमिका निभाने के कारण उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया गया था। कई वर्षों बाद उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर बर्तन मांजने और जूते साफ करने की सजा पूरी की।
पूर्व सीएम सुरजीत सिंह बरनाला तनखैया घोषित 1
980 के दशक में सरकार चलाने के दौरान पंथक हितों के विरुद्ध कार्य करने के लिए पूर्व CM सुरजीत सिंह बरनाला को तनखैया घोषित किया गया। उन्होंने गले में तख्ती लटकाकर और जूते साफ करके अपनी धार्मिक सजा पूरी की थी।
प्रकाश सिंह बादल बेअदबी केस में तलब हुए
शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और दिवंगत पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के बेअदबी केसों में तलब किया था। उनको 2007-2017 के कार्यकाल के दौरान हुई गलतियों के लिए तलब किया गया था। प्रकाश सिंह बादल ने दरबार साहिब में जूतों और बर्तन की सेवा निभाकर अपनी सजा पूरी की थी।
सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक सजा मिली
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बाद भी अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। पहली बार उनको प्रकाश सिंह बादल के साथ तलब किया गया था। तब सरकार में गृह मंत्री रहते पावन स्वरूपों की बेअदबी न रोक पाने के आरोप लगे थे।दूसरी बार दिसंबर 2024 में अकाल तख्त के 5 सिंह साहिबान ने सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया। उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी और बेअदबी मामले में सजा के तौर पर पहरा देने, श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और हाथ जोड़कर माफी मांगने का आदेश दिया गया।
क्या है श्री अकाल तख्त साहिब
श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है। ये भी कहा जाता है कि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सोच समझकर अकाल तख्त को हरमंदिर साहिब के बिल्कुल सामने बनाया। इसका कारण ये भी है कि जब कोई सिख प्रार्थना करके बाहर निकले, तो वह अपने सोशल जिम्मेदारी और पॉलिटिकल जिम्मेदारी को याद रख सके।
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