HP Panchayat Election: हिमाचल में शनिवार आधी रात से भंग हो जाएंगी पंचायतें, पहली से प्रशासकों के हाथों में होगी विकास कार्यों की कमान
30 हजार जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त, नए 'ग्रामीण संसद' के गठन की तैयारी
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 31 जनवरी 2026 : हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण सत्ता में शनिवार से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश की 3,586 पंचायतों में पांच साल पहले चुने गए 30,000 जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। शनिवार आधी रात के बाद प्रदेश की सभी पंचायतें स्वत: ही भंग हो जाएंगी।
हिमाचल में पहली बार पहली फरवरी से पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह पूरी तरह से प्रशासकीय व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, जिसके लिए विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। पंचायतों के भंग होने के साथ ही विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की कमान अब जन प्रतिनिधियों के बजाय प्रशासकों के हाथों में होगी।
हालांकि, प्रशासक की भूमिका कौन निभाएगा, इस पर प्रदेश सरकार की अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी है। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में सरकार को दो विकल्प भेजे हैं।
पहले प्रस्ताव में पंचायत सचिव को ही प्रशासक की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है, जबकि दूसरे प्रस्ताव में एक तीन सदस्यीय समिति बनाने का सुझाव है, जिसमें स्कूल प्रिंसीपल या हैडमास्टर को प्रशासक और सचिव व रोजगार सेवक को सदस्य नियुक्त किया जा सकता है। इस प्रशासनिक बदलाव का एक सीधा प्रभाव प्रदेश की आर्थिकी पर भी पड़ेगा। वर्तमान में वार्ड सदस्यों को छोड़कर अन्य प्रतिनिधियों के मानदेय पर सरकार हर महीने करीब पांच करोड़ रुपए खर्च करती है।
पंचायतों के भंग रहने की अवधि तक यह भारी-भरकम राशि सरकारी खजाने में बचत के रूप में जमा होगी। पहली फरवरी से नई व्यवस्था का लागू होना तय है। (SBP)
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