रोज़ 12000 स्टेपस चलना ज़रूरी है क्या? पढ़ें सेहत पर कितना पड़ेगा फर्क
चंडीगढ़, 22 सितंबर,2026ः आपने अक्सर डॉक्टर को कहते सुना होगा कि फिट रहने के लिए रोजाना चलना चाहिए. रोजाना चलने की आदत शरीर को कई तरह के फायदा पहुंचाती है. आज हालात ऐसे बन चले हैं कि लोग कम उम्र में ही मोटापे, डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारियों, कडनी से जुड़ी समस्या आदि का शिकार हो जा रहे हैं, जो कि आम बात नहीं है. अक्सर डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट को कहते सुना होगा कि शरीर को फिट रखने के लिए रोजाना चलना चाहिए. आइए जानते हैं चलने की आदत आपकी सेहत के लिए कितनी लाभकारी साबित हो सकती है?
रोजाना चलने की आदत बदल सकती है जिंदगी
NIH के अनुसार, डॉक्टर अक्सर उन लोगों को, जो ज्यादा एक्टिव नहीं रहते, उन्हें बेहतर सेहत की ओर बढ़ने के आसान तरीके के तौर पर पैदल चलने की सलाह देते हैं. दिन में 4,000 या उससे कम कदम चलना कम शारीरिक गतिविधि माना जाता है. आम तौर पर दिन में 10,000 कदम चलने का लक्ष्य बताया जाता है, लेकिन हाल की स्टडीज से पता चला है कि रोजाना 10,000 से कम कदम चलने पर भी सेहत को फायदे मिलते हैं. यानी की अगर आप रोजाना चलने की आदत डालें, छोटी दूरी को पैदल तय करें, तो शरीर मजबूत होगा और बीमारियों का खतरा कम हो सकता है.
4000, 8000 या 12,000 कदम?
आपकी सेहत बेहतर बनी रहे, इसके लिए रोजाना कितने कदम चलने होंगे इसका अंदाजा आप एक रिसर्च से मालूम कर सकते हैं. NIH द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च एनालिसिस के अनुसार, शोधकर्ता ने उन लोगों के बीच फॉलो-अप के दौरान मौत के रिस्क की तुलना की थी, जो रोजाना 4,000 से कम, 8,000 तक, या 12,000 या उससे ज्यादा कदम चलते थे. उन्होंने यह भी देखा कि क्या कदम की तेजी का बेहतर सेहत से संबंध भी है. फॉलो-अप के दस सालों के दौरान, 4,840 पार्टिसिपेंट्स में से 1,165 लोगों की मौत किसी न किसी वजह से हुई. इनमें से 406 लोगों की मौत दिल से जुड़ी बीमारी से और 283 लोगों की मौत कैंसर से हुई थी. हालांकि, जो लोग रोजाना 4,000 कदम चलते थे, उनकी तुलना में रोजाना 8,000 कदम चलने वालों में किसी भी वजह से मौत का रिस्क 50% कम था. इतना ही नहीं, जो लोग रोजाना 12,000 कदम चलते थे, उनमें सिर्फ 4,000 कदम चलने वालों की तुलना में मौत का रिस्क 65% कम था.
रोजाना चलने के फायदे?
ADA के अनुसार, रोजाना चलने की आदत बेहतर सेहत बनाए रखने के लिए फायदेमंद हो सकती है. रोजाना चलने से
- ब्लड ग्लूकोज (ब्लड शुगर) का लेवल कम होता है
- इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है.
- दिल की सेहत बेहतर होती है.
- मेटाबॉलिज्म बढ़ता है.
- वजन कम करना या उसे बनाए रखना आसान हो जाता है.
- ब्लड प्रेशर कम होता है.
- HDL (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है.
- LDL (बुरा) कोलेस्ट्रॉल कम होता है.
- आपका मूड बेहतर रहता है.
- आप ज्यादा फोकस्ड और अलर्ट महसूस करते हैं.
- याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है.
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