तिरछी नज़र: कॉकरोच और कुत्ते — क्या अब सिर्फ यही मुद्दे रह गए हैं? क्या कॉकरोच पार्टी की राजनीतिक छाया पंजाब तक भी पहुंचेगी?
अब खतरनाक कुत्तों को मारने की खुली छूट, लेकिन कॉकरोच मारने पर प्रतिबंध की आशंका
ताली बजा रही बाकी पार्टियां भी किसी गलतफहमी में न रहें
-बलजीत बल्ली
माहौल बदल गया है। पहले हर कोई कॉकरोच से नफरत करता था। उन्हें मारने की पूरी छूट थी। कॉकरोच मारने वाली दवाइयों और स्प्रे बेचकर अरबों रुपये कमाए जा रहे थे। लेकिन अब कॉकरोच Gen Z की पसंद बन गए हैं। यह जीव उनकी गरिमा और भविष्य की सोच का प्रतीक बन गया है।
आशंका यह है कि जैसे पहले मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों और आवारा पशुओं को मारने पर रोक लगवाई थी, कहीं ऐसा न हो कि कॉकरोच जनता पार्टी कॉकरोच मारने पर भी प्रतिबंध लगवा दे। वैसे अभी तक यह मुद्दा पार्टी के घोषणापत्र में शामिल नहीं है, लेकिन जिस तरह इसमें अंबानी और अडानी के मीडिया चैनलों पर प्रतिबंध की बात शामिल है, उसी तरह कॉकरोच मारने वाली दवाइयाँ बनाने वाली कंपनियों, उनकी मीडिया में विज्ञापनबाज़ी, और घरों में कॉकरोच मारने को भी अपराध घोषित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कुत्तों को नियंत्रित करने और खतरनाक कुत्तों को मारने के आदेश आने के बाद अब वे सरकारें और मंत्री भी इस मुद्दे पर जोश दिखाकर मीडिया की सुर्खियां बटोरने की कोशिश करेंगे, जिन्हें कल तक आवारा और खूंखार कुत्तों द्वारा रोज़ नोचे जा रहे मासूम बच्चों के पक्ष में आवाज़ उठाने की भी फुर्सत नहीं थी।
भले ही देखने में कॉकरोच पार्टी इंडिया गठबंधन की सरकार और सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ दिखाई देती हो, लेकिन उसे तत्काल खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इसी कारण उसका X हैंडल भारत में बंद कर दिया गया है। इस पर ताली बजा रहे बाकी पार्टियों के नेताओं को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए।
इस पार्टी को कुछ घंटों में ही करोड़ों फॉलोअर्स दिलाने वाली नई पीढ़ी यानी Gen Z सभी पार्टियों और पूरे सिस्टम से परेशान और निराश है। हालात कुछ हद तक अन्ना हज़ारे आंदोलन जैसे लगते हैं, लेकिन इस बार बुनियादी फर्क यह है कि उस समय आंदोलन की कमान पुरानी पीढ़ी के हाथ में थी, जबकि अब नई पीढ़ी खुद इसकी अगुवाई कर रही है।
हालांकि अभी इसका स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन नेपाल जैसे कुछ देशों के अनुभव संकेत देते हैं कि Gen Z पूरी राजनीतिक उथल-पुथल ला सकती है। इसकी राजनीतिक छाया पूरे देश में और खासकर पंजाब तथा उन राज्यों में पड़ सकती है जहां अगली विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में युवाओं के कॉकरोच पार्टी की ओर आकर्षित होने के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।
पंजाब में जैसा राजनीतिक उथल-पुथल वाला माहौल है, वहां कुछ भी हो सकता है। पंजाब के लोगों ने 1989 के लोकसभा चुनावों, फिर 2014 के लोकसभा चुनावों और बाद में 2022 में भी राजनीतिक चमत्कार करके दिखाए हैं — इसलिए कुछ भी संभव है।
तिरछी नज़र / बलजीत बल्ली
Editor-in-Chief
Babushahi News Network
May 21, 2026
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बलजीत बल्ली, Editor-in Chief, Babushahi Network, Tirchhi Nazar Media
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