संसद में पंजाब की एक प्रखर आवाज़ बनकर उभरे राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू
नई दिल्ली: पंजाब से लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों में, उच्च सदन के सदस्य सतनाम सिंह संधू बजट सत्र 2026 के दौरान राज्य के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली प्रतिनिधियों में से एक बनकर उभरे हैं। सत्र के दौरान उनकी कार्यशैली ने उन्हें ज़मीनी स्तर पर आम लोगों की आवाज़ और नागरिकों व सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित किया है।
सांसदों की प्रभावशीलता का आकलन उनके संसदीय कार्यों में भागीदारी, सार्वजानिक मुद्दों को उठाने की क्षमता और विधायी प्रक्रियाओं में योगदान के आधार पर किया जाता है।
बजट सत्र 2026 में इस भागीदारी का एक विविध रुप देखने को मिला, वर्तमान में लोकसभा में 13 और राज्यसभा में 7 सांसद पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सत्र के दौरान सांसदों के प्रदर्शन का मूल्यांकन उनकी उपस्थिति, पूछे गए प्रश्नों, उठाए गए मुद्दों, विधायी पहलों तथा ज़ीरो आवर(शून्य काल)और विशेष उल्लेख (स्पेशल मेंशन) में भागीदारी जैसे प्रमुख मानकों पर किया गया।
वर्तमान बजट सत्र के दौरान, सतनाम सिंह संधू राज्यसभा में 96.7 प्रतिशत की प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कर सदन के सबसे नियमित सदस्यों में शामिल हो गए। लोकसभा के सदस्य अमर सिंह की उपस्थिति शत-प्रतिशत रही, जबकि राज्यसभा के राघव चड्ढा की उपस्थिति सांसद संधू के बराबर रही।
प्रश्नों से झलकती सक्रिय नेतृत्व क्षमता
किसी सांसद के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण मानदंड पूछे गए प्रश्नों की संख्या होती है, क्योंकि यह जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनहित के मुद्दों को उठाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है। इस श्रेणी में सतनाम सिंह संधू 51 प्रश्न पूछकर सबसे आगे रहे। उनके प्रश्नों में पाँच सप्लीमेंट्री प्रश्न शामिल रहे, जबकि चार अन्य सदस्य उनके करीब रहे। संधू का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय और राज्य से जुड़े मुद्दों के प्रति उनकी सक्रियता को दर्शाता है। नियमित उपस्थिति के साथ सबसे अधिक प्रश्न पूछकर उन्होंने संसदीय कार्यों में निरंतरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
संसद में पंजाब के मुद्दों को मज़बूती से उठाना
सतनाम सिंह संधू के प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू संसद में पंजाब से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना रहा। बजट सत्र के दौरान उन्होंने पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े 22 मुद्दे उठाए, जो राज्य के सभी सांसदों में सर्वाधिक हैं।
उन्होंने सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और विकास से जुड़े अनेक चिंताजनक मुद्दों को उठाया, जो संवेदनशीलता और समझदारी को दर्शाता है। उनके द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों में श्री दरबार साहिब, अमृतसर स्थित सिख रेफरेंस लाइब्रेरी की बहाली का मुद्दा प्रमुख रहा, जो 1984 में नष्ट हो गई थी। यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा उन्होंने भूजल स्तर में गिरावट, जल प्रदूषण, नदियों की सफाई, बाढ़ प्रबंधन, संकटग्रस्त किसानों के लिए आर्थिक सहायता और सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी उठाया।
इसके अलावा, उन्होंने पंजाब में एक हॉर्टिकल्चर इंस्टीट्यूट (बागवानी संस्थान) और एक सहकारी विश्वविद्यालय (कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी) की स्थापना, और चंडीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए 'पॉइंट ऑफ़ कॉल' का दर्जा दिए जाने की मांग की। उनके द्वारा किए गए हस्तक्षेप राज्य के विकास संबंधी मुद्दों की उनकी गहरी समझ को दर्शाते हैं। संसद के साथ-साथ अपने गृह राज्य में भी उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।
अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख जगरूप सिंह सेखों ने टिप्पणी करते हुए कहा,"अच्छी बात यह है कि वे लोगों की आवाज़ उठा रहे हैं और सरकार तक उनकी बात पहुंच रही है।”
विधायी पहल में स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण
निजी सदस्यों के विधेयक (Private Members’ Bills) विधायी कार्यवाही में योगदान देने के मामले में किसी सांसद की कार्य-निष्पादन पहल का एक महत्वपूर्ण पैमाना होते हैं। सतनाम सिंह संधू ने इस सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करके अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई—'प्रवासी भारतीय कौशल एवं प्रतिभा प्रेरक विधेयक, 2025', जिसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रतिभाओं की पहचान और उनके उपयोग को सुदृढ़ करना है; 'किसान जीवन सुरक्षा एवं दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक, 2025', जो किसानों को सामाजिक सुरक्षा और मुआवज़ा प्रदान करने पर केंद्रित है; और 'उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग एवं प्रत्यायन प्राधिकरण विधेयक, 2025', जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाना है।
अशोक मित्तल ने भी तीन प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किए, जबकि राघव चड्ढा और संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने एक-एक विधेयक प्रस्तुत किया। संधू की विधायी पहल विविधता और प्रासंगिकता के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि उन्होंने प्रमुख सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज के प्रोफेसर अमनप्रीत गिल ने कहा, “संधू नए विचार जैसे ‘नदियों के अधिकार’ सामने ला रहे हैं, जो अपने आप में बेहद खास हैं। वे पारंपरिक मुद्दों से हटकर अनछुए विचारों और नए दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनमें किसी भी प्रकार की लोकलुभावन राजनीति (populism) का कोई स्थान नहीं होता।"
ज़ीरो आवर और विशेष उल्लेख में सक्रियता
ज़ीरो आवर और विशेष उल्लेख सांसदों को सार्वजनिक महत्व के ज़रूरी मुद्दों को उठाने के अवसर प्रदान देते हैं। सतनाम सिंह संधू इस श्रेणी में सबसे सक्रिय प्रतिभागियों में से एक रहे जिन्होंने सात बार हस्तक्षेप दर्ज किया किया, जो राघव चड्ढा के बराबर था।
अशोक मित्तल और संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने छह-छह योगदानों के साथ उनके करीब रहे। ज़ीरो आवर में संधू की लगातार उपस्थिति उभरते सार्वजनिक मुद्दों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है, कि आवश्यक चिंताओं एवं मुद्दों को सरकार के ध्यान में लाया जाए।
संसदीय प्रभावशीलता का एक अन्य महत्वपूर्ण मानदंड विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े प्रश्नों की व्यापकता है। इस दृष्टि से भी सतनाम सिंह संधू ने सत्र के दौरान 25 मंत्रालयों संबंधित मुद्दे उठाकर उल्लेखनीय सक्रियता का प्रदर्शन किया और शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल हो गए।
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