चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने चार दिवसीय दूसरे ग्लोबल पार्टनरशिप कॉन्क्लेव-2026 में यूएसए, फ्रांस, यूके जैसे देशों की विश्व प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीयों के साथ किए 19 एमओयू
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा किए एमओयू उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और वैश्विक भाईचारे की दिशा में एक बड़ा कदम: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर दीप इंद्र सिंह संधू
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में चार दिवसीय दूसरा ग्लोबल पार्टनरशिप कॉन्क्लेव-2026 हुआ संपन्न
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित चार दिवसीय दूसरे ग्लोबल पार्टनरशिप कॉन्क्लेव-2026 में दुनिया भर के 20 देशों की 40 यूनिवर्सिटीज के 60 से अधिक डेलीगेट्स ने लिया हिस्सा
चंडीगढ़/मोहाली
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में चार दिवसीय दूसरे ग्लोबल पार्टनरशिप कॉन्क्लेव-2026 का शानदार आयोजन करवाया गया। इस चार दिवसीय कॉन्क्लेव में दुनिया भर की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के उच्च स्तरीय डेलीगेट्स इस ग्लोबल कॉन्क्लेव में शामिल हुए। इसके अंतिम दिन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने यूएसए, फ्रांस, यूके जैसे देशों की विश्व प्रतिष्ठित 19 यूनिवर्सिटीयों के साथ एमओयू किया गया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य इंटरनेशनल स्टूडेंट मोबिलिटी, फैकल्टी एक्सचेंज और जॉइंट रिसर्च कार्यों के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान करना तथा इनोवेशन को बढ़ावा देना था। कॉन्क्लेव का विषय ’वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना, सहयोग, गतिशीलता और नवाचार को बढ़ावा देना-एक बेहतर भविष्य’ था।
कॉन्क्लेव के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट मोबिलिटी, फैकल्टी एक्सचेंज और जॉइंट रिसर्च कार्यों के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए जो 19 एमओयू किए गए हैं, इसमें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में (4 वर्ष सीयू में प्लस 1 वर्ष पेरिस में ) ड्यूल डिग्री करवाने के लिए आईपीएसए-पोलिटेक्निक डेस साइंस अवांसिस पेरिस, फ्रांस के साथ एमओयू हुआ। एमबीए (सीयू में 1 वर्ष प्लस 1 विदेश में), इंजीनियरिंग, सीएसई, एआईएमएल, बीसीए (1 प्लस 3) के ड्यूल डिग्री करवाने के लिए रॉयल होलोवे, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, यूके के साथ एमओयू किया गया। इंजीनियरिंग, साइंस, एआईएमल, बायोटेक्नोलॉजी (2 वर्ष सीयू में प्लस 2 वर्ष विदेश में) और साइकोलॉजी (1 वर्ष सीयू में प्लस 1 वर्ष विदेश) में ड्यूल डिग्री प्रोग्राम के तहत समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी उज्बेकिस्तान के साथ एमओयू हुआ। सेजेड यूनिवर्सिटी, हंगरी का एआई ऑग्मेंटेड चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी यूपी के साथ पार्टनरशिप एमओयू हुआ। फेकल्टी एक्सचेंज, स्टूडेंट एक्सचेंज और बीबीए (2 वर्ष सीयू में प्लस 2 वर्ष यूएसए में) के प्रोग्राम के लिए सेंट पीटर्स यूनिवर्सिटी, यूएसए के साथ एमओयू हुआ। रिसर्च और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए कैप पेनिनसुला यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, साउथ अफ्रीका के साथ एमओयू हुआ। यूनिवर्सिटी आॅफ हुद्र्सफिल्ड का चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी मोहाली और एआई आॅग्मेंटेड चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के साथ स्टूडेंट् एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एमओयू हुआ। मारियानो मार्कोस स्टेट यूनिवर्सिटी फिलीपींस, इलोइलो साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी फिलीपींस के साथ स्टूडेंट् एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी मोहाली के साथ एमओयू हुआ। सेजेड यूनिवर्सिटी, हंगरी, यूनिवर्सिटी टेक्नोलॉजी मारा, मलेशिया, एशिया पेसिफिक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन, मलेशिया, पलाकी यूनिवर्सिटी, चेक रिपब्लिक, साउर्थन फेडरेल यूनिवर्सिटी, रशिया, डी.सारिकबायेव ईस्ट कजाकिस्तान टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, कजाकिस्तान, अमेरिकन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश, ईएएन यूनिवर्सिटी, कोलंबिया और कोकंड स्टेट यूनिवर्सिटी, उज्बेकिस्तान के साथ पार्टनरशिप एमओयू हुआ।
कॉन्क्लेव में 20 से अधिक देशों जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स अमेरिका, सिंगापुर, चेक रिपब्लिक, हंगरी, रूस, कजाखस्तान, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, कोलंबिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, फिलीपींस, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, इथियोपिया सहित कई अन्य देश शामिल हैं। इसमें 40 से अधिक विदेशी यूनिवर्सिटियों के 60 से अधिक डेलीगेट्स ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह के अवसर पर भारत में रूस के एम्बेसडर (एक्स्ट्राऑर्डिनरी और प्लेनिपोटेंटियरी) डेनिस अलीपोव और भारत में स्पेन के एम्बेसडर जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोवोस्ट चेयर प्रोफेसर मनोज गुप्ता विशिष्ट अतिथि थे।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर दीप इंद्र सिंह संधू ने कहा कि इस आयोजन ने न केवल चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की वैश्विक साख को मजबूत किया है, बल्कि भारतीय स्टूडेंट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर करियर बनाने के लिए रास्ते भी खोले हैं। यह उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और वैश्विक भाईचारे की दिशा में एक बड़ा कदम है। किसी भी राष्ट्र कर प्रगति हो या किसी यूनिवर्सिटी का दूरदर्शी नेतृत्व मजबूत नीतियों और एक ऐसी प्राोत्साहन आधारित प्रणाली से ही संभव होती है। प्रतिभा हर जगह मौजूद होती है, लेकिन असली चुनौती उसे पहचानने उसका समर्थन करने और उसे आगे बढ़ने के लिए सही माहौल देने में है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के पास ऐसा करने की अपार क्षमता है।
दीप इंद्र सिंह संधू ने कहा कि डेजिग्नेशन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण समर्पण है। सीनियोरिटी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण निष्ठा है। भौतिक संपतियों से अधिक मानवीय मूल्य हैं। कागजी कार्यवाही से अधिक महत्वपूर्ण वास्तविक कार्य है। यहां हम एमओयू इसलिए नहीं कर रहे हैं ताकि हम संख्या बढ़ा सकें या उन कागजों को अपनी फाइलों में सहेजकर रख सकें। दरअसल हम चाहते हैं कि हर एक कोलैबोरेशन स्टूडेंट मोबिलिटी, फैकल्टी मोबिलिटी और अनुसंधान के मामले में सक्रिय हो और यही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
दीप इंदर सिंह संधू ने कहा कि छात्रों को वर्ल्ड क्लास शिक्षा प्रदान करना चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की अकादमिक संस्कृति का अहम हिस्सा है। यूनिवर्सिटी ने 6 महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों की टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटियों के साथ 530 इंटरनेशनल सहयोग हैं, जिसके तहत 2300 से अधिक स्टूडेंट्स सेमेस्टर एक्सचेंज, इंटरनेशनल प्रोग्राम्स और इंटर्नशिप के जरिए अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित अन्य देशों में पढ़ाई कर रहे हैं। 2100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विजिटिंग फैकल्टी, 560 इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क स्कॉलर और 68 देशों के 3000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स शिक्षारत हैं। यही नहीं 310 छात्र वॉल्ट डिज्नी वर्ल्ड, फ्लोरिडा (यूएसए) में इंटर्नशिप व एक्सचेंज प्रोग्राम्स का हिस्सा बन चुके हैं।
इस मौके चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल अफेयर्स के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर राजन शर्मा ने कहा कि हमारा उद्देश्य ग्लोबल पार्टनरशिप काॅन्क्लेव-2026 की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को आगे बढ़ने और भविष्य में और भी अधिक सफलता प्राप्त करने में मदद करना है। इन एमओयू के साथ हमारे स्टूडेंट्स को बहुत लाभ होगा। यह एमओयू कोलेबोरेशन और संयुक्त पहलों को बढ़ावा देंगें। जो न केवल उच्च शिक्षा को बेहतर बनाएंगे, बल्कि आने वाले वर्षोें तक अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी मजबूत करेंगें। अंतरराष्ट्रीय डेलिगेटस, विशेषज्ञों और पेशेवरों की यहां पर उपस्थिति ग्लोबल पार्टनरशिप की भावना का एक जीवंत प्रमाण है। क्योंकि यह सब सिर्फ अपनी विशेषज्ञता ही नहीं बल्कि व्यापक दृष्टिकोण भी लेकर आए हैं। जो संवाद को समृद्ध करता है और परिवर्तनकारी सहयोग के लिए नए अवसर सृजित करता है।