सीजीसी लांडरां द्वारा पंजाब में ग्रामीण नवाचार को गति देने के लिए एआई संचालित कृषि-उद्यमिता पहल की शुरुआत
चंडीगढ़, 18 May 2026- चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेस (सीजीसी), लांडरां अपने राइज़ विभाग और ऐसीआईसी राइज़ के माध्यम से एक स्ट्रक्चर्ड अग्रिपरेनेउर्शिप पहल को आगे बढ़ा रहा है, जिसका उद्देश्य पंजाब की एग्रीकल्चर से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना तथा राज्य के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है। ग्राउंडवाटर डीपलेशन, मिट्टी की गुणवत्ता में कमी, बढ़ती लागत और खेती की घटती लाभप्रदता जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, संस्थान ने एक बहु-चरणीय कार्यक्रम विकसित किया है। यह कार्यक्रम क्षेत्रीय एग्रो कलाईमेटिक कंडीशन के अनुरूप टिकाऊ एवं तकनीक-आधारित खेती की पद्धतियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
इस पहल की शुरुआत ‘कन्वर्जेन्स ऑफ़ एआई इन अग्रिपरेनेउर्शिप : ऐ कैपेसिटी बिल्डिंग सेशन फॉर नेशनल डेवलपमेंट ’शीर्षक वाले एक सेमिनार से हुई, जिसमें पंजाब के विभिन्न गांवों से आए 25 किसानों ने भाग लिया। इस सेशन में प्रतिभागियों को कल्टीवेशन मॉडल्स के बारे में जानकारी दी गई, विशेष रूप से ड्रैगन फ्रूट की खेती पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसे कम पानी में उगाई जाने वाली और अधिक लाभ देने वाली फसल के रूप में प्रस्तुत किया गया। विशेषज्ञों ने खेती की तकनीकों, निवेश आवश्यकताओं, उत्पादन चक्र और बाजार संभावनाओं से संबंधित व्यावहारिक जानकारी साझा की। इसके साथ ही, एग्रीकल्चर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, कि किस प्रकार एआई, किसानों को फसल की गुणवत्ता का आकलन करने, मांग के रुझानों को ट्रैक करने तथा बेहतर मूल्य प्राप्ति के लिए व्यापक डिजिटल बाजारों तक पहुंच बनाने में, सहायता कर सकता है।
इस आधार को आगे बढ़ाते हुए, अगला फेज हंसाली साहिब गांव में ड्रोन टेक सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से आयोजित किया गया। ‘ड्रोन इनेबल्ड (एआई) प्रेसीशन फार्मिंग फॉर ड्रैगन फ्रूट कल्टीवेशन’ विषय पर आधारित इस फील्ड-आधारित कार्यक्रम में किसानों को प्लांटेशन डिज़ाइन, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन तथा सर्वोत्तम बुवाई पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। ड्रोन आधारित फसल सर्वेक्षण और प्रिसिजन स्प्रेइंग के लाइव प्रदर्शन के माध्यम से यह दिखाया गया कि उन्नत तकनीकें किस प्रकार उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि लागत को कम करने में सहायक हो सकती हैं, जिससे खेती को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाया जा सके।
यह पहल अब अपने तीसरे फेज की ओर बढ़ रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य पहले के सत्रों में भाग लेने वाले किसानों और उभरते एगरीप्रनेयर्स को इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करना है। मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और नवाचार संबंधी अवसंरचना तक पहुंच के माध्यम से, सीजीसी लांडरां का लक्ष्य पारंपरिक खेती को विस्तार योग्य कृषि-व्यवसाय मॉडलों में परिवर्तित करना है। इसके माध्यम से संस्थान पंजाब में एक सशक्त, लचीले और तकनीक-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास में योगदान देने का प्रयास कर रहा है।
डॉ. नेहा शर्मा, डीन रिसर्च, सीजीसी लांडरां ने कहा, “हमारा उद्देश्य कृषि-उद्यमिता का एक व्यावहारिक और विस्तार योग्य मॉडल विकसित करना है, जो सस्टेनेबिलिटी को उभरती तकनीकों के साथ जोड़ता हो। किसानों को सही ज्ञान, उपकरण और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करके हम उन्हें भविष्य के लिए तैयार कृषि-उद्यमी बनने तथा पंजाब के स्टार्टअप इकोसिस्टम में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में सक्षम बना रहे हैं।”
सीजीसी लांडरां के कैंपस डायरेक्टर डॉ. राजदीप सिंह ने कहा, “यह पहल शिक्षा जगत, नवाचार और जमीनी समुदायों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। तकनीक-आधारित कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देकर हम एक ऐसा दोहराने योग्य मॉडल तैयार कर रहे हैं, जो ग्रामीण आजीविका को समर्थन देने के साथ-साथ राज्य के व्यापक स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी सशक्त बनाता है।”