चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के 18 इंजीनियरिंग और साइंस छात्र ‘नए एस्टेरॉयड’ की खोज के साथ विश्व प्रतिष्ठित स्पेस रिसर्च एजेंसी नासा के बने 'सिटीजन साइंटिस्ट’
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हासिल की स्पेस साइंस में अद्वितीय उपलब्धि, इंटरनेशनल एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन (IASC) के तहत 45-दिन के नासा प्रोजेक्ट के दौरान नए एस्टेरॉइड्स की खोज की
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों को नासा सिटीजन साइंटिस्ट का सम्मान STEM और स्पेस-साइंस रिसर्च में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की मज़बूत नींव को दर्शाता है: दीप इंदर सिंह संधू, सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर
वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में चमका भारत, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों को मिला प्रतिष्ठित नासा सिटीजन साइंटिस्ट सम्मान
मोहाली, 17 फरवरी: वैश्विक अंतरिक्ष-विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हाल ही में नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की प्रतिष्ठित इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कैंपेन (IASC) के तहत नासा सिटिज़न साइंटिस्ट का प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया। यह नासा द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय सिटीजन-साइंस अभियान है।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की अंतरिक्ष-विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एस्ट्रोनॉमी क्लब के कुल 18 छात्रों को उनकी असाधारण लगन, विश्लेषणात्मक क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए आधिकारिक रूप से नासा सिटीजन साइंटिस्ट का दर्जा देकर सम्मानित किया गया है। इस अभियान में भाग लेने वाले 26 छात्रों में से दो टीमों ने अपने अदभुत वैज्ञानिक योगदान के आधार पर यह वैश्विक सम्मान हासिल किया है।
इंटरनेशनल एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन (IASC) के तहत 45-दिन के एक इंटेंसिव प्रोग्राम में छात्रों ने एडवांस्ड एस्ट्रोनॉमिकल टूल्स और टेक्नीक्स का इस्तेमाल करके डीप-स्पेस डेटा का मुश्किल एनालिसिस किया। बहुत ज़्यादा सटीकता और साइंटिफिक समझ दिखाते हुए, उनकी लगातार कोशिशों का नतीजा दो नए एस्टेरॉयड की खोज के रूप में निकला, जिन्हें प्रोविजनल तौर पर ‘DIV/1111’ और ‘ANC/0505’ नाम दिया गया, जो छात्रों की लीडरशिप स्पेस-साइंस रिसर्च में एक बड़ी कामयाबी है। इन टीमों ने दिए गए डेटासेट के साथ काम किया,एस्ट्रोमेट्रिका जैसे प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर की मदद से खगोलीय चित्रों का गहराई से अध्ययन किया, जो गतिमान वस्तुओं का पता लगाना संभव बनाता है और
आईएएससी के दिशानिर्दशों के अनुसार अपनी रिपोर्ट सबमिट कीं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के नासा सिटीजन साइंटिस्ट के तौर पर पहचान पाने वाले छात्रों में 15 एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, 2 बीएससी फिजिक्स तथा 1 छात्र सीएसई का है।
यह बताना ज़रूरी है कि इन छात्रों को नासा का प्रतिष्ठित सिटिज़न साइंटिस्ट अवॉर्ड दिया गया है। यह अवॉर्ड उन्हें पैन-स्टार्स (पैनोरमिक सर्वे टेलीस्कोप एंड रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) से मिले असली एस्ट्रोनॉमिकल डेटासेट का इस्तेमाल करके, पृथ्वी के पास की चीज़ों और मेन बेल्ट एस्टेरॉयड के निरिक्षीण एवं विश्लेषण में उनके सफल योगदान के लिए दिया गया है। पैन-स्टार्स दुनिया के सबसे एडवांस्ड स्काई-सर्वे टेलीस्कोप सिस्टम में से एक है।छात्रों के काम में हाई-रिज़ॉल्यूशन टेलीस्कोप इमेज का विश्लेषण करना, विश्लेषण कर गतिशील खगोलीय पिंडों की पहचान की और सटीक माप प्रस्तुत करना शामिल था, जो ग्लोबल एस्टेरॉयड ट्रैकिंग और प्लैनेटरी-डिफेंस रिसर्च में मदद करते हैं। नासा सिटिज़न साइंटिस्ट अवॉर्ड यह दर्शाता है कि छात्रों की खोजें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों पर खरी उतरीं और उन्हें आधिकारिक रूप से नासा सिटिज़न साइंटिस्ट की मान्यता है , जिससे वे वैश्विक स्पेस-साइंस समुदाय के चुनिंदा योगदानकर्ताओं में शामिल हो गए।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों की इस शानदार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर दीप इंदर सिंह संधू ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा,“यह अद्भुत उपलब्धि न केवल चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी बल्कि ग्लोबल स्पेस-साइंस रिसर्च में भारत की बढ़ती उपस्थिति के लिए भी गर्व का विषय है। यह सफलता STEM उत्कृष्टता और स्पेस-साइंस रिसर्च के केंद्र के रूप में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है, जहाँ छात्रों को वास्तविक वैज्ञानिक डेटा, उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय शोध मानकों के साथ कार्य करने का अवसर मिलता है। एस्टेरॉयड रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारे छात्रों का योगदान भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस उपलब्धि के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने इनोवेशन, वैज्ञानिक खोज और ग्लोबल शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है।”
संधू ने कहा, “18 छात्रों को नासा सिटिज़न साइंटिस्ट के रूप में मिली मान्यता देशभर के युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। यह साबित करता है कि समर्पण, सही मार्गदर्शन और प्रैक्टिकल साइंटिफिक अनुभव से छात्र शिक्षा के दौरान ही ग्लोबल पहचान हासिल कर सकते हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एस्ट्रोनॉमी, स्पेस साइंस और नई टेक्नोलॉजी में मौके बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि छात्र ग्लोबल साइंटिफिक खोज एवं शोध में योगदान देते हुए अंतरिक्ष-विज्ञान में भारत की भूमिका को मजबूत करें।”
खास तौर पर, इंटरनेशनल एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन (IASC) NASA से जुड़ा एक ग्लोबल एस्ट्रोनॉमिकल सिटिज़न-साइंस प्रोग्राम है, जो दुनिया भर के जो छात्रों और शौकिया खगोलविदों को वास्तविक टेलीस्कोप डेटा के माध्यम से क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉयड) जैसे गतिशील खगोलीय पिंडों की पहचान का अवसर देता है। इस पहल के ज़रिए, प्रतोभागियों को को प्रोफेशनल एस्ट्रोनॉमिकल टूल्स और असली साइंटिफिक डेटा के साथ प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है, जो इंटरनेशनल एस्टेरॉयड-मॉनिटरिंग और प्लैनेटरी-डिफेंस की कोशिशों में अहम योगदान देते हैं। जिन छात्रों के एनालिसिस ग्लोबल साइंटिफिक स्टैंडर्ड्स को पूरा करते हैं, उन्हें उनके आधिकारिक रूप से नासा सिटिज़न साइंटिस्ट के तौर पर मान्यता (उपाधि) दी जाती है।