MP सतनाम संधू ने संसद में उठाया पंजाब के सहकारी क्षेत्र की चुनौतियों का मुद्दा, केंद्र सरकार से की पंजाब में 'त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी' के 'रीजनल सेंटर' स्थापित करने की मांग
सांसद सतनाम सिंह संधू ने की केंद्र सरकार से सहकारी समितियों के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में तेज़ी लाने की मांग, राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 की सराहना की
सांसद सतनाम सिंह संधू ने की केंद्र सरकार से पंजाब में 'त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी' के 'रीजनल सेंटर' स्थापित करने की मांग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सहकारी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
भूमि एकीकरण से लेकर हरित और श्वेत क्रांति तक, सहकारी क्षेत्र पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव रहा है, लेकिन अब अस्तित्व बनायें रखने के लिए चुनौतियों का सामना कर रहा है, नई ऊर्जा के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ज़रूरी: सांसद सतनाम सिंह संधू
20,000 सहकारी समितियों और 35 लाख सदस्यों के साथ, पंजाब का सहकारी क्षेत्र राज्य की बड़ी आबादी के जीवन को प्रभावित करता है, अब आधुनिक लीडरशिप और व्यापक विस्तार की ज़रूरत: सांसद सतनाम सिंह संधू
पीएम मोदी ने 'समृद्धि के लिए सहयोग' के संकल्प के साथ सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर एक नए युग की शुरुआत की है,यह सफलता का नया अध्याय लिख रहा है: सांसद सतनाम सिंह संधू
नई दिल्ली, 3 फरवरी -- राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने आज केंद्र सरकार से पंजाब में भारत की पहली सहकारी यूनिवर्सिटी 'त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी' का एक रीजनल सेंटर स्थापित करने की मांग की, ताकि प्रोफेशनलिज्म और इनोवेशन के ज़रिए पंजाब के सहकारी क्षेत्र में नई ऊर्जा लाई जा सके।
राज्यसभा में स्पेशल मेंशन के ज़रिए यह मुद्दा उठाते हुए, सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि पंजाब का सहकारी क्षेत्र राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव है। सहकारी क्षेत्र भारत की सामूहिक चेतना का प्रतीक है। यह सिर्फ़ एक वित्तीय प्रणाली नहीं, बल्कि एक संस्कृति और समावेशी विकास की एक जीवित परंपरा है। पंजाब की धरती ने पिछले 135 वर्षों से इस परंपरा को सींचा है। 1891 में पंजाब में स्थापित पहली सहकारी समिति का उद्देश्य मुनाफ़ा कमाना नहीं, बल्कि साझा ज़मीन और साझा समृद्धि था। ज़मीन के एकीकरण की शुरुआत से लेकर हरित और श्वेत क्रांति तक, सहकारी समितियाँ पंजाब की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्विवाद आधारशिला रही हैं।
सांसद ने आगे कहा, “यह बहुत ही गर्व की बात है कि लगभग 20,000 सहकारी समितियों और 35 लाख सदस्यों के साथ यह पंजाब की बड़ी आबादी के जीवन को प्रभावित करती है। पंजाब मार्कफ़ेड, जो बहुत कम पूंजी से शुरू हुआ था, आज 22,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ एशिया की सबसे बड़ी मार्केटिंग सहकारी समिति बन गई है। 6,300 गाँव-स्तरीय सहकारी समितियों और 3,50,000 सदस्यों के साथ, पंजाब मिल्कफ़ेड का वेरका देश में एक बड़ा ब्रांड बन गया है। पंजाब में लगभग 60% फर्टिलाइजर मार्केट सहकारी समितियों द्वारा संचालित हैं। इसी वजह से, पंजाब के किसान सिर्फ़ निजी कंपनियों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर हैं।”
सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा,"पंजाब में कोऑपरेटिव बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स और भ्रष्टाचार की समस्या का सामना कर रहा है। अब पंजाब का कोऑपरेटिव सेक्टर बड़े पैमाने पर विस्तार की बजाय अपने अस्तित्व बचाये रखने तक सीमित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'समृद्धि के लिए सहयोग' के संकल्प के साथ केंद्र में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना करके एक नए युग की शुरुआत की है। भारत के सहकारिता मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व में यह मंत्रालय सफलता का एक नया अध्याय लिख रहा है।”
सांसद ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जिस पंजाब ने देश को सहकारिता का रास्ता दिखाया, वह पीछे न रह जाये। पंजाब के कोऑपरेटिव सेक्टर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के वर्षों से लंबित कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए ताकि इसमें नई ऊर्जा आ सके। साथ ही फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को प्रोत्साहित किया जाए तथा युवा किसानों और महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमिता के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सांसद ने पंजाब में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के रीजनल सेंटर की स्थापना की भी मांग की जिससे व्यावसायिकता और इनोवेशन के ज़रिए पंजाब के कोऑपरेटिव सेक्टर में नई ऊर्जा आएगी।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 की सराहना करते हुए सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा, 'सहकारी समितियों का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर कार्यकुशलता करेगा सुनिश्चित'
इस बीच, 2025 में केंद्रीय सहकारिता मंत्री द्वारा घोषित राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 की सराहना करते हुए, सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि यह नीति सहकारी आंदोलन को फिर से जीवंत करने के लिए डिजिटल बदलाव पर जोर देती है, जिसका लक्ष्य इसे प्रोफेशनल, पारदर्शी और कुशल बनाना है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के तहत, एक ईआरपी-आधारित राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से 79,630 प्राथमिक कृषि समितियों (PACs) के कंप्यूटरीकरण के लिए 2,925 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह सभी सहकारी समितियों के रियल-टाइम डेटाबेस को बेहतर बनाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है जिसका उपयोग डेटा-संचालित नीति निर्माण और निगरानी के लिए किया जा सकता है। सांसद ने आगे कहा कि सहकारी समितियों को डिजिटल बनाने से राजनीतिक हस्तक्षेप कम होगा और सहकारी समितियां अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगी, जिससे किसानों के समुदाय को सुविधा होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
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