Canada PM कार्नी की यात्रा से व्यापार और द्विपक्षीय सहयोग के लिए जगी बड़ी उम्मीदें, भारत-कनाडा के संबंध होंगे मजबूत : भारतीय मूल की कनाडाई मंत्री राजन साहनी
'कनाडा एक भरोसेमंद पार्टनर, भारत के साथ आगे का रास्ता पॉजिटिव और प्रोडक्टिव : चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में कनाडा की इंडिजिनस रिलेशन्स मिनिस्टर राजन साहनी
‘पीएम मार्क कार्नी की यात्रा से भारत-कनाडा संबंधों को मिलेगी नई दिशा और व्यापार के नए खुलेंगे अवसर : भारतीय मूल की कनाडाई मंत्री राजन साहनी
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने भारत-कनाडा के एकेडमिक संबंधों को मज़बूत करने रिसर्च और स्टूडेंट मोबिलिटी के लिए कोलैबोरेशन की पेशकश
वीज़ा और काउंसलर मुद्दों को कनाडा सरकार के साथ उठाएंगे, भारतीयों के लिए बेहतर सर्विस की करेंगे अपील : चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में कनाडा की स्वदेशी संबंधों की मंत्री राजन साहनी
प्रवासी भारतीय, खासकर पंजाबी, कनाडा के सबसे मजबूत टैलेंट पूल में से हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत और योगदान से कनाडा में बनाई अपनी पहचान : भारतीय मूल की कनाडाई मंत्री राजन साहनी
चंडीगढ़/ मोहाली
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम 'बियॉन्ड डिप्लोमेसी: पीपल, नॉलेज एंड यूथ एज द फ्यूचर ऑफ इंडिया-कनाडा रिलेशन्स' में पहुंची कनाडा की इंडिजिनस रिलेशन्स मिनिस्टर राजन साहनी ने कहा कि कनाडा चाहता है कि भारत यह जाने कि हम एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार हैं तथा हमारे द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य सकारात्मक और प्रोडक्टिव है।”
उन्होंने व्यापार, शिक्षा, ऊर्जा, अनुसंधान, महत्वपूर्ण खनिजों और लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्रों में भारत–कनाडा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। वह व्यापार, शैक्षणिक, अनुसंधान और आर्थिक सहयोग का पता लगाने के लिए भारत आए एक उच्च-स्तरीय कनाडाई प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
इस साल मार्च में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर साहनी ने कहा कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ बड़े व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत–कनाडा व्यापार संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। यह साझा इरादों को ठोस व्यापारिक परिणामों में बदलने में सहायक सिद्ध होगा। व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ज्ञान हस्तांतरण की अपार संभावनाएं हैं और मुझे उम्मीद है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच चर्चा फलदायी और दूरंदेशी होगी।"
रिसर्च, एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी पर बात करते हुए, कनाडाई मंत्री ने भारतीय और कनाडाई यूनिवर्सिटीज़ के बीच संस्थागत सहयोग के बढ़ते दायरे खासकर एनर्जी, डी-कार्बनाइज़ेशन, सस्टेनेबिलिटी, एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एग्री-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र पर ज़ोर दिया। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पोस्ट-सेकेंडरी संस्थानों के बीच मज़बूत रिश्ते बनाना सार्थक रिसर्च पार्टनरशिप की दिशा में पहला कदम है।
साहनी ने आगे कहा कि एक बार जब यूनिवर्सिटियों के बीच संबंध बन जाते हैं, तो अवसर अपनेआप बन होते हैं। रिसर्च के लिए शुरुआती फंडिंग अक्सर न केवल सरकारों से, बल्कि खुद यूनिवर्सिटियों, प्राइवेट सेक्टर के अग्रणियों, नॉन-प्रॉफिट संगठनों और दूसरी एजेंसियों से भी आती है। कनाडाई संस्थान वैश्विक स्तर पर उपयुक्त साझेदारों की तलाश में हैं।”
इस बीच, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर, दीप इंदर सिंह संधू ने कनाडाई मंत्री को एकेडमिक्स, रिसर्च और इनोवेशन, क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव रखा।
प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए साहनी ने कहा कि इसे इंस्टीट्यूशन-टू-इंस्टीट्यूशन सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। हम चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) भविष्य की आवश्यकता है और कनाडा के कई यूनिवर्सिटियाँ इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इसके अलावा, क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एग्री-टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड रिसर्च में मिलकर काम कर सकते हैं, जहाँ हमारे संस्थान एक-दूसरे से सीख कर रियल वर्ल्ड को प्रभावित कर सकते हैं।
इंटरनेशनल एजुकेशन पर, कनाडाई मंत्री ने कहा कि इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए कनाडा का कोटा पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हुआ है और भारतीय स्टूडेंट्स अभी भी अप्लाई कर सकते हैं। ग्लोबल स्टूडेंट्स की पसंद बदल रही है, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ज़्यादा दिलचस्पी दिख रही है, लेकिन कनाडा में भी मौके हैं। भारत के स्टूडेंट्स कनाडा में अच्छी क्वालिटी की शिक्षा पाते हैं और वे उस ज्ञान, टेक्नोलॉजी और सीख को पंजाब और भारत वापस ला सकते हैं। साथ ही, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान भारत में टैलेंट को बनाए रखकर उतनी ही ज़रूरी भूमिका निभाते हैं।”
चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु जैसे भारतीय शहरों में इन-पर्सन काउंसलर सेवाओं के सस्पेंशन और वीज़ा से जुड़ी चिंताओं पर साहनी ने कहा कि काउंसलर सेवाएं एक फेडरल मामला है, लेकिन हम इस मुद्दे को अपने फेडरल साथियों के साथ उठाएंगे और भारतीय स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स की चिंताओं को दूर करने के लिए सेवाओं के विस्तार की वकालत करेंगे।”
नस्लीय भेदभाव पर, साहनी ने कहा कि यह एक चुनौती है जो दुनिया भर में मौजूद है, लेकिन कनाडाई सरकार ऐसे भेदभाव के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाती है।”
पंजाब के फगवाड़ा में अपनी भारतीय लगाव के बारे में बात करते हुए साहनी ने कहा कि 25 साल बाद फगवाड़ा के पास अपने पैतृक गांव जाना एक इमोशनल अनुभव था, और मुझे जो प्यार और सम्मान मिला, उससे मैं बहुत प्रभावित हुई। 2023 में, मैं अपने बच्चों को भी चंडीगढ़ लाई ताकि उन्हें हमारा पुश्तैनी घर दिखा सकूं।
पंजाबियों के कनाडा को दूसरा घर बनाने के बारे में एक सवाल के जवाब में साहनी ने कहा कि कनाडा सिर्फ पंजाबियों के लिए दूसरा घर नहीं बना है, बल्कि पंजाबियों ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और कनाडा में योगदान से वह जगह हासिल की है। भारतीय डायस्पोरा, खासकर पंजाब से, ने कनाडा की ग्रोथ और डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाई है। अगर आप कनाडा में सभी सेक्टरों में टैलेंट पूल को देखें, तो पंजाबी सबसे मजबूत और सबसे ज़्यादा दिखने वाली कम्युनिटी में से एक हैं। कई मायनों में, पंजाब कनाडा के लिए दूसरा घर बन गया है और यह रिश्ता मेहनत, भरोसे और योगदान से बना है।
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